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Parliament: पेपर लीक पर सरकार और विपक्ष में गतिरोध टूटने के आसार, कल हो सकती है चर्चा; कैसे बनी सहमति?
Mon, 27 Jul 2026 06:10 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 27 Jul 2026 06:10 PM IST
सार
पेपर लीक रोकने के लिए लाए गए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर 28 जुलाई को लोकसभा में चर्चा होने की संभावना है। संसदीय सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष सहमत हो गए हैं। आखिर इस विधेयक में क्या नए प्रावधान हैं और इससे छात्रों को क्या फायदा होगा? साथ ही विस्तार से ये भी जानेंगे कि सभी दलों में सहमति कैसे बनी...
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ओम बिरला की पहल से कैसे बनी सभी दलों में सहमति?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
संसद के मानसून सत्र में पेपर लीक के मुद्दे पर जारी गतिरोध मंगलवार को खत्म हो सकता है। संसदीय सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल और सभी दलों के नेताओं से लगातार बातचीत के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के लिए तैयार हो गए हैं। इससे पहले विपक्ष के हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई थी। अब 28 जुलाई को इस अहम विधेयक पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
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लोकसभा अध्यक्ष की पहल से कैसे बनी सहमति?
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विभिन्न राजनीतिक दलों के फ्लोर नेताओं से लगातार बातचीत की। उन्होंने इस विधेयक पर छह घंटे की विशेष चर्चा का प्रस्ताव रखा और कहा कि देश की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सभी दलों का एकजुट होना जरूरी है। इस पहल के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इस बात पर सहमत हो गए कि मंगलवार को विधेयक पर विस्तार से चर्चा होगी। बताया गया कि यदि विपक्ष अधिक समय चाहता है तो चर्चा का समय भी बढ़ाया जा सकता है।
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विधेयक में क्या हैं नए और सख्त प्रावधान?
केंद्र सरकार ने सोमवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह विधेयक सदन में रखा। प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक, नकल, संगठित परीक्षा माफिया और अन्य अनुचित गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। विधेयक में अधिकतम सजा पांच साल से बढ़ाकर 10 साल तक करने और जुर्माना 50 लाख रुपये तक करने का प्रस्ताव है। वहीं, संगठित अपराध से जुड़े मामलों में न्यूनतम सजा सात साल और अधिकतम जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने का भी प्रावधान है।
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