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Protest: CJP के बाद सोशल मीडिया पर छाया रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन, 5 दिन में हुए 46 लाख फॉलोअर्स; क्या हैं मांगें?

Mon, 27 Jul 2026 06:44 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 27 Jul 2026 06:44 PM IST
सार

Reservation Hatao Andolan: सीजेपी आंदोलन के खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' तेजी से चर्चा में आ गया। इस अभियान ने महज पांच दिनों में इंस्टाग्राम पर 46 लाख फॉलोअर्स जुटाने का दावा किया। यह समूह खुद को किसी भी राजनीतिक दल से अलग बताते हुए आरक्षण नीति में बदलाव की मांग कर रहा। आखिर इस अभियान की प्रमुख मांगें क्या हैं और यह इतना तेजी से क्यों चर्चा में आया? सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Reservation Hatao Andolan Goes Viral After CJP, Gains 46 lakh Instagram Followers in five Days
सोशल मीडिया पर छाया रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सीजेपी के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन के खत्म होने के बाद अब सोशल मीडिया पर एक नया अभियान तेजी से उभरता दिखाई दे रहा है। रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन (आरएचए) नाम का एक समूह महज पांच दिनों में इंस्टाग्राम पर 46 लाख फॉलोअर्स तक पहुंचने का दावा कर रहा है। यह अभियान खुद को नागरिकों द्वारा चलाया गया आंदोलन बताता है और कहता है कि उसका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। यह पूरा अभियान सोशल मीडिया के जरिए आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर चलाया जा रहा है और इसी वजह से चर्चा में है।
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रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन क्या है?

इस समूह का इंस्टाग्राम अकाउंट reservationhataomovement नाम से चल रहा। इसमें 109 पोस्ट हैं और यह केवल भारतीय सेना के आधिकारिक अकाउंट को फॉलो करता है। समूह के प्रोफाइल में लिखा है कि यह उन नागरिकों का अभियान है, जो मानते हैं कि सुधार की आवाज उठनी चाहिए। इसके साथ ही प्रोफाइल में डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रसिद्ध नारे 'एजुकेट-एजिटेट-ऑर्गेनाइज' का इस्तेमाल किया गया है। हिंदी में लिखा गया है कि 'सारी जाति एक समान, मेरा बस ये देश महान।' अंत में 'जय हिंद' लिखा गया।
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समूह की मुख्य मांगें क्या हैं?

  • समूह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि यदि सरकार का उद्देश्य जाति आधारित भेदभाव खत्म करना है, तो सार्वजनिक जीवन में जाति की पहचान का इस्तेमाल बंद किया जाना चाहिए। 
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  • समूह का कहना है कि व्यक्ति की पहचान जाट-गुर्जर या एससी-एसटी जैसे जातीय आधार पर नहीं होनी चाहिए। उसने सार्वजनिक रूप से जाति प्रदर्शित करने को अवैध घोषित करने की मांग की।
  • इसके साथ ही सरकारी फॉर्म, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, नौकरी के आवेदन और अन्य सार्वजनिक प्रक्रियाओं में जाति का उल्लेख अनिवार्य नहीं होना चाहिए।
  • समूह ने अपने दीर्घकालिक लक्ष्य को "वन नेशन, वन आइडेंटिटी, इंडियन" बताया है और नारा दिया है कि आरक्षण हटाओ जाति हटाओ।

भाजपा और राजनीति को लेकर समूह ने क्या कहा?

समूह ने अपने एक पोस्ट में कहा है कि उसका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। पोस्ट में कहा गया कि पहले उन्हें उम्मीद थी कि सरकार बदलने से आरक्षण व्यवस्था में बड़े सुधार होंगे, लेकिन उनके अनुसार ऐसा नहीं हुआ। समूह ने लिखा कि भाजपा भी आरक्षण नीति में बदलाव नहीं कर सकी और समय के साथ आरक्षण व्यवस्था का विस्तार होता गया। इसलिए उनका मानना है कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि नीति का है। समूह ने कहा कि उसका फोकस किसी पार्टी पर नहीं, बल्कि नीति में बदलाव की मांग पर है।

सीजेपी आंदोलन के बाद और कौन से अभियान सामने आए?

इस अभियान के सामने आने के साथ ही सोशल मीडिया पर अन्य मुद्दों को लेकर भी नए अभियान शुरू हुए हैं। सीजेपी का 49 दिन लंबा आंदोलन 25 जुलाई को केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद समाप्त हुआ था। आंदोलन समाप्त होने के बाद E20 जनता पार्टी नाम का एक नया अभियान भी सोशल मीडिया पर सामने आया। यह अभियान 100 प्रतिशत पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराने की मांग कर रहा है और केंद्र की इथेनॉल नीति को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इस अभियान को दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स तथा टूर ऑपरेटर्स का भी समर्थन मिला है। संगठनों ने 4 अगस्त को संसद तक मार्च निकालने की घोषणा की है।

सीजेपी आंदोलन की पूरी कहानी?

सीजेपी ने 49 दिन तक चले अपने आंदोलन को शनिवार को समाप्त करने की घोषणा की थी। समूह का दावा था कि केंद्र सरकार ने उसकी प्रमुख मांगें स्वीकार कर ली हैं। इनमें तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, आगे की कार्रवाई और परीक्षा सुधारों का आश्वासन शामिल था। बातचीत के बाद आंदोलन खत्म करने की घोषणा की गई और समर्थकों से शांतिपूर्वक अपने घर लौटने की अपील की गई। अब इसी के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग सार्वजनिक नीतियों को लेकर नए अभियान सामने आने लगे हैं।
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