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नीट के बाद अब गुजरात में BAMS पेपर लीक?: AAP नेता संजय सिंह का बड़ा आरोप, कहा- भाजपा और पीएम मोदी की मिलीभगत
Mon, 27 Jul 2026 05:46 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 27 Jul 2026 05:46 PM IST
सार
गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में बीएएमएस का पेपर लीक होने का आरोप लगा है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार और पीएम मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मिलीभगत के कारण ही देश में लगातार पेपर लीक हो रहे हैं। दूसरी तरफ, यूनिवर्सिटी ने मामले की पड़ताल के लिए विशेष जांच समिति बना दी है।
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पेपर लीक पर विपक्ष ने सरकार को घेरा
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
देश में परीक्षाओं के पर्चे लीक होने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। नीट यूजी के बाद अब गुजरात में भी बड़ा मामला सामने आया है। जामनगर स्थित प्रसिद्ध गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में बीएएमएस परीक्षा का पर्चा लीक होने का आरोप लगा है। इस घटना से छात्रों में भारी आक्रोश है। अब इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार और भाजपा पर सीधा हमला बोला है।
संजय सिंह ने क्या बड़े आरोप लगाए?
संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि देश भर में लगातार पेपर लीक हो रहे हैं। इसमें भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिलीभगत है। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां पेपर लीक होना आम बात बन गई है। उन्होंने दावा किया कि घोटाले में शामिल कंपनियों के तार सत्ता से जुड़े हैं। ये कंपनियां पीएम मोदी और भाजपा के मुख्यमंत्रियों के करीबी हैं। इसी वजह से पेपर लीक करने वाले माफियाओं पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती है।
जामनगर की आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में क्या हुआ?
संजय सिंह ने गुजरात के इस नए मामले की पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में बीएएमएस की परीक्षाएं चल रही हैं। बीएएमएस का मतलब बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी होता है। आप सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि यहां 20 जुलाई को बीएएमएस थर्ड ईयर के 'शल्य तंत्र-1' विषय का पेपर था। आरोप है कि परीक्षा से ठीक पहले ही इसके सवाल व्हाट्सएप पर वायरल हो गए। परीक्षा में कुल 12 सवाल पूछे गए थे। इनमें से 11 सवाल वही थे, जो व्हाट्सएप पर पहले ही शेयर हो चुके थे। संजय सिंह ने डर जताया कि ये परीक्षाएं दो अगस्त तक चलेंगी। तब तक और कितने पेपर लीक होंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता।
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यह भी पढ़ें: E20: ई20 से मुनाफे के आरोपों पर नितिन गडकरी का बड़ा कदम, सोशल मीडिया पोस्ट और डीपफेक के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे
यूनिवर्सिटी प्रशासन का क्या कहना है?
विवाद बढ़ते ही यूनिवर्सिटी प्रशासन में हड़कंप मच गया। इंचार्ज एग्जामिनेशन डायरेक्टर एचपी झाला ने इस पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई की सुबह परीक्षा शांति से पूरी हो गई थी। लेकिन शाम को मोबाइल पर सवाल वायरल होने की सूचना मिली। इसके बाद वाइस चांसलर से बात की गई। मामले की जांच के लिए तुरंत एक विशेष जांच समिति बना दी गई है। यूनिवर्सिटी ने कहा कि अभी पेपर लीक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम फैसला होगा। अगर कोई दोषी पाया गया, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल 20 से 25 कॉलेजों की बाकी परीक्षाएं रद्द नहीं की गई हैं। वे अपने तय समय पर ही होंगी।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। 2014 से 2024 के बीच गुजरात में 34 पेपर लीक हुए हैं। 2014 में जीपीएससी चीफ ऑफिसर का पेपर, 2015 और 2016 में तलाटी का पेपर, 2018 में टीएटी-टीचर पेपर, मुख्य सेविका पेपर, नायब चिटनिस पेपर और लोक रक्षक दल का पेपर, 2019 में नॉन-सेक्रेटेरिएट क्लर्क परीक्षा, 2021 में हेड क्लर्क, डीजीवीसीएल विद्युत असिस्टेंट और सब-ऑडिटर परीक्षाएं, 2022 में फॉरेस्ट गार्ड परीक्षा और 2023 में जूनियर क्लर्क परीक्षा। ये सभी पेपर लीक हुए।
रमेश ने यह भी कहा कि 2024 में यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा का चर्चित लीक भी अहमदाबाद से ही करवाया गया था। भाजपा के शासन में गुजरात भारत में सभी पेपर लीक का केंद्र बन गया है। मोदी सरकार की फास्ट-ट्रैक अदालतें इस सिस्टम से जुड़ी समस्या का समाधान नहीं हैं। यह ध्यान भटकाने का एक तरीका है। हमें इस बात पर एक बड़ी और ईमानदार बातचीत की जरूरत है कि अपनी परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार कैसे किया जाए।
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संजय सिंह ने क्या बड़े आरोप लगाए?
संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि देश भर में लगातार पेपर लीक हो रहे हैं। इसमें भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिलीभगत है। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां पेपर लीक होना आम बात बन गई है। उन्होंने दावा किया कि घोटाले में शामिल कंपनियों के तार सत्ता से जुड़े हैं। ये कंपनियां पीएम मोदी और भाजपा के मुख्यमंत्रियों के करीबी हैं। इसी वजह से पेपर लीक करने वाले माफियाओं पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती है।
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जामनगर की आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में क्या हुआ?
संजय सिंह ने गुजरात के इस नए मामले की पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में बीएएमएस की परीक्षाएं चल रही हैं। बीएएमएस का मतलब बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी होता है। आप सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि यहां 20 जुलाई को बीएएमएस थर्ड ईयर के 'शल्य तंत्र-1' विषय का पेपर था। आरोप है कि परीक्षा से ठीक पहले ही इसके सवाल व्हाट्सएप पर वायरल हो गए। परीक्षा में कुल 12 सवाल पूछे गए थे। इनमें से 11 सवाल वही थे, जो व्हाट्सएप पर पहले ही शेयर हो चुके थे। संजय सिंह ने डर जताया कि ये परीक्षाएं दो अगस्त तक चलेंगी। तब तक और कितने पेपर लीक होंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता।
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यूनिवर्सिटी प्रशासन का क्या कहना है?
विवाद बढ़ते ही यूनिवर्सिटी प्रशासन में हड़कंप मच गया। इंचार्ज एग्जामिनेशन डायरेक्टर एचपी झाला ने इस पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई की सुबह परीक्षा शांति से पूरी हो गई थी। लेकिन शाम को मोबाइल पर सवाल वायरल होने की सूचना मिली। इसके बाद वाइस चांसलर से बात की गई। मामले की जांच के लिए तुरंत एक विशेष जांच समिति बना दी गई है। यूनिवर्सिटी ने कहा कि अभी पेपर लीक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम फैसला होगा। अगर कोई दोषी पाया गया, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल 20 से 25 कॉलेजों की बाकी परीक्षाएं रद्द नहीं की गई हैं। वे अपने तय समय पर ही होंगी।
क्या है पूरा मामला?
- 20 जुलाई को बीएएमएस थर्ड ईयर का शल्य तंत्र-1 का पेपर हुआ।
- आरोप है कि परीक्षा शुरू होने से पहले WhatsApp पर सवाल वायरल हो गए थे।
- दावा किया गया कि वायरल हुए 12 में से 11 सवाल परीक्षा में पूछे गए।
- इस मामले के बाद यूनिवर्सिटी ने विशेष जांच समिति बना दी।
- AAP सांसद संजय सिंह ने इस घटना को लेकर BJP और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए।
- वहीं, यूनिवर्सिटी ने पेपर लीक की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। 2014 से 2024 के बीच गुजरात में 34 पेपर लीक हुए हैं। 2014 में जीपीएससी चीफ ऑफिसर का पेपर, 2015 और 2016 में तलाटी का पेपर, 2018 में टीएटी-टीचर पेपर, मुख्य सेविका पेपर, नायब चिटनिस पेपर और लोक रक्षक दल का पेपर, 2019 में नॉन-सेक्रेटेरिएट क्लर्क परीक्षा, 2021 में हेड क्लर्क, डीजीवीसीएल विद्युत असिस्टेंट और सब-ऑडिटर परीक्षाएं, 2022 में फॉरेस्ट गार्ड परीक्षा और 2023 में जूनियर क्लर्क परीक्षा। ये सभी पेपर लीक हुए।
रमेश ने यह भी कहा कि 2024 में यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा का चर्चित लीक भी अहमदाबाद से ही करवाया गया था। भाजपा के शासन में गुजरात भारत में सभी पेपर लीक का केंद्र बन गया है। मोदी सरकार की फास्ट-ट्रैक अदालतें इस सिस्टम से जुड़ी समस्या का समाधान नहीं हैं। यह ध्यान भटकाने का एक तरीका है। हमें इस बात पर एक बड़ी और ईमानदार बातचीत की जरूरत है कि अपनी परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार कैसे किया जाए।