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CJP प्रदर्शन: पश्चिम एशिया की बड़ी साजिश, AI से बना मंत्री का वीडियो; महाराष्ट्र पुलिस ने कैसे किया पर्दाफाश?

Mon, 27 Jul 2026 06:31 PM IST
राकेश कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुबई।
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुबई। Published by: राकेश कुमार Updated Mon, 27 Jul 2026 06:31 PM IST
सार

महाराष्ट्र साइबर ने सीजेपी प्रदर्शनों के दौरान विदेश से चलाए जा रहे भारत विरोधी प्रोपेगैंडा का पर्दाफाश किया है। पाकिस्तान, मलेशिया और मध्य पूर्व से एआई तथा डीपफेक का इस्तेमाल कर भ्रम फैलाया जा रहा था। पुलिस ने 500 से अधिक खातों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
 

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CJP Protest Maharashtra Cyber uncovered  Anti India Propaganda Deepfake Video
सीजेपी प्रदर्शन - फोटो : ANI/ सोशल मीडिया

विस्तार

महाराष्ट्र साइबर पुलिस की नोडल एजेंसी ने सोमवार को एक बड़ा खुलासा किया है। भारत में अशांति और भ्रम फैलाने के लिए विदेशों से एक बड़ी साजिश रची जा रही थी। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शनों की आड़ में सोशल मीडिया पर फर्जी प्रचार फैलाया जा रहा था। साइबर सेल की जांच में 500 से अधिक संदिग्ध सोशल मीडिया प्रोफाइल की पहचान की गई है। ये सभी खाते एक संगठित नेटवर्क के तहत काम कर रहे थे।
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महाराष्ट्र साइबर पुलिस की जांच में क्या-क्या मिला?
  • 500 से अधिक संदिग्ध सोशल मीडिया खातों की पहचान की गई है।
  • लगभग 100 खाते पाकिस्तान, मलेशिया और पश्चिम एशिया के देशों से चलाए जा रहे थे।
  • जांच के दौरान 429 आपत्तिजनक पोस्ट और हैंडल चिन्हित किए गए।
  • 140 से ज्यादा पोस्ट में एआई और डीपफेक तकनीक का प्रयोग हुआ था।
  • एक माननीय केंद्रीय मंत्री का वीडियो और ऑडियो एआई से तैयार किया गया था।
  • पुलिस ने OSINT, मेटाडेटा और फॉरेंसिक टूल्स से साजिश पकड़ी।
  • पुलिस ने सोशल मीडिया कंपनियों से संपर्क कर खाते ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

किस तरह पकड़ी गई विदेशों से चल रही यह साजिश?
महाराष्ट्र साइबर पुलिस डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लगातार नजर रखती है। एजेंसी गैर-कानूनी कंटेंट और साइबर खतरों की निगरानी करती है। सीजेपी के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने व्यापक निगरानी अभियान चलाया। इस काम में ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (ओएसआईएनटी) का इस्तेमाल किया गया। मेटाडेटा जांच और बिहेवियरल एनालिसिस की मदद ली गई। फॉरेंसिक टूल्स के जरिए फर्जी खातों को खोजा गया।
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जांच में फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब पर कई संदिग्ध खाते मिले। ये सभी खाते फर्जी और एआई-जनरेटेड सामग्री फैला रहे थे। तकनीकी जांच से पता चला कि इनमें से करीब 100 खाते भारत के बाहर से चल रहे थे। ये खाते मुख्य रूप से पाकिस्तान, मलेशिया और कुछ मध्य पूर्वी देशों से संचालित थे।
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डीपफेक तकनीक से कैसे बनाया गया केंद्रीय मंत्री का नकली वीडियो?
एजेंसी की फॉरेंसिक लैब जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आपत्तिजनक पोस्ट्स में भीड़ के फर्जी दृश्य शामिल थे। नेताओं की सिंथेटिक आवाजें और क्लोन किए गए ऑडियो फैलाए गए। सार्वजनिक हस्तियों के वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई थी। जांच में एक माननीय केंद्रीय मंत्री का वीडियो भी सामने आया। फॉरेंसिक लैब ने पाया कि वीडियो में 82 प्रतिशत हेरफेर थी। वीडियो के ऑडियो में 100 प्रतिशत हेरफेर पाई गई। इससे साफ हो गया कि चेहरा और आवाज दोनों एआई से बनाए गए थे।

महाराष्ट्र साइबर ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है। संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों के जरिए इन सामग्रियों को हटाया जा रहा है। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है। लोग किसी भी खबर को शेयर करने से पहले उसकी पुष्टि सरकारी स्रोतों से जरूर कर लें। बिना जांच के कोई भी मैसेज फॉरवर्ड न करें।
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