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महाराष्ट्र में भी यूसीसी की तैयारी तेज: अगले हफ्ते हो सकता है समिति का एलान; सीएम फडणवीस ने और क्या-क्या कहा?

Sat, 04 Jul 2026 02:18 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sat, 04 Jul 2026 02:18 PM IST
सार

Fadnavis On Maharashtra UCC Committee: महाराष्ट्र सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए विशेषज्ञ समिति बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने अगले सप्ताह इसकी घोषणा के संकेत दिए हैं। ऐसे में आइए, विस्तार से जानते हैं कि यह समिति क्या काम करेगी? यूसीसी में किन विषयों को शामिल किया जा सकता है? उत्तराखंड का अनुभव क्यों अहम माना जा रहा है? कांग्रेस व शिवसेना ने इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी?

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Maharashtra Begins Process for UCC Uniform Civil Code Expert Committee Likely to Be Announced Next Week
यूसीसी पर सरकार का नया प्लान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार पहले एक विशेषज्ञ समिति का गठन करेगी, जो मौजूदा कानूनों का अध्ययन कर महाराष्ट्र के लिए यूसीसी का मसौदा तैयार करेगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संकेत दिए हैं कि विधानसभा के मौजूदा मानसून सत्र के दौरान समिति के गठन की घोषणा अगले सप्ताह की जा सकती है। इस फैसले के बाद राज्य में यूसीसी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।
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सरकार यूसीसी लागू करने के लिए क्या तैयारी कर रही?

महाराष्ट्र सरकार राज्य विधानसभा में विधेयक लाने से पहले विशेषज्ञ समिति गठित करेगी। यह समिति मौजूदा कानूनी व्यवस्था का अध्ययन करेगी, जरूरी दस्तावेजों की समीक्षा करेगी और महाराष्ट्र के लिए समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करेगी। सरकार का उद्देश्य राज्य के लिए ऐसा कानूनी ढांचा तैयार करना है, जिसे आगे विधानसभा में पेश किया जा सके। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि समिति के गठन की घोषणा अगले सप्ताह किए जाने की संभावना है।
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मुख्यमंत्री फडणवीस ने यूसीसी को लेकर क्या कहा?

  • समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का विचार संविधान के नीति निदेशक तत्वों में शामिल है।
  • डॉ. भीमराव आंबेडकर भी समान नागरिक कानून के पक्षधर थे।
  • यूसीसी लागू होने पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में समान कानूनी व्यवस्था होगी।
  • इससे सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने का उद्देश्य पूरा होगा।
  • इससे संविधान में निहित समानता और एकरूपता के सिद्धांत को मजबूती मिलेगी।

देश के दूसरे राज्यों का क्या अनुभव?

महाराष्ट्र ऐसे समय में यूसीसी की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जब देश में इस विषय पर चर्चा तेज है। उत्तराखंड स्वतंत्रता के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है। महाराष्ट्र सरकार भी मसौदा तैयार करते समय उत्तराखंड के अनुभव का अध्ययन करेगी। इसके अलावा गुजरात और असम जैसे राज्यों ने भी समान नागरिक संहिता या व्यक्तिगत कानूनों में सुधार का समर्थन किया है।
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कांग्रेस ने सरकार के फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी?

  • कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने कहा कि संविधान के नीति निदेशक तत्वों में समान नागरिक संहिता का प्रावधान पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के योगदान से भी जुड़ा है और इसका उल्लेख भी किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यूसीसी जैसा कानून व्यापक सहमति के आधार पर बनाया जाना चाहिए।
  • उनके अनुसार मसौदा तैयार करने से पहले कानूनी विशेषज्ञों, वकीलों, विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों और अन्य पक्षों से विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कानून समावेशी और रचनात्मक होगा तो कांग्रेस उसका समर्थन करेगी, लेकिन यदि इसे केवल राजनीतिक विवाद या ध्रुवीकरण के लिए लाया गया तो पार्टी इसका विरोध करेगी।

शिवसेना ने इस फैसले का स्वागत क्यों किया?

शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता लंबे समय से पार्टी की वैचारिक प्राथमिकताओं में शामिल रही है। उन्होंने कहा कि दिवंगत बाल ठाकरे ने भाजपा के साथ राम मंदिर निर्माण, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और समान नागरिक संहिता जैसे प्रमुख मुद्दों पर वैचारिक सहमति बनाई थी। कायंदे ने उम्मीद जताई कि महाराष्ट्र जल्द यूसीसी लागू करने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल होगा।

क्या करेगी विशेषज्ञ समिति?

विशेषज्ञ समिति के गठन के बाद वह विभिन्न कानूनों और प्रावधानों का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें तैयार करेगी। इसके आधार पर महाराष्ट्र के लिए यूसीसी का मसौदा तैयार होगा। इसके बाद सरकार विधेयक को विधानसभा में पेश करने पर फैसला करेगी। फिलहाल सरकार की ओर से प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जबकि विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे पर अपने-अपने विचार सामने रख रहे हैं।
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