Maharashtra Civic Polls: बीएमसी चुनाव आज, क्या होगा मुंबई की सत्ता का भविष्य? ठाकरे ब्रांड की असली परीक्षा
BMC Election 2026: देश की सबसे अमीर महानगरपालिका बीएमसी के लिए आज मतदान हो रहा है। 74 हजार करोड़ रुपये के बजट वाली इस संस्था का चुनाव मुंबई की राजनीति की दिशा तय करेगा। ठाकरे बंधुओं का गठबंधन और भाजपा नीत महायुति आमने-सामने हैं।
विस्तार
देश की सबसे समृद्ध महानगरपालिका बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी के लिए आज मतदान हो रहा है। इसके साथ ही महाराष्ट्र की कुल 29 महानगरपालिकाओं में वोट डाले जाएंगे। बीएमसी का सालाना बजट 74 हजार करोड़ रुपये से अधिक है, जो इसे देश का सबसे अमीर नगरीय निकाय बनाता है।
यही वजह है कि इस चुनाव को सिर्फ स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं, बल्कि मुंबई की सत्ता और राजनीतिक दिशा तय करने वाला मुकाबला माना जा रहा है।
क्यों इतना अहम है बीएमसी का चुनाव?
बीएमसी चुनाव इसलिए खास है क्योंकि इसकी आर्थिक ताकत और प्रशासनिक दखल बहुत बड़ा है। कुछ साल पहले तक बीएमसी का बजट दिल्ली सरकार के बजट से भी ज्यादा हुआ करता था। मुंबई जैसे महानगर में सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं का जिम्मा बीएमसी के पास होता है। ऐसे में जिस दल का यहां कब्जा होता है, उसकी राजनीतिक पकड़ पूरे राज्य में मजबूत मानी जाती है।
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कितने उम्मीदवार मैदान में?
- बीएमसी समेत 29 महानगरपालिकाओं में कुल 15,931 उम्मीदवार मैदान में हैं।
- बीएमसी में सत्ता पाने के लिए सभी बड़े दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है।
- मुंबई में यह चुनाव 2024 के लोकसभा और आने वाले विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल भी माना जा रहा है।
- नतीजों से यह साफ होगा कि शहरी मतदाता किस राजनीतिक धारा के साथ खड़ा है।
क्या ठाकरे ब्रांड की हो रही अग्निपरीक्षा?
इस चुनाव में सबकी नजरें खास तौर पर ठाकरे बंधुओं पर टिकी हैं। शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे पहली बार बीएमसी में साथ उतरकर चुनाव लड़ रहे हैं। माना जा रहा है कि यह गठबंधन मराठी मतों के बंटवारे को रोकने के लिए किया गया है। अविभाजित शिवसेना ने 25 साल तक बीएमसी पर सत्ता चलाई थी, लेकिन पार्टी के दो फाड़ होने के बाद यह पहला मौका है, जब ठाकरे ब्रांड की असली ताकत की परीक्षा हो रही है।
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किसके बीच है मुख्य मुकाबला?
बीएमसी चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति और ठाकरे बंधुओं के गठबंधन के बीच माना जा रहा है। भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने इस बार रणनीति के तहत अजित पवार की एनसीपी को महायुति से बाहर रखा है, ताकि गैर-हिंदू मतदाताओं को आकर्षित किया जा सके। वहीं विपक्षी महाविकास आघाड़ी में कांग्रेस ने मुंबई में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
नतीजों से क्या संकेत मिलेंगे?
माना जा रहा है कि बीएमसी के नतीजे सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं रहेंगे। इससे महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय होगी। अगर ठाकरे बंधुओं का गठबंधन मजबूत प्रदर्शन करता है, तो इसे ठाकरे ब्रांड की वापसी के तौर पर देखा जाएगा। वहीं, अगर महायुति जीत दर्ज करती है, तो भाजपा और उसके सहयोगियों की पकड़ और मजबूत मानी जाएगी। कुल मिलाकर, आज का मतदान मुंबई की राजनीति का भविष्य तय करने वाला दिन साबित हो सकता है।
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