Maharashtra: चार महीने बाद भी धनंजय मुंडे ने नहीं खाली किया सरकारी बंगला, भुजबल अब भी कर रहे इंतजार
महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे ने इस्तीफा देने के चार महीने बाद भी सातपुड़ा सरकारी बंगला खाली नहीं किया है। इससे नए मंत्री छगन भुजबल को अब तक सरकारी आवास नहीं मिल पाया है। सीएम फडणवीस ने मुंडे के बंगले में रहने की बात स्वीकार की, लेकिन जुर्माने की जानकारी नहीं दी है।
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महाराष्ट्र के पूर्व खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री और अजित गुट के एनसीपी नेता धनंजय मुंडे ने मंत्री पद से इस्तीफा देने के चार महीने के बाद भी मुंबई स्थित सरकारी बंगला खाली नहीं किया है। ऐसे में उनके स्थान पर मंत्री बने एनसीपी के वरिष्ठ नेता और राज्य के मंत्री छगन भुजबल को अभी भी अपने बंगले को लेकर इंतजार करना पड़ रहा है। इस बात के बारे में जब सोमवार को सीएम देवेंद्र फडणवीस से पूछा गया तो उन्होंने भी इसपर हामी भरी।
देवेंद्र फडणवीस ने इस बात को स्वीकार किया कि मुंडे अब तक बंगले में रह रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उनके खिलाफ कितने जुर्माने की कार्रवाई हुई है। इस मामले में सीएम फडणवीस ने कहा कि मैं इस जुर्माने की जानकारी नहीं रखता, मुझे इस पर जानकारी लेनी होगी।
भुजबल को नहीं मिल पाया अपना सरकारी आवास
मुंडे के इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री बने एनसीपी के वरिष्ठ नेता और राज्य के मंत्री छगन भुजबल को अब तक अपना आधिकारिक आवास नहीं मिल पाया है। उन्हें मई महीने में मंत्री बनाए जाने के बाद सातपुड़ा बंगला आवंटित किया गया था, लेकिन मुंडे द्वारा उसे खाली न करने के कारण वे अब भी इंतजार कर रहे हैं।
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मुझे छोटा सा आवास ही दे दें सरकार- भुजगल
इसपर छगन भुजबल ने कहा कि मुझे जो आधिकारिक निवास आवंटित किया गया है, वह अब भी मेरे ही पार्टी सहयोगी और पूर्व मंत्री के पास है। उन्होंने कहा कि मैं उन्हें खुद नहीं कह सकता कि वह खाली करें। अगर जरूरत पड़ी, तो मुख्यमंत्री से कहूंगा कि मुझे छोटा सा आवास ही दे दें, जिससे मैं काम चला सकूं।
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समझिए क्यों दिया था मुंडे ने इस्तीफा?
बता दें कि धनंजय मुंडे खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री के पद पर थे, लेकिन चार मार्च को उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। उन पर आरोप था कि उनकी कथित नजदीकियां बीड़ जिले के सरपंच संतोष देशमुख की हत्या के मुख्य आरोपी वल्मिक कराड से थीं। मुंडे के इस्तीफे के बाद छगन भुजबल को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई और 23 मई को उन्हें सातपुड़ा बंगला आवंटित किया गया। लेकिन अब तक वे उसमें रह नहीं पाए हैं क्योंकि मुंडे ने बंगला खाली नहीं किया है।