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लातूर में इंसानियत शर्मसार: नाबालिग एचआईवी पीड़िता के साथ दो साल तक दुष्कर्म का मामला, चार आरोपी गिरफ्तार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 25 Jul 2025 11:59 PM IST
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सार

महाराष्ट्र के लातूर के सेवालय आश्रय गृह में एक नाबालिग एचआईवी पीड़ित लड़की के साथ दो साल तक दुष्कर्म और गर्भपात के लिए मजबूर करने का मामला सामने आया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आश्रय गृह के संस्थापक रवि बापटले, अधीक्षक रचना बापटले, कर्मचारी अमित महामुनि और पूजा वाघमारे को गिरफ्तार किया है। साथ ही मामले की जांच तेज कर दी गई है। 

Maharashtra HIV-infected girl alleges harassment forced abortion at Latur childrens home
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार

महाराष्ट्र के लातूर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। जहां एक बाल आश्रय गृह में एचआईवी संक्रमित एक नाबालिग लड़की के साथ दो साल तक दुष्कर्म और गर्भपात के लिए मजबूर करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने शुक्रवार को चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, पीड़ित लड़की ने धाराशिव जिले के ढोकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

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मामले में पीड़िता ने बताया कि 13 जुलाई, 2023 से 23 जुलाई, 2025 के बीच लातूर के हासेगांव में स्थित सेवालय नामक एचआईवी संक्रमित बच्चों के आश्रय गृह में उसके साथ कई बार बलात्कार किया गया। शिकायत के आधार पर, आश्रय गृह के एक कर्मचारी ने चार बार उसका यौन शोषण किया और उसे धमकी दी कि वह इस बारे में किसी को न बताए।
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पुलिस ने दर्ज किया मामला, चार गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में आश्रय गृह के संस्थापक, अधीक्षक, बलात्कार के आरोपी कर्मचारी और गर्भपात करने वाले डॉक्टर सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। लातूर के पुलिस अधीक्षक अमोल तांबे ने बताया कि मामला औसा पुलिस थाने को सौंपा गया, क्योंकि यह घटना उनके अधिकार क्षेत्र में हुई। इसके बाद, चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। बता दें कि मामले में  गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान रवि बापटले (सेवालय के संस्थापक), रचना बापटले (अधीक्षक), अमित महामुनि (कर्मचारी, दुष्कर्म का मुख्य आरोपी) और पूजा वाघमारे के रूप में हुई है। 

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पीड़िता ने आश्रय गृह के अधिकारियों से की थी शिकातय

पीड़िता युवती ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि उसने आश्रय गृह के अधिकारियों को पत्र लिखकर शिकायत पेटी में डाला था, लेकिन प्रबंधन ने उसकी मदद करने के बजाय पत्र को फाड़ दिया। इसके बाद, जब वह बीमार पड़ी और उसे अस्पताल ले जाया गया, तो जांच में पता चला कि वह चार महीने की गर्भवती थी। फिर, उसकी सहमति के बिना एक डॉक्टर द्वारा उसका गर्भपात करवाया गया। पुलिस अधीक्षक तांबे ने बताया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच तेज कर दी गई है। बाकी आरोपियों की तलाश जारी है, और पीड़ित लड़की को उचित सहायता और सुरक्षा प्रदान की जा रही है। 

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