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Maratha Politics: शिंदे गुट के सरनाईक बोले- उद्धव-राज ठाकरे ने मराठी भाषा नहीं, BMC पर कब्जे के लिए हाथ मिलाए

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 07 Jul 2025 03:13 AM IST
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सार

महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के साथ आने पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उद्धव और राज ठाकरे मराठी हित में नहीं, बल्कि बीएमसी की सत्ता के लिए साथ आए हैं। साथ ही सरनाईक ने एकनाथ शिंदे की मराठी भाषा को क्लासिकल दर्जा दिलाने की कोशिशों की तारीफ की और UBT-MNS पर स्वार्थी राजनीति का आरोप लगाया।

Maharashtra minister Sarnaik said that Uddhav-Raj came together not for Marathis but to capture BMC
राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक - फोटो : ANI
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विस्तार

20 साल बाद शनिवार को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ एक मंच पर आए। इसको लेकर राज्य भर में सियासी गर्माहट अपने चरम पर है। कई राजनीतिक पार्टियां खुले मंच से इस बात पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रही हैं। इसी बीच  शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री प्रताप सरनाईक ने भी रविवार को इस मामले में अपनी प्रतिकिया दी। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) मराठी लोगों के हित के लिए नहीं, बल्कि मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में सत्ता हासिल करने के लिए एकजुट हुए हैं।

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सरनाईक ने एकनाथ शिंदे की तारीफ की 
इस दौरान सरनाईक ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की तारीफ की। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा को क्लासिकल भाषा का दर्जा दिलाने के लिए उन्होंने केंद्र से लगातार संपर्क में रहकर ठोस प्रयास किए हैं। सरनाईक ने एक पत्र लिखकर कहा कि जब शिवसेना (एकीकृत) ने 25 साल तक बीएमसी पर राज किया, तब मराठी लोगों को होटल, रियल एस्टेट और सोने-चांदी के कारोबार से बाहर कर दिया गया।
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बीएमसी के लिए साथ आए उद्धव-राज
उन्होंने कहा कि लोग समझदार हैं। उन्हें पता है कि उद्धव और राज ठाकरे सिर्फ बीएमसी की सत्ता के लिए एक साथ आए हैं। इनकी राजनीति हमेशा स्वार्थी और झूठी रही है। सरनाईक ने तंज कसते हुए कहा कि जो पार्टियां आज मराठी के नाम पर एक हुई हैं, वे पहले अलग क्यों हुईं? अगर मराठी भाषा और संस्कृति से इतना ही प्रेम था तो पहले क्यों नहीं साथ रहे?


सरनाईक ने कहा कि राज ठाकरे ने मराठी लोगों की बात करने के लिए एमएनसी बनाई थी, लेकिन पिछले 19 वर्षों में हालात और बिगड़ गए। उन्होंने कहा कि लोगों को अब समझ आ गया है कि राज ठाकरे के भाषण तालियां तो बटोरते हैं, लेकिन वोट में नहीं बदलते।

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बीएमसी में सत्ता के लिए 'विजय रैली': सरनाईक
सरनाईक ने वर्ली में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की तरफ से आयोजित विजय रैली पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि ये रैली मराठी के नाम पर नहीं, बल्कि बीएमसी की कुर्सी के लिए थी। इसके साथ ही महाराष्ट्र के मंत्री ने भायंदर में एक उत्तर भारतीय दुकानदार पर मराठी न बोलने को लेकर हुए हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों के लोग यहां मिलजुलकर रहते हैं, लेकिन कुछ लोगों ने इस माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की है।

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