महाराष्ट्र: राज्य में सियासी घमासान तेज, क्या भाजपा से राज ठाकरे को मिल रही है पॉलिटिकल बूस्टर डोज?
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विस्तार
महाराष्ट्र में राजनीतिक हवाएं बड़ी तेजी से बदल रही हैं। इन हवाओं की चपेट में सत्ताधारी दल शिवसेना तो है ही, साथ में महाविकास अघाड़ी को अस्थिर करने का भी पूरा रोड मैप तैयार कर लिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मानें तो महाराष्ट्र में आक्रामक रवैये वाली शिवसेना को अपने अहम मुद्दों पर कमजोर पड़ती धार से उसका न सिर्फ नुकसान हो रहा है, बल्कि वह अपने धुर विरोधी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के राज ठाकरे को आगे बढ़ने का मौका भी दे रहे है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल महाराष्ट्र में बनते बिगड़ते तमाम हालातों को लेकर भाजपा के नेता जिस तरीके से केंद्रीय गृह सचिव से मिले हैं, उससे अगले कुछ दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में कई तरह के तूफान आने की आशंका बनी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषक और महाराष्ट्र की राजनीति को समझने वाले आरएन पराड़कर कहते हैं कि शिवसेना जब से अपने नए गठबंधन के साथ सरकार में आई है, तब से उसके कड़क हिंदुत्व वाले मिजाज में न सिर्फ कमी आई है, बल्कि गठबंधन की मजबूरी से सरकार चलाने की स्थितियां स्पष्ट देखी जा रही हैं। वह कहते हैं कि जिस तरीके से कड़क हिंदुत्व के मुद्दे पर शिवसेना आगे आती थी, वही अब उस पर बैकफुट पर है। इसी कमी को पूरा करने के लिए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के राज ठाकरे बढ़-चढ़कर आगे आए हैं।
क्या राज्य में हिंदुत्व की धुरी बनना चाहते हैं राज ठाकरे?
राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना सड़कों पर हनुमान चालीसा के पाठ के बाद से हिंदुत्व की धुरी बनने की पूरी योजना बना रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवसेना की गठबंधन में होने की मजबूरी के चलते राज ठाकरे को इससे फायदा भी मिल सकता है। हालांकि उनका कहना है महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के उग्र हिंदुत्व की धुरी से राज ठाकरे को चुनाव में कितना फायदा होगा, इसके बारे में अभी कहना बहुत जल्दी होगा। लेकिन उनका कहना है कि शिवसेना आरोप लगा रही है कि राज ठाकरे के माध्यम से भाजपा अपने हित साधने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक जानकार और महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में राजनीतिक अभियान चलाने वाले रमेश तुकाराम पवार कहते हैं कि इस पूरे मामले में एक तरीके से महाराष्ट्र में हाशिए पर पड़ी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। पवार कहते हैं कि जिस मुद्दे पर शिवसेना कभी राज्य में सबसे आगे हुआ करती थी, अब उसी मुद्दे पर एक बार फिर से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। वह कहते हैं कि कभी हिंदुत्व और यूपी-बिहार के लोगों का मुद्दा बनाकर सड़कों पर उतरने वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना विधानसभा में 13 विधायकों के साथ बड़ा प्रतिनिधित्व करती थी, लेकिन अब ये मुद्दे उतने प्रभावी नहीं रहे, तो महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना एक विधायक के साथ विधानसभा में सिमट कर रह गई। महाराष्ट्र के राजनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि राज ठाकरे को इस बात का बखूबी अंदाजा हो गया कि कड़क हिंदुत्व के मामले में शिवसेना पीछे हट रही है। बस इसी मुद्दे को राज ठाकरे ने पकड़ लिया।
मुंबई को केंद्र शासित प्रदेश बनाना चाहती है भाजपा!
इधर, बीते कुछ दिनों से महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था पर भाजपा ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। शिवसेना के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि भाजपा जान बूझकर यह सारा काम कर रही है। उनका कहना है कि भाजपा इस मामले में राज ठाकरे को मोहरा बनाकर अपने हित साधना चाह रही है। उक्त नेता का कहना है कि भाजपा के केंद्र में सत्तासीन होने के चलते ही महाराष्ट्र सरकार के नेताओं-मंत्रियों समेत उसके गठबंधन के नेताओं को परेशान किया जा रहा है। शिवसेना के उक्त नेता का कहना है कि भाजपा जिस तरीके से महाराष्ट्र में बदहाल कानून व्यवस्था के नाम पर राष्ट्रपति शासन लगाने की बात कर रही है वह उसमें सफल नहीं हो सकेंगे। उक्त नेता कहते हैं कि उन्हें सूचना मिली है कि भाजपा मुंबई को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की भी तैयारी कर रही है। लेकिन वह ऐसा होने नहीं देंगे।
महाराष्ट्र भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि किरीट सोमैया के ऊपर हुआ हमला बताता है कि महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था पूरी तरीके से बदहाल हो चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तो यह तक कहा कि अगर हनुमान चालीसा महाराष्ट्र में नहीं पढ़ी जाएगी तो क्या पाकिस्तान में पढ़ी जाएगी। भाजपा नेताओं का कहना है जिस तरीके से महाराष्ट्र सरकार ने राणा परिवार को जेल में डाला है, वह पूरी तरीके से अनैतिक है। महाराष्ट्र के बदलते सियासी हालात के बीच कानून व्यवस्था के मुद्दे पर भाजपा का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को गृह सचिव से मिला और महाराष्ट्र के हालात के बारे में ज्ञापन सौंपा।