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महाराष्ट्र में UCC की बड़ी तैयारी: CM फडणवीस ने बनाई समिति, क्या छह महीने बाद बदल जाएंगे शादी-विरासत के नियम?

Thu, 09 Jul 2026 03:56 PM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई। Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 09 Jul 2026 03:56 PM IST
सार

महाराष्ट्र सरकार ने जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति बनाकर यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। समिति छह महीने में अपनी रिपोर्ट देगी। इसके बाद सरकार शीतकालीन सत्र में समान नागरिक संहिता पर विधेयक पेश करने पर फैसला ले सकती है।
 

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maharashtra ucc draft in six months cm fadnavis announces seven member panel
देवेंद्र फडणवीस, सीएम महाराष्ट्र - फोटो : @ANI/अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में घोषणा की कि सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट और मसौदा तैयार कर सरकार को सौंपना होगा। सरकार का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद शीतकालीन सत्र में यूसीसी विधेयक लाने पर विचार किया जाएगा।
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क्या करेगी सात सदस्यीय समिति?
मुख्यमंत्री के मुताबिक, समिति समान नागरिक संहिता से जुड़े कानूनी, प्रशासनिक और सामाजिक पहलुओं का अध्ययन करेगी। इसके बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों के लिए समान कानूनी ढांचे का मसौदा तैयार करेगी।
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समिति में बॉम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आरसी चव्हाण और एसजी मेहरे, पूर्व मुख्य सचिव डीके जैन, पूर्व महाधिवक्ता बीरेन्द्र सराफ, सांविधानिक विशेषज्ञ रमेश पतंगे और सामाजिक कार्यकर्ता सुवर्णा रावल को शामिल किया गया है।
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सरकार की योजना क्या है?
सरकार ने समिति को छह महीने में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। यदि रिपोर्ट तय समय पर मिलती है तो उसके आधार पर शीतकालीन सत्र में यूसीसी से जुड़ा विधेयक पेश किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय समिति की सिफारिशों और सरकार के विचार के बाद ही होगा।

यह भी पढ़ें: Uttarakhand: धामी सरकार @ 1831; मजबूत हुई अर्थव्यवस्था, विकास को दी रफ्तार, यूसीसी सहित लिए ये ऐतिहासिक फैसले

भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी की स्थिति क्या? 
  • उत्तराखंड यूसीसी कानून लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है।
  • राजस्थान ने भी यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
  • गुजरात और असम ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
  • मध्य प्रदेश में भी यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए समिति काम कर रही है।
  • महाराष्ट्र सरकार ने भी संकेत दिया है कि आदिवासी समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा।

यूसीसी लागू होने पर क्या बदल सकता है?
समान नागरिक संहिता लागू होने का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। अभी अलग-अलग धर्मों के लोगों पर उनके-अपने पर्सनल लॉ लागू होते हैं। यदि महाराष्ट्र में यूसीसी लागू होता है, तो समिति की सिफारिशों और कानून के अंतिम स्वरूप के अनुसार, इन मामलों में एक समान नियम लागू किए जा सकते हैं। हालांकि, महाराष्ट्र सरकार ने संकेत दिया है कि आदिवासी समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा। 




अनुच्छेद 44 क्या कहता है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने का निर्देश देता है। यह नीति निदेशक तत्वों का हिस्सा है, इसलिए यह सीधे लागू होने वाला मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि सरकारों के लिए एक संवैधानिक मार्गदर्शक सिद्धांत है।

क्या हैं राजनीतिक मायने ?
भाजपा लंबे समय से समान नागरिक संहिता की पक्षधर रही है। महाराष्ट्र में समिति के गठन को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। हालांकि, राज्य में यूसीसी लागू करने का अंतिम फैसला समिति की रिपोर्ट, विधेयक और विधानमंडल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
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