सीजेपी नेताओं की हिरासत बढ़ने पर भड़कीं ममता बनर्जी: की तुरंत रिहाई की मांग, बोलीं- यह राज्य-प्रायोजित आतंकवाद
सीजेपी के दो नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाए जाने पर ममता बनर्जी ने इसे ‘राज्य-प्रायोजित आतंकवाद’ बताते हुए उनकी तुरंत रिहाई की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया है।
विस्तार
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीजेपी के दो नेताओं आशुतोष रंका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने पर केंद्र को घेरा है। मंगलवार को उन्होंने इसे ‘राज्य-प्रायोजित आतंकवाद’ और ‘पुलिस-प्रायोजित अत्याचार’ बताते हुए दोनों नेताओं की तुरंत रिहाई की मांग की। ममता ने आरोप लगाया कि दोनों युवाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है और उनके साथ किया जा रहा यह बर्ताव लोकतंत्र के लिए खतरा है।
I can understand the desperate motive to extend the custody of Ashutosh and Saurav. This is a dangerous virus being used on a daily basis to attack democracy. Stop torturing the boys and girls of Gen Z. Those in power today, will not be in power tomorrow. From Kolkata to Delhi to Mumbai - throughout the country, atrocities have reached unprecedented levels. When our forefathers stood up to colonial rulers, they too had to face atrocities and yet they fought with conviction and valor. Let me say it clearly: this is state-sponsored terrorism. These are police-sponsored atrocities. These cannot sustain for long. When people with conviction keep standing up strongly for the cause, to Save India, to Save Democracy- only then will these arrogant and blindfolded politicians in government open their eyes. By that time the people would have won, and the murderers of democracy will be finished. If you believe in democracy, release Ashutosh and Saurav immediately.
— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) October 19, 2026विज्ञापन
‘लोकतंत्र पर हमला करने के लिए इस्तेमाल हो रहा खतरनाक वायरस’
ममता बनर्जी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए दोनों नेताओं की हिरासत बढ़ाए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि आशुतोष रंका और सौरव दास की हिरासत बढ़ाने के पीछे के इरादों को वह समझ सकती हैं। उनके मुताबिक, यह एक खतरनाक वायरस की तरह है, जिसका इस्तेमाल हर दिन लोकतंत्र पर हमला करने के लिए किया जा रहा है। ममता ने युवाओं के साथ कथित तौर पर हो रहे बर्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लड़के-लड़कियों को प्रताड़ित करना बंद किया जाना चाहिए।
‘अत्याचार अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गए हैं’
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने दावा किया कि देशभर में अत्याचार पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गए हैं और यह समस्या किसी एक शहर तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, 'कोलकाता से लेकर दिल्ली और मुंबई तक, पूरे देश में अत्याचार अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच गए हैं।' ममता ने आरोप लगाया कि केंद्रीय अधिकारी पुलिस के जरिए अत्याचार कर रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, 'यह राज्य-प्रायोजित आतंकवाद है। ये पुलिस-प्रायोजित अत्याचार हैं। ये लंबे समय तक नहीं चल सकते।'
स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र कर सरकार पर साधा निशाना
ममता बनर्जी ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र करते हुए कहा कि अंग्रेजों के शासन के खिलाफ लड़ने वाले लोगों ने भी कई तरह के अत्याचार सहे थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने संघर्ष को जारी रखा। उन्होंने कहा कि भारत और लोकतंत्र को बचाने के लिए मजबूती से खड़े होने वाले लोग आखिरकार सत्ता में बैठे लोगों पर भारी पड़ेंगे। ममता के मुताबिक, जब मजबूत इरादों वाले लोग लोकतंत्र और देश की रक्षा के लिए डटे रहेंगे, तभी सरकार में बैठे नेताओं को अपनी गलतियों का एहसास होगा।
‘लोकतंत्र में भरोसा है तो दोनों को तुरंत रिहा करें’
ममता बनर्जी ने आशुतोष रंका और सौरव दास की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि अगर सरकार लोकतंत्र में विश्वास करती है, तो दोनों को तुरंत छोड़ देना चाहिए। उन्होंने हिरासत बढ़ाए जाने की कोशिशों पर सवाल उठाते हुए इसे युवाओं के खिलाफ कार्रवाई बताया।
दो दिन और बढ़ाई गई न्यायिक हिरासत
एक अधिकारी के मुताबिक, आशुतोष रंका और सौरव दास को सोमवार को दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस थाने में नए नियुक्त विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। सुनवाई के बाद दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई। इससे पहले 13 अक्टूबर को दोनों को पांच दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अब उन्हें बुधवार को दोबारा विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए थे दोनों नेता
आशुतोष रंका और सौरव दास पर आरोप है कि जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध-प्रदर्शन स्थल का दर्जा दिए जाने के बाद उसे हटाए जाने के कुछ दिनों के भीतर वे एक बंद गेट के ऊपर से कूदकर वहां दाखिल हुए थे। हिरासत में लिए जाने से पहले दोनों ने CJP के दूसरे कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए थे।
सीजेपी ने जमानत की प्रक्रिया में देरी का लगाया आरोप
सीजेपी ने आरोप लगाया है कि उसके दोनों सह-संयोजकों की रिहाई रोकने के लिए जानबूझकर जमानत की प्रक्रिया में देरी की गई। संगठन ने यह सवाल भी उठाया कि दोनों नेताओं की जमानत के लिए दी गई गारंटियों को अस्पष्ट कारणों के आधार पर क्यों खारिज किया गया।
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मजिस्ट्रेट ने धमकी मिलने का किया था दावा
रविवार को दोनों नेताओं की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दावा किया था कि कुछ अज्ञात लोग उन्हें धमकी दे रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने एक गैर-संज्ञेय रिपोर्ट (NCR) दर्ज की थी। अब रंका और दास को बुधवार को फिर से मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना है। इस बीच, ममता बनर्जी ने दोनों की हिरासत बढ़ाए जाने पर सवाल उठाते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है।