Maharashtra: 'शिंदे शिवसेना के कई कॉर्पोरेटर मुंबई में भाजपा का मेयर नहीं चाहते', संजय राउत का बड़ा दावा
बीएमसी चुनाव के बाद मुंबई में मेयर पद को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। संजय राउत ने दावा किया है कि शिंदे गुट के कई कॉर्पोरेटर भाजपा का मेयर नहीं चाहते। वहीं, शिंदे शिवसेना होटल में कॉर्पोरेटरों के ठहराव पर ये सफाई दी है।
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मुंबई में बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद मेयर पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने दावा किया है कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के कई नवनिर्वाचित नगरसेवक मुंबई में भाजपा का मेयर नहीं चाहते। राउत के इस बयान से सत्तारूढ़ गठबंधन में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है।
बीएमसी चुनावों में भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना ने मिलकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। भाजपा को 89 सीटें और शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। बहुमत होने के बावजूद मेयर पद पर सहमति नहीं बन पाई है। इसी बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने 29 नगरसेवकों को मुंबई के एक लग्जरी होटल में ठहराया है, जिससे ‘होटल पॉलिटिक्स’ की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
भाजपा मेयर नहीं चाहते नगरसेवक- राउत
संजय राउत ने कहा कि शिंदे गुट के कई नगरसेवक मूल रूप से बाल ठाकरे की स्थापित शिवसेना से जुड़े रहे हैं। उनका दावा है कि इन नगरसेवकों की इच्छा है कि मुंबई में भाजपा का मेयर न बने। राउत ने यह भी आरोप लगाया कि होटल में रखे जाने के बावजूद संवाद के कई रास्ते खुले रहते हैं और संदेश भेजे व पाए जा सकते हैं।
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शिंदे गुट की सफाई क्या है?
शिंदे गुट की नेता शीतल मात्रे ने आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि नगरसेवकों को होटल में तीन दिन के प्रशिक्षण शिविर के लिए रखा गया है, ताकि उन्हें बीएमसी के कामकाज की जानकारी दी जा सके। उनका कहना है कि 29 में से 20 नगरसेवक पहली बार चुने गए हैं, इसलिए प्रशिक्षण जरूरी है। उन्होंने साफ किया कि किसी तरह की सौदेबाजी या दबाव की राजनीति नहीं हो रही है।
यूबीटी और एमएनएस की हलचल
इस बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने संकेत दिए हैं कि अगर ‘देव’ की इच्छा हुई तो उनकी पार्टी का भी मेयर बन सकता है। राउत ने यह भी बताया कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच मेयर पद को लेकर बातचीत हुई है। हालांकि उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इन घटनाक्रमों को तटस्थ नजर से देख रही है।
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संख्या बल के बावजूद अनिश्चितता
227 सदस्यीय बीएमसी में बहुमत के बावजूद मेयर पद पर तस्वीर साफ नहीं है। शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटें और एमएनएस को 6 सीटें मिली हैं। ऐसे में गठबंधन के भीतर असहमति और विपक्ष की रणनीति, दोनों ही आने वाले दिनों में मुंबई की राजनीति को और गर्म कर सकती हैं।
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