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मसूद अजहर पर पाकिस्तान का बहाना बेनकाब: तालिबान बोला- अफगानिस्तान में नहीं है जैश प्रमुख, क्या है मामला?
Wed, 09 Sep 2026 02:13 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 09 Sep 2026 02:13 PM IST
सार
तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के उस दावे को खारिज किया है कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में मौजूद है। पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि अजहर 2019 में डूरंड लाइन पार कर अफगानिस्तान चला गया था। अजहर भारत के कई बड़े आतंकी हमलों में वांछित है और संयुक्त राष्ट्र उसे वैश्विक आतंकी घोषित कर चुका है। एफएटीएफ के दबाव के बीच अजहर की गिरफ्तारी पाकिस्तान के लिए लंबे समय से एक अहम मुद्दा रही है।
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मसूद अजहर, प्रमुख, जैश-ए-मोहम्मद
- फोटो : ANI
विस्तार
तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा जाता रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक मसूद अजहर अफगानिस्तान में रहकर संगठन चला रहा है। अफगान विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ कहा कि अजहर अफगानिस्तान में नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे देश की जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा।
बार-बार अफगानिस्तान से अजहर का नाम क्यों जोड़ता है पाकिस्तान?
पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि मसूद अजहर अफगानिस्तान भाग गया था। यह मामला ऐसे समय फिर चर्चा में है, जब पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बना हुआ है। वित्तीय कार्रवाई कार्यबल यानी एफएटीएफ की अगली बैठक में पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी कदमों की समीक्षा होनी है। पाकिस्तान 2018 से 2022 तक एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रहा था। इसके पीछे आतंक के वित्तपोषण पर कमजोर कार्रवाई और जैश-ए-मोहम्मद तथा लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों पर पर्याप्त शिकंजा न कसना भी बड़ी वजहों में शामिल था।
मसूद अजहर भारत के लिए अहम क्यों?
मसूद अजहर भारत में कई बड़े आतंकी हमलों के मामलों में वांछित है। उसका नाम 2001 के संसद हमले, 2008 के मुंबई हमले, 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 के पुलवामा हमले से जुड़ा रहा है। यही वजह है कि भारत लंबे समय से उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है। एफएटीएफ से बाहर निकलने के लिए पाकिस्तान ने आतंकवादी संगठनों और उनके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने का भरोसा दिया था। इनमें अजहर की गिरफ्तारी भी एक अहम मुद्दा रही है। दूसरी ओर, एफएटीएफ के दवाब में पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा पर कार्रवाई करनी पड़ी। इनके संगठनों और उनसे जुड़े मोर्चों पर प्रतिबंध लगाए गए। आतंकवादियों के खिलाफ वित्तीय प्रतिबंध लागू करने का भरोसा दिया गया।
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यह भी पढ़ें: 'कुछ शर्म रखिए': फिलीपींस के मंत्री को भाषण के बीच चीन ने भेजी धमकी, भड़के नेता ने मंच पर ही पढ़ी, क्या बोले?
फिर पाकिस्तान ने अजहर की गिरफ्तारी क्यों नहीं की?
पाकिस्तान ने अजहर की गिरफ्तारी के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की। उसका दावा रहा कि अजहर पाकिस्तान में नहीं है। पाकिस्तान के अनुसार वह मई 2019 में डूरंड लाइन पार कर अफगानिस्तान चला गया था और तब से फरार है। एफएटीएफ की मांग पर पाकिस्तान के प्रदर्शन की एशिया/पैसिफिक ग्रुप (APG) के स्तर पर भी समीक्षा होती रही है। एफएटीएफ से ग्रे लिस्ट से निकलने के बाद पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव कुछ कम हुआ। खबर में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि इसके बाद पाकिस्तान अपने पुराने आश्वासनों से पीछे हटता दिखा है।
बताते चलें कि सितंबर 2022 में भी तालिबान सरकार के प्रवक्ता ने कहा था कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में नहीं है। तब तालिबान ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान ने उसकी मौजूदगी को लेकर कोई औपचारिक संपर्क नहीं किया था। अब अफगान विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी का ताजा बयान पाकिस्तान के दावे के लिए एक और झटका माना जा रहा है। काबुल का रुख साफ है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं होना चाहिए।
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बार-बार अफगानिस्तान से अजहर का नाम क्यों जोड़ता है पाकिस्तान?
पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि मसूद अजहर अफगानिस्तान भाग गया था। यह मामला ऐसे समय फिर चर्चा में है, जब पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बना हुआ है। वित्तीय कार्रवाई कार्यबल यानी एफएटीएफ की अगली बैठक में पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी कदमों की समीक्षा होनी है। पाकिस्तान 2018 से 2022 तक एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रहा था। इसके पीछे आतंक के वित्तपोषण पर कमजोर कार्रवाई और जैश-ए-मोहम्मद तथा लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों पर पर्याप्त शिकंजा न कसना भी बड़ी वजहों में शामिल था।
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- पाकिस्तान को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से 2022 में बाहर किया गया था। पाकिस्तान ने जैश और लश्कर से जुड़े संगठनों पर प्रतिबंध लगाए थे।
- संयुक्त राष्ट्र ने मई 2019 में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किया था। पाकिस्तान ने 2021 में मसूद अजहर को गैरमौजूदगी में दोषी ठहराया था।
मसूद अजहर भारत के लिए अहम क्यों?
मसूद अजहर भारत में कई बड़े आतंकी हमलों के मामलों में वांछित है। उसका नाम 2001 के संसद हमले, 2008 के मुंबई हमले, 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 के पुलवामा हमले से जुड़ा रहा है। यही वजह है कि भारत लंबे समय से उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है। एफएटीएफ से बाहर निकलने के लिए पाकिस्तान ने आतंकवादी संगठनों और उनके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने का भरोसा दिया था। इनमें अजहर की गिरफ्तारी भी एक अहम मुद्दा रही है। दूसरी ओर, एफएटीएफ के दवाब में पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा पर कार्रवाई करनी पड़ी। इनके संगठनों और उनसे जुड़े मोर्चों पर प्रतिबंध लगाए गए। आतंकवादियों के खिलाफ वित्तीय प्रतिबंध लागू करने का भरोसा दिया गया।
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फिर पाकिस्तान ने अजहर की गिरफ्तारी क्यों नहीं की?
पाकिस्तान ने अजहर की गिरफ्तारी के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की। उसका दावा रहा कि अजहर पाकिस्तान में नहीं है। पाकिस्तान के अनुसार वह मई 2019 में डूरंड लाइन पार कर अफगानिस्तान चला गया था और तब से फरार है। एफएटीएफ की मांग पर पाकिस्तान के प्रदर्शन की एशिया/पैसिफिक ग्रुप (APG) के स्तर पर भी समीक्षा होती रही है। एफएटीएफ से ग्रे लिस्ट से निकलने के बाद पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव कुछ कम हुआ। खबर में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि इसके बाद पाकिस्तान अपने पुराने आश्वासनों से पीछे हटता दिखा है।
बताते चलें कि सितंबर 2022 में भी तालिबान सरकार के प्रवक्ता ने कहा था कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में नहीं है। तब तालिबान ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान ने उसकी मौजूदगी को लेकर कोई औपचारिक संपर्क नहीं किया था। अब अफगान विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी का ताजा बयान पाकिस्तान के दावे के लिए एक और झटका माना जा रहा है। काबुल का रुख साफ है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं होना चाहिए।