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MEA: अमेरिका-इस्राइल-ईरान टकराव पर भारत की नजर, विदेश मंत्रालय ने बताया- राष्ट्रीय हित में लिए जा रहे फैसले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Tue, 03 Mar 2026 06:53 PM IST
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सार
MEA Statement: भारत ने ईरान और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष पर गहरी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार हालात पर करीबी नजर रख रही है और राष्ट्रीय हित में फैसले ले रही है। खाड़ी में रहने वाले करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अमेरिका-इस्राइल ईरान टकराव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जैसे हालात पर भारत ने साफ कहा है कि वह स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर जरूरी फैसले ले रहा है। विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक हितों की रक्षा है।
विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि 28 फरवरी 2026 को ईरान और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद ही भारत ने गहरी चिंता जताई थी। उस समय भी सभी पक्षों से संयम बरतने और हालात न बिगाड़ने की अपील की गई थी। मंत्रालय ने कहा कि रमजान के पवित्र महीने में हालात और बिगड़े हैं और संघर्ष दूसरे देशों तक फैलता दिख रहा है।
क्षेत्रीय अस्थिरता पर चिंता
बयान में कहा गया कि लगातार हमलों से जानमाल का नुकसान बढ़ा है और सामान्य जीवन तथा आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। भारत इस क्षेत्र का नजदीकी पड़ोसी है और यहां की सुरक्षा व स्थिरता से उसके सीधे हित जुड़े हैं। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम भारत के लिए चिंता का विषय है।
ये भी पढ़ें- ईरान पर अमेरिकी-इस्राइली हमले के खिलाफ वाम दलों का प्रदर्शन, मोदी सरकार पर चुप्पी साधने का लगाया आरोप
भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
विदेश मंत्रालय ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। उनकी सुरक्षा और भलाई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हाल के हमलों में कुछ भारतीयों की मौत और लापता होने की खबरें भी आई हैं। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास लगातार समुदाय के संपर्क में हैं और समय-समय पर एडवाइजरी जारी कर रहे हैं।
व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर
सरकार ने साफ किया कि भारत की व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला इसी क्षेत्र से गुजरती है। किसी भी बड़े व्यवधान का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। भारत ने समुद्री व्यापारिक जहाजों पर हमलों का भी विरोध किया है।
संवाद और कूटनीति पर जोर
विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थक है। संघर्ष को जल्द समाप्त करने की अपील की गई है। इस बीच कांग्रेस और विपक्षी दलों ने सरकार के रुख पर सवाल उठाए हैं, लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सतर्क और संतुलित रुख अपनाया है।
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विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि 28 फरवरी 2026 को ईरान और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद ही भारत ने गहरी चिंता जताई थी। उस समय भी सभी पक्षों से संयम बरतने और हालात न बिगाड़ने की अपील की गई थी। मंत्रालय ने कहा कि रमजान के पवित्र महीने में हालात और बिगड़े हैं और संघर्ष दूसरे देशों तक फैलता दिख रहा है।
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क्षेत्रीय अस्थिरता पर चिंता
बयान में कहा गया कि लगातार हमलों से जानमाल का नुकसान बढ़ा है और सामान्य जीवन तथा आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। भारत इस क्षेत्र का नजदीकी पड़ोसी है और यहां की सुरक्षा व स्थिरता से उसके सीधे हित जुड़े हैं। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम भारत के लिए चिंता का विषय है।
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भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
विदेश मंत्रालय ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। उनकी सुरक्षा और भलाई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हाल के हमलों में कुछ भारतीयों की मौत और लापता होने की खबरें भी आई हैं। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास लगातार समुदाय के संपर्क में हैं और समय-समय पर एडवाइजरी जारी कर रहे हैं।
व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर
सरकार ने साफ किया कि भारत की व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला इसी क्षेत्र से गुजरती है। किसी भी बड़े व्यवधान का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। भारत ने समुद्री व्यापारिक जहाजों पर हमलों का भी विरोध किया है।
संवाद और कूटनीति पर जोर
विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थक है। संघर्ष को जल्द समाप्त करने की अपील की गई है। इस बीच कांग्रेस और विपक्षी दलों ने सरकार के रुख पर सवाल उठाए हैं, लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सतर्क और संतुलित रुख अपनाया है।
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