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नाविकों पर अमेरिकी हमले से भड़का भारत: US राजनयिक को फिर किया तलब, MEA ने दर्ज कराया कड़ा विरोध
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 12 Jun 2026 04:18 PM IST
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सार
ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों वाले वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी नौसेना के हमलों के बाद भारत ने सख्त रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कार्यवाहक दूत जेसन मीक्स को तलब कर कड़ा विरोध जताया है। अपनी चिंताओं से अवगत कराते हुए भारत ने अमेरिका से नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
एमईए
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारत के विदेश मंत्रालय ने बड़ा और सख्त राजनयिक कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय ने भारत में अमेरिकी मिशन के कार्यवाहक दूत जेसन मीक्स को तलब किया। साउथ ब्लॉक में हुई इस बैठक के दौरान भारत ने अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई पर अपना विरोध दर्ज कराया। यह पूरा मामला ओमान की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर हाल ही में अमेरिकी नौसैनिक बलों की ओर से किए गए कथित हमलों से जुड़ा हुआ है। इन व्यापारिक जहाजों पर भारतीय नाविक सवार थे। खास बात यह है कि जेसन मीक्स को इससे पहले बुधवार रात को भी तलब किया गया था।
अस्वीकार्य है नागरिक जहाजों पर घातक बल का प्रयोग
भारत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि नागरिक जहाजों के खिलाफ इस प्रकार के घातक बल का उपयोग पूरी तरह से अस्वीकार्य है। राजनयिक वार्ता के दौरान अमेरिकी पक्ष को स्पष्ट रूप से बताया गया कि इस तरह की हिंसक घटनाएं अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हैं। यह क्षेत्रीय स्थिरता को भी सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। भारत ने अमेरिका से कहा है कि वह भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए, जिससे नागरिक जीवन को कोई नुकसान पहुंचे।
अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों की मौत
बता दें कि इन अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की दुखद मौत हो गई है। भारत सरकार ने यह स्वीकार किया है कि अमेरिकी नौसेना ने भारतीय चालक दल वाले तीन जहाजों को निशाना बनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन हमलों की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि ये हमले अमेरिकी नौसेना की तरफ से हुए थे। भारत ने कहा कि इस तरह से नागरिकों की जान जाना पूरी तरह से टाला जा सकता था।
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यह भी पढ़ें: अमेरिका-इस्राइल रिश्तों में दरार?: ट्रंप ने रोकी ईरान पर कार्रवाई, नेतन्याहू को बिना जानकारी दिए लिया फैसला
तीन जहाजों पर चार दिनों में हुआ हमला
अमेरिकी सेना ने इस हफ्ते एक के बाद एक तीन जहाजों को निशाना बनाया। पहला हमला आठ जून को पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर 'मारिवेक्स' पर हुआ। इस पर 24 भारतीय नाविक सवार थे। यह जहाज पूरी तरह ठप हो गया, लेकिन सभी को सुरक्षित बचा लिया गया। दूसरा हमला 10 जून को पलाऊ के ही दूसरे टैंकर सेटेबेलो पर हुआ। इस हमले में जहाज पर मौजूद 24 भारतीयों में से तीन नाविकों की मौत हो गई। तीसरा हमला गुरुवार 11 जून को गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले टैंकर 'जलवीर' पर हुआ। इस पर 20 भारतीय सवार थे।
प्रतिबंधों की आड़ में नागरिकों पर घातक बल गलत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि इनमें से दो जहाजों पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) की ओर से प्रतिबंध लगाए गए थे। वहीं एक अन्य जहाज नियमों का पालन नहीं कर रहा था। यह अमेरिकी एजेंसी ईरानी और रूसी तेल बेचने वाले जहाजों पर प्रतिबंध लगाने का काम करती है।
अस्वीकार्य है नागरिक जहाजों पर घातक बल का प्रयोग
भारत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि नागरिक जहाजों के खिलाफ इस प्रकार के घातक बल का उपयोग पूरी तरह से अस्वीकार्य है। राजनयिक वार्ता के दौरान अमेरिकी पक्ष को स्पष्ट रूप से बताया गया कि इस तरह की हिंसक घटनाएं अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हैं। यह क्षेत्रीय स्थिरता को भी सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। भारत ने अमेरिका से कहा है कि वह भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए, जिससे नागरिक जीवन को कोई नुकसान पहुंचे।
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अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों की मौत
बता दें कि इन अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की दुखद मौत हो गई है। भारत सरकार ने यह स्वीकार किया है कि अमेरिकी नौसेना ने भारतीय चालक दल वाले तीन जहाजों को निशाना बनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन हमलों की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि ये हमले अमेरिकी नौसेना की तरफ से हुए थे। भारत ने कहा कि इस तरह से नागरिकों की जान जाना पूरी तरह से टाला जा सकता था।
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तीन जहाजों पर चार दिनों में हुआ हमला
अमेरिकी सेना ने इस हफ्ते एक के बाद एक तीन जहाजों को निशाना बनाया। पहला हमला आठ जून को पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर 'मारिवेक्स' पर हुआ। इस पर 24 भारतीय नाविक सवार थे। यह जहाज पूरी तरह ठप हो गया, लेकिन सभी को सुरक्षित बचा लिया गया। दूसरा हमला 10 जून को पलाऊ के ही दूसरे टैंकर सेटेबेलो पर हुआ। इस हमले में जहाज पर मौजूद 24 भारतीयों में से तीन नाविकों की मौत हो गई। तीसरा हमला गुरुवार 11 जून को गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले टैंकर 'जलवीर' पर हुआ। इस पर 20 भारतीय सवार थे।
प्रतिबंधों की आड़ में नागरिकों पर घातक बल गलत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि इनमें से दो जहाजों पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) की ओर से प्रतिबंध लगाए गए थे। वहीं एक अन्य जहाज नियमों का पालन नहीं कर रहा था। यह अमेरिकी एजेंसी ईरानी और रूसी तेल बेचने वाले जहाजों पर प्रतिबंध लगाने का काम करती है।