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डीपफेक और बाल शोषण पर घिरा मेटा: जुकरबर्ग ने सरकार से मांगी माफी; क्या छिन गया सेफ हार्बर का सुरक्षा कवच?
Wed, 05 Aug 2026 04:57 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Wed, 05 Aug 2026 04:57 PM IST
सार
मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने सीएसएएम, डीपफेक और प्लेटफॉर्म संचालन में हुई खामियों पर माफी मांगी। इससे पहले संसदीय समिति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाने के मामले में मेटा से नाराजगी जता चुकी है और व्यक्तिगत माफी की मांग कर चुकी थी। क्या जुकरबर्ग की यह माफी विवाद को खत्म करेगी या मेटा पर आगे और सख्त कार्रवाई हो सकती है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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मार्क जुकरबर्ग ने मांगी माफी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट फेसबुक से हटाने और प्लेटफॉर्म में कई खामियों को लेकर भारत सरकार के कड़े रुख के बाद मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने माफी मांगी है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और आईटी सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात के दौरान मेटा की ग्लोबल टीम ने बाल शोषण सामग्री (सीएसएएम), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म संचालन में हुई गलतियों पर खेद जताया है।
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पीएम मोदी की पोस्ट पर विवाद क्या था?
दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेल्फी वीडियो पोस्ट को फेसबुक पर सीमित कर दिया गया था। इस वीडियो में उन्होंने पेपर लीक मामलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया था। मेटा ने इसे अपनी एआई-संचालित ऑटोमेटेड कंटेंट फिल्टर की तकनीकी गड़बड़ी बताते हुए पोस्ट बहाल कर दी थी। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने इस सफाई को अपर्याप्त मानते हुए मेटा के वैश्विक अधिकारियों को समन भेजा था।
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क्या मेटा को नहीं मिलेगा आईटी एक्ट का फायदा?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मेटा की ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल काप्ला समेत उच्चस्तरीय टीम को स्पष्ट कर दिया गया है कि वे 'इंटरमीडियरी' (मध्यस्थ) की परिभाषा में नहीं आते हैं। चूंकि प्लेटफॉर्म यह तय करता है कि उपयोगकर्ता को कौन सा कंटेंट दिखेगा, इसलिए आईटी अधिनियम के तहत मिलने वाला 'सेफ हार्बर' (कानूनी सुरक्षा कवच) उन पर लागू नहीं होता। सरकार ने साफ किया है कि यह केवल एक तकनीकी चूक का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला है।
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