मेटा पर सरकार की सख्ती जारी: अब व्हाट्सएप भी चर्चा में; क्या कुछ और दिनों तक भारत में रहेगी जुकरबर्ग की टीम?
केंद्र सरकार और मेटा के बीच बातचीत का दौर जारी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मेटा की वैश्विक टीम कुछ और दिनों तक भारत में रहेगी और कई अहम बैठकें होंगी। इन बैठकों में व्हाट्सऐप से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी। सरकार यह समझना चाहती है कि क्या मेटा के सभी प्लेटफॉर्म भारतीय कानूनों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं। क्या इन बैठकों के बाद नए नियम या बदलाव देखने को मिल सकते हैं? आइए, सबकुछ विस्तार से समझते हैं...
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केंद्र सरकार और मेटा के बीच भारतीय कानूनों के पालन को लेकर बातचीत का दौर जारी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मेटा की वैश्विक टीम अगले कुछ दिनों तक भारत में ही रहेगी। इस दौरान तीन से चार और बैठकें होने की संभावना है। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि मेटा के सभी प्लेटफॉर्म भारत के कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहे हैं या नहीं। सरकार का कहना है कि भारतीय कानूनों का पालन सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए जरूरी है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि आगामी बैठकों में व्हाट्सऐप से जुड़े तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा होगी। मेटा पहले ही इस मामले में सार्वजनिक बयान दे चुका है। अब दोनों पक्ष तकनीकी जानकारी, सिस्टम लॉग और अन्य जरूरी पहलुओं पर विस्तार से बातचीत करेंगे। सरकार का कहना है कि इन बैठकों का उद्देश्य सभी तथ्यों को अच्छी तरह समझना और यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म कानून के दायरे में काम करें।
क्या भारतीय कानूनों के पालन की होगी समीक्षा?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत में काम करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म भारतीय कानूनों के अनुसार ही संचालित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी विदेशी कानून के आधार पर भारत में प्लेटफॉर्म नहीं चलाए जा सकते। सरकार सभी तकनीकी पहलुओं की जांच और समीक्षा कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नियमों का पूरी तरह पालन हो रहा है। उनका कहना है कि कानून का इस्तेमाल समाज के हित और लोगों की सुरक्षा के लिए होना चाहिए।
क्या केवल मेटा ही सरकार के संपर्क में है?
सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल मेटा से ही नहीं, बल्कि एक्स और टेलीग्राम जैसे अन्य प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ भी नियमित संपर्क में है। सरकार का कहना है कि सभी प्लेटफॉर्म की समाज और कानून के प्रति जिम्मेदारी है। जैसे अन्य संस्थानों को नियमों का पालन करना पड़ता है, उसी तरह डिजिटल कंपनियों को भी भारतीय कानूनों के अनुरूप काम करना होगा।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों में तकनीकी विवरण और अन्य जरूरी जानकारियों पर चर्चा जारी रहेगी। सरकार का उद्देश्य किसी एक कंपनी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भारत में काम करने वाले सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पारदर्शिता के साथ कानून का पालन करें। इन बैठकों के बाद आगे की प्रक्रिया तकनीकी चर्चाओं और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तय की जाएगी।