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गृह मंत्रालय की रिपोर्ट: एनपीआर में जन्म, मृत्यु और आप्रवासन अपडेट करना जरूरी, केंद्र ने जारी किए हैं 3941 करोड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 27 Apr 2022 10:21 PM IST
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सार
रिपोर्ट में कहा गया है कि हर परिवार और व्यक्ति के जनसांख्यिकीय और अन्य विवरण एनपीआर के अपडेशन अभ्यास के दौरान एकत्र या अपडेट किए जाने हैं। डाटा अपडेट करने के दौरान कोई दस्तावेज या बायोमीट्रिक जानकारी नहीं ली जाएगी।
गृह मंत्रालय
- फोटो : फाइल
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विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी हुई 2020-21 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार जन्म, मृत्यु और प्रवासन के चलते हुए बदलावों को सम्मिलित कराने के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने असम को छोड़कर पूरे देश में एनपीआर डाटाबेस को अप्रैल से सितंबर 2020 तक जनगणना 2021 के हाउसलिस्टिंग चरण के साथ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों की सुविधा के अनुसार अपडेट करने का निर्णय लिया है।
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हालांकि, कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के प्रसार की वजह से एनपीआर अपडेशन और अन्य संबंधित क्षेत्रीय गतिविधियों को अग्रिम नोटिस तक स्थगित किया गया है। सरकार ने साल 2010 में देश के सभी आम निवासियों का एक एनपीआर तैयार किया था। इसमें हर नागरिक की विशिष्ट जानकारी एकत्र की गई थी। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि एनपीआर को नागरिकता अधिनियम 2003 के विभिन्न प्रावधानों के तहत तैयार किया गया है और इसे नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत इसका ढांचा बनाया गया है।
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असम को छोड़ बाकी सभी राज्यों में किया गया था पूर्व परीक्षण
एनपीआर डाटाबेस को अपडेट करने के लिए एक त्रिस्तरीय दृष्टिकोण अपनाया जाएगा जिसमें स्व-अद्यतन यानी सेल्फ अपडेट भी शामिल है। इसके तहत वेब पोर्टल पर कुछ प्रोटोकॉल का पालन करने के बाद निवासियों को अपने डाटा को अपडेट करने की सुविधा देने का प्रस्ताव रखा गया है। एनपीआर डाटा को कागजी प्रारूप और मोबाइल मोड में अपडेट करना भी शामिल है। जनगणना के पूर्व परीक्षण के साथ असम को छोड़कर सभी राज्यों के चयनित क्षेत्रों में एनपीआर अपडेट पर एक पूर्व परीक्षण किया गया था।
केंद्र सरकार आवंटित कर चुकी है 3941 करोड़ रुपये की राशि
रिपोर्ट में कहा गया है कि हर परिवार और व्यक्ति के जनसांख्यिकीय और अन्य विवरण एनपीआर के अपडेशन अभ्यास के दौरान एकत्र या अपडेट किए जाने हैं। डाटा अपडेट करने के दौरान कोई दस्तावेज या बायोमीट्रिक जानकारी नहीं ली जाएगी। केंद्र सरकार पहले ही इसके लिए 3941.35 करोड़ रुपये आवंटित कर चुकी है। साल 2015 में नाम, लिंग, जन्म तिथि, जन्म स्थान, निवास स्थान और माता-पिता के नाम जैसे कुछ क्षेत्र अपडेट किए गए थे और आधार, मोबाइल और राशन कार्ड नंबर एकत्र किए गए थे।