MHA: वित्तीय धोखाधड़ी का नया वायरस, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी डायरेक्टर, सीएफओ और फाइनेंस टीमें निशाने पर
केंद्रीय गृह मंत्रालय के I4C ने 'बॉस स्कैम' नामक नए साइबर हमले को लेकर चेतावनी जारी की है। .zip फाइलों के जरिए वॉट्सऐप अकाउंट हैक कर फर्जी फंड ट्रांसफर कराए जा रहे हैं। निशाने पर CA, CFO और फाइनेंस टीमें हैं। संदिग्ध फाइलें न खोलें, लिंक्ड डिवाइस जांचें और साइबर धोखाधड़ी की शिकायत 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर करें।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के I4C ने 'बॉस स्कैम' नामक नए साइबर हमले को लेकर चेतावनी जारी की है। .zip फाइलों के जरिए वॉट्सऐप अकाउंट हैक कर फर्जी फंड ट्रांसफर कराए जा रहे हैं। निशाने पर CA, CFO और फाइनेंस टीमें हैं। संदिग्ध फाइलें न खोलें, लिंक्ड डिवाइस जांचें और साइबर धोखाधड़ी की शिकायत 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर करें।
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विस्तार
अकाउंट हैक करके बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी का नया वायरस देखने को मिला है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के I4C ने कॉर्पोरेट और फाइनेंस प्रोफेशनल्स को 'बॉस स्कैम' के बारे में चेतावनी दी है। इस वायरस के निशाने पर चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी डायरेक्टर, सीएफओ और कॉर्पोरेट फाइनेंस टीमें हैं। इसमें 'स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट', 'एमसीए' और 'आरबीआई' जैसी फाइलों के जरिए वॉट्सऐप अकाउंट हैक करके बड़े पैमाने पर फ़ाइनेंशियल धोखाधड़ी की कोशिश की जाती है।
अकाउंट स्टेटमेंट और आरबीआई के मैसेज के रूप में फैलने वाला मैलवेयर वॉट्सऐप, एसएमएस और ईमेल के जरिए फैल रहा है। सीनियर अधिकारियों के हैक किए गए वॉट्सऐप अकाउंट का इस्तेमाल फाइनेंस स्टाफ को 'म्यूल अकाउंट' (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले अकाउंट) में पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश देने के लिए किया जाता है। गृह मंत्रालय ने इसके पीछे सीमा पार के संगठित नेटवर्क का हाथ बताया गया है।
कई राज्यों में एक ही तरीके से धोखाधड़ी ...
केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायतों में तेजी देखी है। ये शिकायतें पेशेवरों और कारोबारियों के
वॉट्सऐप अकाउंट पर कब्जा करने से जुड़ी हैं, जो अकाउंट स्टेटमेंट और रेगुलेटरी कम्युनिकेशन के नाम पर भेजी गई खतरनाक फ़ाइलों के ज़रिए किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्यों से एक ही तरह के तरीके से की गई धोखाधड़ी की घटनाएं सामने आई हैं। I4C ने पहले भी अपनी एडवाइज़री के माध्यम से नागरिकों को इस उभरते हुए खतरे के बारे में आगाह किया था। इस एडवाइज़री का शीर्षक था - "खतरनाक Windows Executables और बड़े वित्तीय फ्रॉड का इस्तेमाल करके वॉट्सऐप अकाउंट पर कब्ज़ा करने के लिए रेगुलेटरी और एग्जीक्यूटिव अधिकारियों का रूप धरकर धोखाधड़ी"।
ऐसी कंप्रेस्ड (.zip) फाइल से बचें ...
सामने आई घटनाओं में, पीड़ितों को WhatsApp, SMS या ईमेल के ज़रिए एक कंप्रेस्ड (.zip) फ़ाइल मिलती है। इन फ़ाइलों के नाम "Statement of Account.zip" (अक्सर तारीख के साथ, जैसे "0714 Statement of Account.zip") या "RBI.zip", "MCA.zip" जैसे होते हैं। साथ में भेजा गया मैसेज ऐसा होता है जैसे वह कोई आम अकाउंट स्टेटमेंट हो या रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया और मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉरपोरेट अफेयर्स जैसे रेगुलेटर की ओर से कोई ज़रूरी नोटिस हो, जिसमें बहुत कम समय में कुछ नियमों का पालन करने या जानकारी देने को कहा जाता है। इस आर्काइव फ़ाइल में एक खतरनाक Windows executable (.exe) फ़ाइल और उसके साथ एक Dynamic Link Library (.dll) फ़ाइल होती है। जब इस फ़ाइल को Windows डेस्कटॉप या लैपटॉप पर एक्सट्रैक्ट करके खोला जाता है, तो एक ट्रोजन (Trojan) इंस्टॉल हो जाता है। यह ट्रोजन डिवाइस को नुकसान पहुंचाता है और पीड़ित के एक्टिव WhatsApp Web सेशन को हाईजैक कर लेता है। कई मामलों में, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का रूप धरकर ईमेल भी भेजे जाते हैं।
कॉन्टैक्ट्स और ग्रुप्स में भी वही खतरनाक फाइल ...
इसके बाद, हैक किए गए WhatsApp अकाउंट का गलत इस्तेमाल करके पीड़ित के सभी कॉन्टैक्ट्स और ग्रुप्स में वही खतरनाक फ़ाइल अपने-आप भेजी जाती है। आमतौर पर, इसमें फ़ाइल को पाने वाले व्यक्ति से कहा जाता है कि वह इसे "वेरिफ़िकेशन के लिए कंपनी के फ़ाइनेंस मैनेजर" को फ़ॉरवर्ड करे और कंप्यूटर पर खोले, जिससे यह इन्फेक्शन कॉर्पोरेट नेटवर्क में और गहराई तक फैल जाता है। धोखाधड़ी के एडवांस्ड स्टेज में, जिसे अक्सर "बॉस स्कैम" या CEO बनकर धोखाधड़ी करना कहा जाता है, धोखेबाज़ किसी सीनियर एग्जीक्यूटिव के असली WhatsApp अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं – या हैकर के कंट्रोल वाले नंबर को हैक किए गए डिवाइस में "CEO" के नाम से चुपके से सेव कर लेते हैं – ताकि अकाउंट्स और फ़ाइनेंस डिपार्टमेंट के कर्मचारियों को 'म्यूल' बैंक अकाउंट्स में तुरंत फ़ंड ट्रांसफ़र करने का निर्देश दिया जा सके।
सीमा पार का संगठित नेटवर्क कर रहा ये हरकत ...
I4C की नेशनल साइबरक्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट (NCTAU) के टेक्निकल एनालिसिस से पता चलता है कि यह कैंपेन राष्ट्रीय सीमाओं के पार काम करने वाले संगठित नेटवर्क द्वारा चलाया जा रहा है। इसमें DLL साइडलोडिंग मेथड के ज़रिए एडवांस्ड मैलवेयर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें तेज़ी से फैलने और डिटेक्शन से बचने की क्षमता होती है। संबंधित लॉ एनफोर्समेंट और टेक्निकल एजेंसियों के साथ मिलकर इस मामले की जांच की जा रही है। चूंकि यह मैलवेयर सिर्फ़ विंडोज कंप्यूटर पर ही एक्टिवेट होता है और इसमें इस्तेमाल होने वाले डॉक्यूमेंट्स में अकाउंट स्टेटमेंट और रेगुलेटरी कंप्लायंस का ज़िक्र होता है, इसलिए यह कैंपेन चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कंपनी डायरेक्टर्स, चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर्स और कंपनियों के फाइनेंस एवं अकाउंट्स से जुड़े कर्मचारियों के लिए खास तौर पर जोखिम भरा है। सभी कॉर्पोरेट संस्थाओं को सलाह दी जाती है कि वे तुरंत अपने कर्मचारियों, खासकर फाइनेंस टीमों को इस बारे में जागरूक करें। साथ ही, WhatsApp या ईमेल पर मिले किसी भी ज़रूरी फंड-ट्रांसफर निर्देश या अकाउंट-बदलाव के अनुरोध पर अमल करने से पहले, सीधे वॉयस कॉल या आमने-सामने बातचीत करके उसकी पुष्टि जरूर कर लें।
इस खतरे से निपटने के लिए उठाए गए ये कदम ...
- पीड़ितों को सूचना देना: शिकायतों के विश्लेषण और टेक्निकल इंटेलिजेंस के ज़रिए पहचाने गए पीड़ितों और संभावित पीड़ितों को I4C खुद से सूचना दे रहा है, ताकि समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें, जैसे कि लिंक्ड डिवाइस से लॉग आउट करना और अकाउंट्स को सुरक्षित करना।
- खतरे के संकेतों का आदान-प्रदान: मैलवेयर से जुड़े खतरे के संकेतों और टेक्निकल इंडिकेटर्स को इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In), माइक्रोसॉफ्ट डिफेंडर और भारत की प्रमुख एंटी-वायरस कंपनियों (जैसे क्विक हील, K7 कंप्यूटिंग और नेट प्रोटेक्टर) के साथ शेयर किया गया है। इसका मकसद अलग-अलग प्लेटफॉर्म और सिक्योरिटी प्रोडक्ट्स पर मैलिशियस फाइलों का तेज़ी से पता लगाना, उन्हें ब्लॉक करना और हटाना है।
- नागरिकों की सुरक्षा: इन मिले-जुले प्रयासों से अब तक 10,000 से ज़्यादा भारतीयों को इस कैंपेन से बचाया गया है। 'सहयोग पोर्टल' के जरिए मैलवेयर को लगातार ब्लॉक किया जा रहा है।
- SMS हेडर 'I4CMHA-G' के जरिए अलर्ट: I4C, SMS हेडर 'I4CMHA-G' के ज़रिए प्रभावित नागरिकों को अलर्ट भेज रहा है। I4C ने पिछले 30 दिनों में SMS हेडर 'I4CMHA-G' के ज़रिए 58,000 से ज़्यादा संभावित पीड़ितों को जानकारी दी है। खतरे के संकेत CERT-In, Microsoft और भारतीय एंटी-वायरस व थ्रेट इंटेलिजेंस कंपनियों के साथ शेयर किए गए हैं। नागरिकों से अनुरोध है कि वे SMS हेडर 'I4CMHA-G' से मिलने वाले मैसेज पर नजर रखें और उनमें दी गई सलाह पर तुरंत अमल करें।
ये सावधानियां भी बरतने की सलाह ...
अनजान या बिना पुष्टि वाले स्रोतों से मिली .zip फ़ाइलों या एग्जीक्यूटेबल फ़ाइलों को डाउनलोड, एक्सट्रैक्ट या ओपन न करें। RBI जैसे रेगुलेटर कभी भी WhatsApp अटैचमेंट के ज़रिए सॉफ़्टवेयर अपडेट, सिक्योरिटी फ़िक्स या अकाउंट स्टेटमेंट नहीं भेजते हैं।
WhatsApp एप्लिकेशन (सेटिंग्स > लिंक्ड डिवाइसेस) में जुड़े हुए डिवाइस की नियमित रूप से जांच करें और उन WhatsApp वेब सेशन से लॉग आउट करें जो अब इस्तेमाल में नहीं हैं। सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर को ऐसी सॉफ़्टवेयर पाबंदियां लागू करनी चाहिए, जिनसे यूज़र प्रोफ़ाइल डायरेक्टरी से अनजान .exe और .dll फ़ाइलों को चलने से रोका जा सके। यह पक्का करना चाहिए कि सभी Windows एंडपॉइंट पर अप-टू-डेट एंटी-मालवेयर सॉफ़्टवेयर चल रहे हों। अगर कोई अकाउंट हैक हो जाता है, तो तुरंत सभी जुड़े हुए डिवाइस से लॉग आउट करें, अपने कॉन्टैक्ट्स को बताएं कि वे उस अकाउंट से मिली कोई भी फ़ाइल न खोलें, और कंप्यूटर को अपडेटेड एंटी-वायरस से स्कैन करवाएं। इस तरह के साइबर फ्रॉड और संदिग्ध कम्युनिकेशन की जानकारी तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर देनी चाहिए।