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कर्नाटक PRC पर घमासान: शोभा करंदलाजे की अमित शाह से दखल की मांग; किसे बताया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा?

Fri, 10 Jul 2026 01:41 PM IST
प्रशांत तिवारी आईएएनएस, बंगलुरु
आईएएनएस, बंगलुरु Published by: प्रशांत तिवारी Updated Fri, 10 Jul 2026 01:41 PM IST
सार

केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कर्नाटक सरकार द्वारा प्रस्तावित स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC), 2026 को संविधान और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। 

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Minister of State Shobha Karandlaje terms Karnataka PRC threat national security seeks Amit Shah intervention
शोभा करंदलाजे - फोटो : शोभा करंदलाजे एक्स

विस्तार

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम तथा श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील की कि वे कर्नाटक स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC), 2026 के मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें। उन्होंने इसके लिए संवैधानिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर कारण बताए।

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क्या है कर्नाटक सरकार का नया PRC फैसला?
गौरतलब है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने पात्र नागरिकों को चुनाव आयोग की मतदाता सूची के "विशेष गहन संशोधन" (SIR) में भाग लेने में मदद करने के लिए स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC) जारी करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि इस कदम का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने से रोकना है।
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अमित शाह को लिखे पत्र में क्या कहा?
उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कहा, 'मैं यह पत्र कर्नाटक सरकार द्वारा जारी उस अधिसूचना के संबंध में आपके तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए लिख रही हूं, जिसके तहत कर्नाटक स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC), 2026 शुरू किया गया है। यह अधिसूचना गंभीर संवैधानिक, कानूनी और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा करती है, जिन पर केंद्र सरकार द्वारा तत्काल जांच की आवश्यकता है।' 
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संविधान के किस प्रावधान का हवाला दिया?
उन्होंने कहा, 'भारत का संविधान पूरे देश के सभी नागरिकों के लिए एक ही नागरिकता की व्यवस्था करता है। कर्नाटक सरकार द्वारा 'स्थायी निवास प्रमाण पत्र' शुरू करना इस संवैधानिक ढांचे के विपरीत है, क्योंकि यह बिना किसी संवैधानिक या कानूनी अधिकार के 'स्थायी निवासियों' की एक अलग श्रेणी बनाने का प्रयास करता है।' 

अनुच्छेद 14 का उल्लंघन कैसे बताया?
उन्होंने जोर देकर कहा, 'इस तरह का वर्गीकरण मनमाना है। इसका किसी वैध संवैधानिक उद्देश्य से कोई तार्किक संबंध नहीं है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है। 'स्थायी निवासियों' के रूप में नामित व्यक्तियों का एक अलग वर्ग बनाकर राज्य सरकार वास्तव में ऐसी विशिष्ट कानूनी मान्यता दे रही है, जिसे संविधान के तहत कोई मंजूरी नहीं मिली है।' 

राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर क्या चिंता जताई?
उन्होंने बताया, 'राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से यह अधिसूचना और भी चिंताजनक है। इसमें पात्रता के मानदंड मुख्य रूप से निवास और राजस्व अधिकारियों द्वारा स्थानीय सत्यापन पर आधारित बताए गए हैं। हालांकि, सक्षम केंद्रीय अधिकारियों के माध्यम से भारतीय नागरिकता के सत्यापन को अनिवार्य करने या अवैध प्रवासियों और विदेशी नागरिकों को बाहर करने के लिए कोई मजबूत व्यवस्था नहीं की गई है।' 

अवैध प्रवासियों को कैसे मिल सकता है फायदा?
उन्होंने पत्र में कहा कि नतीजतन, जो लोग अवैध रूप से भारत में आए हैं या राज्य में गैरकानूनी तरीके से रह रहे हैं, वे स्थानीय दस्तावेज दिखाकर या धोखाधड़ी के जरिए स्थायी निवास प्रमाण पत्र हासिल कर सकते हैं। एक बार ऐसा प्रमाण पत्र जारी हो जाने के बाद उसका इस्तेमाल विभिन्न सरकारी योजनाओं, सरकारी दस्तावेजों, शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले, नौकरी के अवसरों और अन्य अधिकारों के लिए किया जा सकता है। इससे गैरकानूनी रूप से रह रहे लोगों को कानूनी पहचान मिलने का खतरा पैदा हो सकता है और अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें हटाने की केंद्र सरकार की कोशिशें भी प्रभावित हो सकती हैं।

क्या राज्य सरकार केंद्र के अधिकार क्षेत्र में दखल दे रही है?
करंदलाजे ने आगे कहा,'नागरिकता, विदेशियों, इमिग्रेशन और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषय संविधान के तहत केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। राज्य स्तर पर ऐसी कोई भी व्यवस्था, जो स्थायी निवास जैसी दस्तावेजी मान्यता देती हो, इन संवैधानिक अधिकारों में दखल दे सकती है और पूरे देश में नागरिकता तथा आंतरिक सुरक्षा से जुड़े एक समान नियमों को कमजोर कर सकती है।'नागरिकता की उचित जांच के बिना ऐसे प्रमाण पत्र जारी करने से अवैध प्रवासियों को राज्य के प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा बनने में मदद मिल सकती है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है।


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गृह मंत्री से क्या-क्या मांग की गई?
केंद्रीय मंत्री ने अपील की, 'ऐसे हालात में मैं आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध करती हूं कि 'कर्नाटक स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC), 2026' की संवैधानिक वैधता की जांच कराई जाए। जांच पूरी होने तक कर्नाटक सरकार को इसे लागू न करने का निर्देश दिया जाए। राज्य सरकार से यह भी पूछा जाए कि किस संवैधानिक और कानूनी अधिकार के आधार पर यह अधिसूचना जारी की गई है। यह सुनिश्चित किया जाए कि सक्षम केंद्रीय एजेंसियों द्वारा भारतीय नागरिकता की पूरी जांच के बिना किसी भी व्यक्ति को स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी न किया जाए। साथ ही संविधान, राष्ट्रीय सुरक्षा और समानता के सिद्धांत की रक्षा के लिए आवश्यक आगे की कार्रवाई भी की जाए।' उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि संविधान पर पड़ने वाले दूरगामी प्रभाव और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताओं को देखते हुए मैं आपसे इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध करती हूं।

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