Stray Dogs: अहमदाबाद में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए नगर निगम का अभियान, 1050 संस्थानों का सर्वे पूरा
अहमदाबाद नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस और रेलवे स्टेशनों में आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। 1,050 संस्थानों का सर्वे किया गया है और निगरानी, नसबंदी तथा जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
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अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) ने सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत एक विशेष कार्ययोजना लागू की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस स्टेशनों और रेलवे स्टेशनों में आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करना है।
एएमसी के मवेशी उपद्रव नियंत्रण विभाग के प्रमुख नरेश राजपूत ने बताया कि ऐसे लगभग 1,050 स्थानों की पहचान कर उनका सर्वेक्षण किया गया है। इन सभी स्थानों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित संवेदनशील सार्वजनिक श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक संस्थान में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उसकी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि आवारा कुत्ते परिसर में प्रवेश न करें। साथ ही भोजन और कचरे का उचित प्रबंधन भी किया जाए।
कत्तों को नसबंदी केंद्र भेजा जा रहा
संस्थानों को बाउंड्री वॉल मजबूत करने, फेंसिंग लगाने और खुले में कचरा न फेंकने के निर्देश दिए गए हैं। इससे आवारा कुत्तों के जमाव को रोका जा सकेगा। एएमसी की टीमें समय-समय पर निरीक्षण करती हैं। वे परिसर में मौजूद कुत्तों की पहचान करती हैं। बिना नसबंदी वाले कुत्तों को पकड़कर नसबंदी केंद्र भेजा जाता है। आक्रामक या काटने वाले कुत्तों को आश्रय केंद्रों में रखा जाता है। अब तक ऐसे 48 कुत्तों को विभिन्न संस्थानों से हटाया जा चुका है।
सर्वेक्षण में पाया गया कि इन परिसरों में लगभग 5,000 से 5,500 आवारा कुत्ते मौजूद हैं। अधिकांश परिसरों में दो से तीन कुत्ते पाए गए, जबकि बड़े परिसरों में उनकी संख्या 10 तक पहुंची। एएमसी के अनुसार, शहर में आवारा कुत्तों की कुल संख्या दो लाख से अधिक हो सकती है। अब नई वैज्ञानिक गणना जीपीएस आधारित मोबाइल एप और वार्डवार मैपिंग की मदद से की जा रही है।
आश्रय केंद्रों को बढ़ाकर 1,180 करने की योजना
फिलहाल नगर निगम के आश्रय केंद्रों में 480 से 550 कुत्तों को रखने की क्षमता है। इसे बढ़ाकर लगभग 1,180 करने की योजना है। इसके लिए नारोडा, वस्त्राल और लांभा में नए केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। नगर निगम ने अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग आश्रय केंद्र बनाए हैं। इनमें नसबंदी केंद्र, बीमार कुत्तों के केंद्र, आक्रामक कुत्तों के केंद्र और सामुदायिक कुत्ता आश्रय शामिल हैं।
राजपूत ने कहा कि सभी कुत्तों को हटाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसलिए प्राथमिकता काटने वाले और आक्रामक कुत्तों को दी जाती है। वर्तमान में 84 आक्रामक कुत्ते आश्रय केंद्रों में रखे गए हैं। कुत्तों के काटने की शिकायत मिलने पर विशेष टीम मौके पर पहुंचती है। एएमसी स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता अभियान भी चला रहा है। इनमें रेबीज से बचाव, पशुओं के व्यवहार और सुरक्षित मानव-पशु संबंधों की जानकारी दी जाती है।
कचरा प्रबंधन नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना
नगर निगम ने चेतावनी दी है कि कचरा प्रबंधन नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर 1,000 से 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह पूरी व्यवस्था शहर की 2030 तक रेबीज उन्मूलन योजना का हिस्सा है। इसके तहत नसबंदी, टीकाकरण, जनगणना और सार्वजनिक स्थानों के बेहतर प्रबंधन पर एक साथ काम किया जा रहा है।