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नारी शक्ति वंदन अधिनियम: महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस की कशमकश के बीच प्रतिभा पाटिल का समर्थन, PM को लिखा पत्र

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Wed, 15 Apr 2026 11:17 AM IST
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सार

पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया है। अपने पत्र में उन्होंने इस बिल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से कानून निर्माण मजबूत होगा और नीतियां अधिक संवेदनशील बनेंगी।

Nari Shakti Vandan Adhiniyam Women Reservation Bill Pratibha Patil support and writes letter to PM Modi
प्रतिभा पाटिल, पूर्व राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

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भारत की पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार की पहल की सराहना की है। अपने पत्र में पूर्व राष्ट्रपति ने इस बिल को एक ऐतिहासिक और सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से कानून बनाने की प्रक्रिया और मजबूत होगी, नीतियां ज्यादा संतुलित और संवेदनशील होंगी और आने वाली पीढ़ियों की महिलाओं को प्रेरणा मिलेगी। 

इसके साथ ही अपने पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि भारत में महिलाएं हमेशा हर क्षेत्र में बड़ा योगदान देती रही हैं, भले ही उन्हें कई सामाजिक और संरचनात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ा हो। बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का यह पत्र ऐसे समय में आया है जब कई विपक्षी नेताओं, खासकर कांग्रेस ने सरकार पर यह सवाल उठाए हैं कि महिलाओं के आरक्षण को 2029 तक लागू करने की प्रक्रिया में उनसे सलाह-मशविरा नहीं किया गया।

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कांग्रेस ने किस बात पर आपत्ति जताई?
ऐसे में अब इस बिल को लेकर तेज हो रही सियासत की बात करें तो कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी समेत कई नेताओं ने इस बिल पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस बिल को लाने से पहले हितधारकों से सही तरह से सलाह नहीं ली गई।  कांग्रेस का कहना है कि इस बिल के पारदर्शिता की कमी है, जिसके चलते संघीय ढांचे पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही परिसीमन के दौरान सीटों के संतुलन को लेकर स्पष्टता नहीं है।

महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर
ठीक इसके उलट, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा कि यह बिल महिलाओं को नेतृत्व में आगे लाने का एक मजबूत रास्ता तैयार करेगा। उन्होंने इसे समाज में ऐतिहासिक असमानताओं को कम करने की दिशा में बड़ा कदम बताया। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब वह भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनी थीं, तभी से उनका मानना रहा है कि महिलाओं को बराबरी का मौका मिलना चाहिए ताकि वे देश के फैसलों में भाग ले सकें।

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