सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   National Investigation Agency sought the cancellation of the bail granted to Sudha Bharadwaj and Varavara Rao

NIA: सुधा भारद्वाज और वरवरा राव की जमानत रद्द करने की मांग, एनआईए ने लगाया शर्तें उल्लंघन करने का आरोप

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Fri, 15 May 2026 06:13 PM IST
विज्ञापन
सार

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने सुधा भारद्वाज और वरवरा राव की जमानत रद्द करने की मांग की। एजेंसी ने मुंबई प्रेस क्लब कार्यक्रम में शामिल होकर जमानत शर्तें तोड़ने का आरोप लगाया।

National Investigation Agency sought the cancellation of the bail granted to Sudha Bharadwaj and Varavara Rao
सुधा भारद्वाज और वरवरा राव की जमानत रद्द करने की मांग - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने आज मुंबई की विशेष अदालत में याचिका दायर कर एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले के आरोपियों सुधा भारद्वाज और वरवरा राव की जमानत रद्द करने की मांग की। एजेंसी ने आरोप लगाया कि दोनों ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है।

Trending Videos

सुधा भारद्वाज को वर्ष 2021 में तकनीकी आधार पर जमानत मिली थी, जबकि वरवरा राव एक वर्ष बाद जेल से बाहर आए थे। अदालत ने जमानत देते समय दोनों पर कई शर्तें लगाई थीं। इनमें अदालत की अनुमति के बिना मुंबई नहीं छोड़ना, पासपोर्ट एनआईए के पास जमा करना और मामले पर मीडिया से बातचीत नहीं करना शामिल था।

विज्ञापन
विज्ञापन

दोनों मुंबई प्रेस क्लब के कार्यक्रम में हुए शामिल

एनआईए ने अपनी याचिका में कहा कि दोनों आरोपी इस वर्ष 19 जनवरी को मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जो जमानत की शर्तों का उल्लंघन है। कार्यक्रम के दो दिन बाद प्रेस क्लब ने अपने तीन सदस्यों को निलंबित कर दिया था।

विशेष अदालत ने दोनों आरोपियों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी।

2017 में हिंसा भड़काने का आरोप

यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों के कारण अगले दिन पुणे के बाहरी क्षेत्र स्थित कोरेगांव भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क गई थी।

मामले की शुरुआती जांच पुणे पुलिस ने की थी। पुलिस का दावा था कि सम्मेलन का आयोजन कथित माओवादी संबंध रखने वाले लोगों ने किया था। 8 जनवरी 2018 को भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

बाद में मामले की जांच एनआईए ने अपने हाथ में ले ली। इस मामले में एक दर्जन से अधिक सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल अधिकांश आरोपी जमानत पर बाहर हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed