'शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे': एनसीआरटी विवाद पर शिक्षा मंत्री की सख्त टिप्पणी, कहा- जवाबदेही तय होगी
Dharmendra Pradhan On NCERT Row: एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका पर विवादित सामग्री को लेकर बढ़े विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का अपमान करने की कोई मंशा नहीं थी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।
विस्तार
क्या बोले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान?
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार न्यायपालिका का सर्वोच्च सम्मान करती है और किसी भी शैक्षणिक सामग्री के जरिए संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ी सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अध्याय तैयार करने में शामिल लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य जागरूकता फैलाना है, संस्थाओं को बदनाम करना नहीं।
#WATCH | Seraikela Kharsawan, Jharkhand: Union Education Minister Dharmendra Pradhan says, "The mention of Supreme Court and India's judicial system in the NCERT is a matter of concern. When this came to our knowledge, we made NCERT review the books. The observations by the… pic.twitter.com/cjSLwtoLwt
— ANI (@ANI) February 26, 2026
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पूरा विवाद आखिर है क्या?
यह मामला एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब से जुड़ा है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित एक हिस्सा शामिल किया गया था। इस सामग्री को लेकर वरिष्ठ वकीलों और कई कानूनी विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि स्कूल के छात्रों को इस तरह की सामग्री पढ़ाना न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद इस पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू हो गई।
शिक्षा मंत्रालय सचिव और एनसीईआरटी निदेशक को नोटिस
मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती जारी है। अदालत ने शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव और एनसीईआरटी निदेशक डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के चेयरमैन और अधिवक्ता आदिश सी अग्रवाल ने कहा कि न्यायपालिका ने सही कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में न्यायपालिका पर भ्रष्टाचार जैसी बातें शामिल करना वरिष्ठ अधिकारियों की बड़ी चूक है।
#WATCH | Delhi | On SC's show cause notices to the Secretary of the Department of Education and Literacy (Ministry of Education) and to NCERT Director Dr Dinesh Prashad Saklani, Advocate and Chairman of All India Bar Association Adish C Aggarwala says, “Judiciary has taken the… pic.twitter.com/6hedSjHecL
— ANI (@ANI) February 26, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा था कि किसी भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने संकेत दिया था कि यह एक सुनियोजित प्रयास भी हो सकता है और जरूरत पड़ने पर कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि न्यायपालिका देश की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री पर कानून अपना काम करेगा।
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अब आगे क्या कार्रवाई होगी?
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार पूरे मामले की समीक्षा कर रही है और अदालत के निर्देशों के अनुसार जरूरी बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए पाठ्य सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है और किसी भी तरह की लापरवाही को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
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