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NCR in 2041: एनसीआर में क्या बदलने वाला है? नमो सिटीज से लेकर PARIVARTAN योजना तक सब कुछ समझिए

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Thu, 18 Jun 2026 04:06 PM IST
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सार

एनसीआर में 2041 तक बढ़ती आबादी और विकास की जरूरतों को देखते हुए 4 नई नमो सिटीज, PARIVARTAN योजना, ग्रीन कवर बढ़ाने और बेहतर परिवहन नेटवर्क जैसे प्रस्तावों पर सहमति बनी है। साथ ही एनसीआर की मौजूदा सीमा को यथावत रखने का फैसला भी किया गया। आइए विस्तार से जानते हैं। 

NCR in 2041: What Will Change? From Namo Cities to the PARIVARTAN Scheme
क्षेत्रीय योजना- 2041 - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के विकास की दिशा तय करने वाली नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) की 42वीं बैठक में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में क्षेत्रीय योजना-2041 पर विस्तार से चर्चा हुई और कई अहम निर्णय लिए गए। इनमें NCR की मौजूदा सीमा को बरकरार रखना, नमो सिटीज विकसित करने का प्रस्ताव, ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन योजना और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए PARIVARTAN योजना शामिल हैं।



ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर NCR की सीमा को यथावत रखने का फैसला क्यों लिया गया? 2041 तक करीब 15 करोड़ आबादी के लिए क्या तैयारी की जा रही है? आखिर क्या हैं नमो सिटीज और इन्हें बसाने की जरूरत क्यों पड़ी? इन नए शहरों का चयन कैसे होगा और इनमें क्या खास सुविधाएं होंगी? नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर के साथ नए शहर बसाने के पीछे क्या सोच है? एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए PARIVARTAN योजना क्या है? आइए विस्तार से जानते हैं। 

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NCR की सीमा में बदलाव क्यों नहीं किया गया?

NCR (नेशनल कैपिटल रीजन) यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें दिल्ली के साथ आसपास के हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई जिले शामिल हैं। बैठक में कुछ राज्यों की ओर से NCR के क्षेत्रफल में बदलाव की मांग रखी गई थी। हालांकि बोर्ड ने फैसला लिया कि NCR का मौजूदा क्षेत्र यथावत रहेगा और इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा। एनसीआर का क्षेत्र लगभग 55,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और इसमें 32 जिले शामिल हैं।  

क्षेत्रीय योजना-2041 क्यों महत्वपूर्ण?

एनसीआई की मौजूदा आबादी लगभग 7.86 करोड़ है, जो 2041 तक बढ़कर 14.73 करोड़ हो सकती है। यानी अगले 15 वर्षों में लगभग सात करोड़ अतिरिक्त लोगों के लिए आवास, परिवहन और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करनी होगी। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय योजना-2041 तैयार किया जा रहा है।

क्या हैं नमो सिटीज?

  • बैठक में चार नए सेमी-ग्रीनफील्ड शहरों के विकास का प्रस्ताव रखा गया। ये शहर नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर के आसपास विकसित किए जाएंगे और इन्हें नमो सिटीज कहा जाएगा।
  • नमो भारत कॉरिडोर एक रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) परियोजना है, जिसे दिल्ली और एनसीआर के प्रमुख शहरों के बीच तेज, आधुनिक और उच्च गति वाली सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है। 
  • दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर देश का पहला RRTS कॉरिडोर है। इसकी कुल लंबाई 82 किलोमीटर है, जो दिल्ली के सराय काले खां स्टेशन से शुरू होकर मेरठ के मोदीपुरम तक जाता है। 
  • इस कॉरिडोर पर चलने वाली नमो भारत ट्रेन की डिजाइन गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह दिल्ली को साहिबाबाद, गाजियाबाद, मोदीनगर और मेरठ जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों से तेज और सुगम तरीके से जोड़ती है।

कैसे होगा शहरों का चुनाव? 

मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि इन शहरों का चयन प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। चारों राज्यों से प्रस्ताव मांगे जाएंगे और बेहतर योजना वाले प्रस्तावों का चयन होगा। उन्होंने कहा कि इन शहरों में परिवहन, हरित क्षेत्र, आवास, पानी और जीवन की अन्य आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य भविष्य में बढ़ने वाली आबादी के लिए नए विकास केंद्र तैयार करना है।

नमो सिटीज के लिए कितने करोड़ का प्रोत्साहन का प्रस्ताव?

एनसीआरपीबी ने नमो सिटीज के विकास के लिए 5,000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि का प्रस्ताव रखा है। यह सहायता अनुदान, ऋण और गारंटी के रूप में दी जाएगी। इसमें 1,000 करोड़ रुपये का अनुदान भी शामिल होगा। मंत्री मनोहर ने बताया कि अगले पांच वर्षों में इस राशि का उपयोग विभिन्न विकास योजनाओं के लिए किया जाएगा।

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क्या है PARIVARTAN योजना?

  • बैठक में वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर विशेष चर्चा हुई। मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि एनसीआर में कुल प्रदूषण का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा वाहनों, विशेष रूप से बसों और ट्रकों से आता है। 
  • इसी को ध्यान में रखते हुए पुराने वाहनों को बदलने की योजना का नाम PARIVARTAN रखा गया है। इसका पूरा नाम "परिवहन से होने वाले वायु प्रदूषण और उत्सर्जन को कम करने के लिए वाहन परिसंपत्तियों के त्वरित नवीनीकरण एवं प्रोत्साहन कार्यक्रम" है।
  • योजना के तहत BS-IV और उससे पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने तथा BS-VI, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है।

पुराने वाहनों को बदलने पर मिलेगा प्रोत्साहन
मंत्री ने बताया कि जो लोग पुराने वाहन हटाकर नए वाहन खरीदेंगे, उन्हें वाहन की कीमत का लगभग 30 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि BS-I, BS-II और BS-III वाहनों को स्क्रैपिंग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि BS-IV वाहनों को एनसीआई क्षेत्र के बाहर बेचा जा सकेगा। शुरुआत में यह योजना स्वैच्छिक होगी। बाद में पुराने वाहनों को हटाने के लिए और कदम उठाए जा सकते हैं।



प्रदूषण नियंत्रण के लिए जोन आधारित व्यवस्था
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रतिबंध पूरे एनसीआर में एक समान लागू होने के कारण दूर-दराज के जिलों को भी प्रभावित होना पड़ता है। इसलिए विचार किया गया कि एनसीआर को अलग-अलग जोन में बांटा जाए। एक कोर एनसीआर क्षेत्र होगा और उसके बाहर अलग-अलग रिंग बनाई जाएंगी। इसके आधार पर आवश्यकता के अनुसार प्रतिबंध लागू किए जा सकेंगे। मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि इससे उन जिलों को राहत मिलेगी जहां प्रदूषण की स्थिति अपेक्षाकृत कम होती है।

ग्रीन कवर बढ़ाने पर जोर

बैठक में पर्यावरण और हरित क्षेत्र बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया। बोर्ड ने फैसला किया कि राज्यों को ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने वाली योजना तैयार की जाएगी। इसमें निजी नागरिकों और कंपनियों की भागीदारी भी शामिल होगी।

मंत्री ने बताया कि सड़क किनारे, रेलवे लाइनों के आसपास, नहरों के किनारे और अन्य खाली स्थानों पर पौधारोपण को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धा कराई जाएगी और बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

ग्रीन कवर और फॉरेस्ट एरिया को अलग-अलग माना जाएगा

मंत्री ने स्पष्ट किया कि फॉरेस्ट एरिया और ग्रीन कवर को अलग-अलग श्रेणियों में देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र से जुड़े निर्णय पर्यावरण मंत्रालय और न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, इसलिए एनसीआरपीबी उनमें बदलाव नहीं कर सकता। हालांकि वन क्षेत्र के अलावा अन्य स्थानों पर हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए नई योजनाएं बनाई जाएंगी।

नमो सिटीज को RRTS नेटवर्क के पास क्यों बनाया जाएगा?

बैठक में क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने बताया कि मेरठ तक RRTS सेवा शुरू हो चुकी है जबकि अन्य कॉरिडोर भी विभिन्न चरणों में हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में परिवहन नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा ताकि दिल्ली पर बढ़ते जनसंख्या दबाव को आसपास के क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जा सके। इसी सोच के तहत नमो सिटीज को भी RRTS कॉरिडोर के आसपास विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

पानी की चुनौती पर क्या कहा गया?

बैठक के दौरान भूजल और पानी की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठे। इस पर मंत्री ने कहा कि भविष्य में पानी के बेहतर उपयोग पर ध्यान देना होगा। उन्होंने इस्तेमाल किए गए पानी के पुनर्चक्रण और वर्षा जल को जमीन में पहुंचाकर भूजल रिचार्ज बढ़ाने पर जोर दिया। उनके अनुसार, इस्तेमाल किए गए पानी को प्रोसेस करके दोबारा उपयोग में लाना भविष्य की प्राथमिकताओं में शामिल होगा।

आगे क्या होगा?

मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि एनसीआरपीबी निर्णय लेने वाली संस्था नहीं बल्कि समन्वय और सिफारिश करने वाला मंच है। अंतिम फैसले संबंधित राज्य सरकारों और अन्य सक्षम एजेंसियों द्वारा लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय योजना-2041 पर चर्चा लगभग पूरी हो चुकी है और बैठक में उठाए गए मुद्दों व प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समीक्षा के बाद इसे अधिसूचित किया जाएगा।

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