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Updates: असम में सरकारी नौकरियों में चाय जनजाति के लोगों को मिलेगा 3 प्रतिशत आरक्षण, कैबिनेट ने दी मंजूरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 18 Feb 2026 01:14 PM IST
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न्यूज अपडेट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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हैदराबाद में मंगलवार को महबूबाबाद शहर में एक विवाहित महिला को कथित तौर पर एक व्यक्ति ने इसलिए आग के हवाले कर दिया, क्योंकि उसने उसका शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। पुलिस ने यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, आरोपी (40 वर्षीय) एक दुकान चलाता है। उसने कथित तौ पर महिला (28 वर्षीय) के साथ एक 'अनैतिक' संबंध बना लिए थे। उसे शक था कि महिला किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क में है और उसे 'नजरअंदाज' कर रही है। जब महिला अपने घर पर अकेली थी, आरोपी ने उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसके बाद उसने महिला को गले लगाया। दोनों को चोटें आईं।
शुरुआत में उन्हें महबूबाबाद के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में आगे के इलाज के लिए वारंगल के एक अन्य सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, महिला इस घटना में 90 फीसदी तक झुलस गईं, जबकि आरोपी को 75 फीसदी।
महिला की मां ने पुलिस में शिकायत में कहा कि उनकी बेटी गुदुर मंडल के एक पुरुष से विवाहित थी। पारिवारिक विवाद के कारण महिला अपने दो बच्चों के साथ महबूबाबाद आ गई थी और पिछले तीन साल से वहां रह रही थी। वह एक सब्जी की रेहड़ी चला रही थी। पुलिस ने कहा, आरोपी पहले से विवाहित था और उसकी पत्नी का देहांत हो चुका था। उसने महिला के साथ 'अनैतिक' संबंध बना लिया था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी ने महिला को उससे शादी करने के लिए मजबूर किया और उसे परेशान किया। पुलिस ने बताया कि शिकायत के आधार पर इस घटना को लेकर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है।
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पुलिस के अनुसार, आरोपी (40 वर्षीय) एक दुकान चलाता है। उसने कथित तौ पर महिला (28 वर्षीय) के साथ एक 'अनैतिक' संबंध बना लिए थे। उसे शक था कि महिला किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क में है और उसे 'नजरअंदाज' कर रही है। जब महिला अपने घर पर अकेली थी, आरोपी ने उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसके बाद उसने महिला को गले लगाया। दोनों को चोटें आईं।
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शुरुआत में उन्हें महबूबाबाद के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में आगे के इलाज के लिए वारंगल के एक अन्य सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, महिला इस घटना में 90 फीसदी तक झुलस गईं, जबकि आरोपी को 75 फीसदी।
महिला की मां ने पुलिस में शिकायत में कहा कि उनकी बेटी गुदुर मंडल के एक पुरुष से विवाहित थी। पारिवारिक विवाद के कारण महिला अपने दो बच्चों के साथ महबूबाबाद आ गई थी और पिछले तीन साल से वहां रह रही थी। वह एक सब्जी की रेहड़ी चला रही थी। पुलिस ने कहा, आरोपी पहले से विवाहित था और उसकी पत्नी का देहांत हो चुका था। उसने महिला के साथ 'अनैतिक' संबंध बना लिया था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी ने महिला को उससे शादी करने के लिए मजबूर किया और उसे परेशान किया। पुलिस ने बताया कि शिकायत के आधार पर इस घटना को लेकर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है।
पश्चिम बंगाल एसआईआर: चुनाव आयोग ने तीन सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को निलंबित किया
पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में लगे तीन सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने निलंबित कर दिया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। निलंबित सूक्ष्म पर्यवेक्षकों पर काम में लापरवाही बरतने का आरोप है।
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया कि ईसीआई द्वारा नियुक्त जिला मतदाता सूची पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आज दोपहर तीन सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को निलंबित कर दिया है। ईसीआई में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत मतदाता सूची सूक्ष्म पर्यवेक्षकों (ईआरएमओ) को अपने काम का निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए और यदि वे अपना काम किसी और को सौंपते हैं, तो उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे।
जिन तीन सूक्ष्म-पर्यवेक्षकों को निलंबित किया गया है, उनमें बंगाल ग्रामीण विकास बैंक के एक प्रबंधक, सार्वजनिक क्षेत्र के यूको बैंक के एक वरिष्ठ प्रबंधक और एक केंद्रीय उत्पाद शुल्क निरीक्षक शामिल हैं।
राज्य में चल रहे एसआईआर के लिए चुनाव आयोग द्वारा उन्हें सूक्ष्म पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। आयोग ने तीनों सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। उनके मूल नियुक्तिकर्ता प्राधिकरण द्वारा चुनाव आयोग को जांच की प्रगति की नियमित जानकारी दी जाएगी।
पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में लगे तीन सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने निलंबित कर दिया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। निलंबित सूक्ष्म पर्यवेक्षकों पर काम में लापरवाही बरतने का आरोप है।
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया कि ईसीआई द्वारा नियुक्त जिला मतदाता सूची पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आज दोपहर तीन सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को निलंबित कर दिया है। ईसीआई में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत मतदाता सूची सूक्ष्म पर्यवेक्षकों (ईआरएमओ) को अपने काम का निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए और यदि वे अपना काम किसी और को सौंपते हैं, तो उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे।
जिन तीन सूक्ष्म-पर्यवेक्षकों को निलंबित किया गया है, उनमें बंगाल ग्रामीण विकास बैंक के एक प्रबंधक, सार्वजनिक क्षेत्र के यूको बैंक के एक वरिष्ठ प्रबंधक और एक केंद्रीय उत्पाद शुल्क निरीक्षक शामिल हैं।
राज्य में चल रहे एसआईआर के लिए चुनाव आयोग द्वारा उन्हें सूक्ष्म पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। आयोग ने तीनों सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। उनके मूल नियुक्तिकर्ता प्राधिकरण द्वारा चुनाव आयोग को जांच की प्रगति की नियमित जानकारी दी जाएगी।
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला पांच दिवसीय दौरे पर आज भारत आएंगे
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा 18 से 22 फरवरी तक भारत दौरे पर रहेंगे। भारत में ब्राजील के राजदूत केनेथ फेलिक्स हाजिंस्की दा नोब्रेगा ने बताया कि राष्ट्रपति लूला अब तक का सबसे बड़ा ब्राजीली प्रतिनिधिमंडल लेकर भारत पहुंचेंगे। इस दौरान उनके साथ कई केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में उद्योग जगत के शीर्ष सीईओ शामिल होंगे।
राजदूत ने कहा कि भारत और ब्राजील के संबंध तकनीक, नवाचार, डिजिटल क्षेत्र, अर्थव्यवस्था और व्यापार में लगातार मजबूत हो रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 21 फरवरी को राष्ट्रपति लूला की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। यह दौरा भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। इसमें दोनों नेता रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा कर आपसी सहयोग को और गहरा करने के उपायों पर चर्चा करेंगे।
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा 18 से 22 फरवरी तक भारत दौरे पर रहेंगे। भारत में ब्राजील के राजदूत केनेथ फेलिक्स हाजिंस्की दा नोब्रेगा ने बताया कि राष्ट्रपति लूला अब तक का सबसे बड़ा ब्राजीली प्रतिनिधिमंडल लेकर भारत पहुंचेंगे। इस दौरान उनके साथ कई केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में उद्योग जगत के शीर्ष सीईओ शामिल होंगे।
राजदूत ने कहा कि भारत और ब्राजील के संबंध तकनीक, नवाचार, डिजिटल क्षेत्र, अर्थव्यवस्था और व्यापार में लगातार मजबूत हो रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 21 फरवरी को राष्ट्रपति लूला की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। यह दौरा भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। इसमें दोनों नेता रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा कर आपसी सहयोग को और गहरा करने के उपायों पर चर्चा करेंगे।
सोनिया ने मुझे 2014 में शपथ की तारीख तय करने को कहा था: हिमंत
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने 2014 के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा कि उस समय की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें असम का मुख्यमंत्री बनने के लिए शपथ ग्रहण की तारीख स्वयं तय करने को कहा था। सरमा के अनुसार उस समय कांग्रेस के 58 विधायक उनके समर्थन में थे, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं।
कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में सरमा ने कहा कि 2011 के विधानसभा चुनावों के बाद असम कांग्रेस में असंतोष की स्थिति बनी थी। एक धड़ा तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के स्थान पर उनके नेतृत्व का समर्थन कर रहा था। सरमा ने कहा, मैडम (सोनिया गांधी) ने मुझसे शपथ की तारीख तय करने को कहा था। मैंने उनसे कहा था कि मैं जून 2014 में कामाख्या मंदिर के अंबुबाची मेले के बाद शपथ लूंगा। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि उस समय अमेरिका में मौजूद राहुल गांधी द्वारा पार्टी नेताओं से बातचीत के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए।
जीवन में जो होता है, अच्छे के लिए ही होता है...
सरमा ने कहा, उस समय मुझे ठेस पहुंची थी, लेकिन अब मुझे लगता है कि जीवन में जो होता है, अच्छे के लिए ही होता है। उन्होंने कहा, यदि वे कांग्रेस में बने रहते तो शायद उन्हें वह अवसर नहीं मिलता, जो बाद में भारतीय जनता पार्टी के साथ मिला। उल्लेखनीय है कि 2015 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सरमा ने 2021 में असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सरमा ने कहा, भाजपा के मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें असम और सनातन धर्म की सेवा का अवसर मिला। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में यदि वे अपनी आत्मकथा लिखेंगे तो इन घटनाक्रमों का विस्तार से उल्लेख करेंगे।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने 2014 के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा कि उस समय की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें असम का मुख्यमंत्री बनने के लिए शपथ ग्रहण की तारीख स्वयं तय करने को कहा था। सरमा के अनुसार उस समय कांग्रेस के 58 विधायक उनके समर्थन में थे, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं।
कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में सरमा ने कहा कि 2011 के विधानसभा चुनावों के बाद असम कांग्रेस में असंतोष की स्थिति बनी थी। एक धड़ा तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के स्थान पर उनके नेतृत्व का समर्थन कर रहा था। सरमा ने कहा, मैडम (सोनिया गांधी) ने मुझसे शपथ की तारीख तय करने को कहा था। मैंने उनसे कहा था कि मैं जून 2014 में कामाख्या मंदिर के अंबुबाची मेले के बाद शपथ लूंगा। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि उस समय अमेरिका में मौजूद राहुल गांधी द्वारा पार्टी नेताओं से बातचीत के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए।
जीवन में जो होता है, अच्छे के लिए ही होता है...
सरमा ने कहा, उस समय मुझे ठेस पहुंची थी, लेकिन अब मुझे लगता है कि जीवन में जो होता है, अच्छे के लिए ही होता है। उन्होंने कहा, यदि वे कांग्रेस में बने रहते तो शायद उन्हें वह अवसर नहीं मिलता, जो बाद में भारतीय जनता पार्टी के साथ मिला। उल्लेखनीय है कि 2015 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सरमा ने 2021 में असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सरमा ने कहा, भाजपा के मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें असम और सनातन धर्म की सेवा का अवसर मिला। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में यदि वे अपनी आत्मकथा लिखेंगे तो इन घटनाक्रमों का विस्तार से उल्लेख करेंगे।
असम में सरकारी नौकरियों में चाय जनजाति के लोगों को मिलेगा 3 प्रतिशत आरक्षण, कैबिनेट ने दी मंजूरी
असम कैबिनेट ने मंगलवार को चाय जनजाति और आदिवासी समुदायों के लिए क्लास I और क्लास II राज्य सरकार की नौकरियों में तीन प्रतिशत आरक्षण देने को मंजूरी दे दी। ये समुदाय राज्य के सबसे पिछड़े तबकों में से है और इस कदम से सरकार इस वर्ग के हालात को सुधारना चाहती है। सीएम सरमा ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी दी। यह फैसला सीएम सरमा की अध्यक्षता में दिसपुर में असम विधानसभा कॉम्प्लेक्स में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। सरकार के इस कदम से, चाय जनजाति और आदिवासी समुदायों को अब राज्य में क्लास III और क्लास IV पदों में मौजूदा कोटे के अलावा, ऊंचे स्तर की सरकारी सेवाओं में भी आरक्षण का फायदा मिलेगा।