Thane: नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में 32 वर्षीय आरोपी बरी, मां ने बदला लेने के लिए लगाया था आरोप
पुणे में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपी को बरी कर दिया गया है। 32 साल के आरोपी पर 10 साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न का आरोपी बनाया गया था।
विस्तार
ठाणे की एक कोर्ट ने एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के 32 साल के आरोपी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला आपसी झगड़े से जुड़ा लगता है। विशेष पोक्सो कोर्ट के जज डी एस देशमुख ने 13 फरवरी को अपने फैसले में कहा कि आरोपी और पीड़िता की मां का संबंध था, और जब उसने उससे शादी करने से मना कर दिया, तो झगड़ा शुरू हो गया। इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि पीड़िता को सिखाया गया था, और उसकी गवाही से यौन उत्पीड़न साबित नहीं हुआ।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 11 अगस्त, 2019 को हुई थी, जब 10 साल की पीड़िता और उसकी मां महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मुंब्रा इलाके में एक मार्केट से लौट रही थीं। आरोपी, मोहम्मद नशीर रैन, जो एक स्थानीय चाय बेचने वाला है, ने बच्ची को पीछे से गले लगाया और गंदी हरकतें कीं। जब मां ने बीच-बचाव किया, तो आरोपी ने उस पर हमला किया, जिससे उसकी हड्डी टूट गई।
आरोपी पर भारतीय दंड संहिता और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) एक्ट के तहत आरोप लगाए गए। बचाव पक्ष ने दलील दी कि शिकायत करने वाली (नाबालिग लड़की की मां) और आरोपी के बीच लंबे समय से रिश्ता था और कानूनी कार्रवाई बदले की भावना से की गई थी।
कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अभियोजन जुर्म साबित करने के लिए बुनियादी बातें साबित करने में नाकाम रहा है। कोर्ट ने ये भी कहा कि मां और बेटी की गवाही में काफी अंतर देखा गया। मां ने माना कि वह आरोपी के साथ दो बार एक लॉज गई थी, और आरोपी के उससे शादी करने से मना करने को लेकर झगड़ा हुआ था।
कोर्ट ने यह भी बताया कि मां ने दावा किया कि हाथापाई में उसका हाथ टूट गया था, लेकिन मेडिकल में इस तरह का कोई सबूत नहीं मिला। कोर्ट ने आगे कहा कि पीड़िता के बयानों में अलग-अलग बातों ने सरकारी वकील के केस को कमजोर कर दिया।