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640 करोड़ रुपये का साइबर घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने सीए की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की, कही अहम बात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 18 Feb 2026 03:02 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट ने 640 करोड़ रुपये के साइबर घोटाले में हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है और आरोपी सीए की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आरोपियों से पूछताछ जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 640 करोड़ रुपये के साइबर घोटाले से जुड़े मामले में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) को अग्रिम जमानत देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस एमएम सुंदरेश और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें सीए भास्कर यादव को अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया गया था और उन्हें 10 दिनों में सरेंडर करने का निर्देश दिया गया था।
क्या है मामला
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क्या है मामला
- हाई कोर्ट ने 2 फरवरी को यादव और अशोक कुमार शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थीं। फैसले में हाई कोर्ट ने कहा था कि यह मनी लॉन्ड्रिंग का एक पेचीदा जाल है, और ईडी द्वारा दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत गलत नहीं है।
- अदालत ने कहा, 'यह सिर्फ क्रिप्टोकरेंसी में डील करने का मामला नहीं है। यह पैसे के मूवमेंट का एक बड़ा और पेचीदा जाल दिखाता है, जो भोले-भाले निवेशकों की जेब से धोखे से निकाला गया है।'
- हाई कोर्ट ने कहा था कि व्यक्तिगत आजादी सबसे जरूरी है, लेकिन वे देश की अर्थव्यवस्था के बड़े हित में सही पूछताछ करने की जरूरत को नजरअंदाज नहीं कर सकते।
- इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की दो FIR से शुरू हुई है। ये एफआईआर जुए, सट्टे और पार्ट-टाइम जॉब और फिशिंग स्कैम से हुए 640 करोड़ रुपये के साइबर घोटाले के आरोपों की जांच के लिए दर्ज की गई थीं।
- लोगों का पैसा 5,000 से ज़्यादा भारतीय बैंक अकाउंट के जरिए ठगा गया और बाद में यूएई के पेमेंट प्लेटफॉर्म PYYPL पर अपलोड कर दिया गया। इसमें कहा गया है कि साइबर फ्रॉड के पैसे का कुछ हिस्सा दुबई में अलग-अलग भारतीय बैंकों के डेबिट और क्रेडिट कार्ड के जरिए कैश में निकाला गया।
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