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Supreme Court: 'पायजामे का नाड़ा खींचना दुष्कर्म की कोशिश', सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 18 Feb 2026 01:46 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को पलट दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पायजामे का नाड़ा खींचना दुष्कर्म की कोशिश है। इससे पहले उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में नाड़ा खींचने को दुष्कर्म की तैयारी बताया था। 

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि पायजामे का नाड़ा खींचना और स्तन छूना साफ तौर पर दुष्कर्म की कोशिश है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का विवादित फैसला भी पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि नाड़ा खींचना या तोड़ना सिर्फ दुष्कर्म करने की तैयारी है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की और 10 फरवरी को उच्च न्यायालय के फैसले को पलटने का आदेश दिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पोक्सो कानून के तहत आरोपियों के खिलाफ लगे सख्त आरोपों को भी बहाल कर दिया। 
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क्या है मामला
10 नवंबर 2021 को एक महिला ने पुलिस में दर्ज शिकायत में बताया कि वह और उसकी 14 साल की नाबालिग बेटी उसकी ननद के घर से वापस अपने घर लौट रहे थे। इस दौरान उनके गांव के ही पवन, आकाश और अशोक ने उनकी बेटी को मोटरसाइकिल पर घर छोड़ने की पेशकश की। महिला ने आरोप लगाया कि तीनों आरोपियों ने उसकी बेटी से छेड़छाड़ की और उसके पायजामे का नाड़ा भी खींच लिया। बच्ची की चीख सुनकर दो लोग वहां पहुंचे और उन्हें देखकर तीनों आरोपी मौके से फरार हो गए। 
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ये भी पढ़ें- हाईकोर्ट की यह कैसी टिप्पणी? "स्तन पकड़ना, पायजामे का नाड़ा तोड़ना बलात्कार या बलात्कार की कोशिश नहीं"

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एन वी अंजारिया की पीठ ने कहा कि विवादित आदेश आपराधिक न्यायशास्त्र के तय सिद्धांतों के गलत इस्तेमाल के कारण रद्द किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए, पोक्सो कानून के तहत दो आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म की कोशिश के आरोप बहाल कर दिया।

पीठ ने फैसले में कहा, 'जो तथ्य बताए गए हैं, उन्हें देखते हुए, हम हाई कोर्ट के इस नतीजे से सहमत नहीं हो सकते कि आरोपी सिर्फ दुष्कर्म की तैयारी कर रहे थे, कोशिश नहीं।' सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों को सिर्फ देखने से ही इस बात में जरा सा भी शक नहीं रह जाता कि आरोपियों ने दुष्कर्म की कोशिश के तय इरादे से ये सब किया। 17 मार्च, 2025 का विवादित फैसला रद्द किया जाता है, और स्पेशल जज (POCSO), कासगंज का 23 जून, 2023 का असल समन ऑर्डर बहाल किया जाता है।

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