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E20 Petrol: ई20 पेट्रोल से किन वाहनों के रबर पार्ट्स पर पड़ता है असर? नितिन गडकरी ने खुद संसद में बताया
Wed, 29 Jul 2026 04:12 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 29 Jul 2026 04:12 PM IST
सार
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई20 ईंधन के उपयोग से अधिकांश वाहनों के इंजन या प्रदर्शन पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ता। हालांकि, 2016 से पहले बने कुछ पुराने वाहनों, विशेषकर बीएस-3 मानक वाले मॉडलों में नियमित सर्विसिंग के दौरान रबर के कुछ पुर्जों और गैस्केट को बदलने की आवश्यकता हो सकती है। सरकार के अनुसार, विभिन्न संस्थानों द्वारा किए गए संयुक्त परीक्षणों में ड्राइविंग क्षमता, इंजन के प्रदर्शन और टिकाऊपन से जुड़ी कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई।
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल पर एक अप्रैल 2005 से लागू बीएस-3 मानक वाले और वर्ष 2016 से पहले निर्मित कुछ वाहनों में रबर के कुछ पुर्जे और गैस्केट बदलने की जरूरत पड़ सकती है।
राज्यसभा में एक लिखित जवाब में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि ई20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहन के माइलेज पर असर को लेकर उठी चिंताओं के संबंध में वाहन निर्माताओं और वाहन एवं इंजन परीक्षण एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि वाहन का माइलेज केवल ईंधन के प्रकार पर नहीं, बल्कि कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
ये भी पढ़ें: E20 Petrol: ई20 पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं? सरकार ने बताई इथेनॉल की कीमत, 20% ब्लेंडिंग और आगे की पूरी रणनीति
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गडकरी ने बताया किन वाहनों के रबर पार्ट्स बदलने पड़ सकते हैं?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर ई20 के प्रभाव का आकलन करने के लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) देहरादून, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) ने संयुक्त अध्ययन किया।
उन्होंने कहा कि अध्ययन में कार और दोपहिया वाहनों के इंजन में किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं पाई गई। मंत्री के अनुसार, अध्ययन में यह भी सामने आया कि पुराने वाहनों के प्रदर्शन में ई20 ईंधन के इस्तेमाल से कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं देखा गया और न ही उनमें असामान्य घिसावट के संकेत मिले।
क्या वाहनों में आ सकती है कोई और समस्या?
गडकरी ने कहा कि ड्राइवबिलिटी, स्टार्ट होने की क्षमता, धातु के पुर्जों और प्लास्टिक के हिस्सों की अनुकूलता जैसे मानकों पर भी कोई समस्या सामने नहीं आई। गडकरी ने कहा, "केवल 1 अप्रैल 2005 से लागू बीएस-3 मानक वाले और वर्ष 2016 से पहले निर्मित वाहनों के परीक्षण के दौरान पाया गया कि उनमें रबर के कुछ पुर्जे और गैस्केट बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है। इसे वाहन की नियमित सर्विसिंग के दौरान आसानी से किया जा सकता है।"
ई20 पेट्रोल (80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत इथेनॉल) लागू किए जाने के बाद विपक्षी दलों और कुछ उपभोक्ता संगठनों ने चिंता जताई है कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के अनुरूप तैयार नहीं किए गए पुराने वाहनों पर इसका असर पड़ सकता है। आलोचकों ने सवाल उठाए हैं कि क्या सभी वाहन ई20 के अनुकूल हैं। साथ ही उन्होंने ईंधन दक्षता में कमी, रखरखाव लागत बढ़ने और इंजन या ईंधन प्रणाली में समस्या आने पर जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी स्पष्टता मांगी है।
ई20 पेट्रोल पर क्या बोले नितिन गडकरी?
सरकार का कहना है कि ई20 की शुरुआत चरणबद्ध तरीके से व्यापक परीक्षणों के बाद की गई है। वहीं, वाहन निर्माताओं ने कहा है कि ई20 ईंधन इस्तेमाल करने वाले वाहनों की वारंटी संबंधी दावों का सम्मान किया जाता रहेगा। विपक्ष लगातार वाहन अनुकूलता और उपभोक्ता सुरक्षा उपायों पर अधिक पारदर्शिता की मांग करता रहा है।
गडकरी ने बताया कि नीति आयोग के तहत 26 दिसंबर 2020 को गठित अंतर-मंत्रालयी समिति (आईएमसी) ने इथेनॉल मिश्रण से जुड़े वाहन अनुकूलता और माइलेज एवं दक्षता के सभी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया था। इस मूल्यांकन में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के शोध का भी सहयोग लिया गया।
उन्होंने कहा कि जून 2021 में जारी समिति की रिपोर्ट "रोडमैप फॉर इथेनॉल ब्लेंडिंग इन इंडिया 2020-25" वाहन निर्माताओं, तेल कंपनियों और कृषि विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श के बाद तैयार की गई थी। इसमें सामग्री की अनुकूलता, इंजन कैलिब्रेशन, ईंधन प्रणाली, ड्राइवबिलिटी, टिकाऊपन, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता जैसे पहलुओं का परीक्षण किया गया था।
ये भी पढ़ें: E20 Petrol: देश में कितने वाहन E20 ईंधन के लिए पूरी तरह अनुकूल? संसद में सरकार ने कहा- ऐसा कोई आकलन नहीं किया गया
इथेनॉल मिश्रण की नीति क्यों की गई लागू?
समिति की यह रिपोर्ट ई20 ईंधन लागू होने से पहले तैयार की गई थी। मंत्री ने कहा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम को चरणबद्ध, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और व्यापक परामर्श की प्रक्रिया के तहत लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन का दुनिया के कई देशों में एक सदी से अधिक समय से उपयोग हो रहा है। ब्राजील जैसे देशों में कई दशकों से अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 में पायलट परियोजना के रूप में हुई थी और वर्ष 2006 में ई5 ईंधन पेश किया गया। वर्ष 2013-14 तक इथेनॉल मिश्रण लगभग 1.53 प्रतिशत रहा, लेकिन उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढांचे और नियामकीय व्यवस्था विकसित होने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया।
अप्रैल 2026 में ई20 ईंधन लागू करने से पहले इंजन की टिकाऊ क्षमता, सामग्री की अनुकूलता, ईंधन प्रणाली, जंग प्रतिरोध, ड्राइवबिलिटी, उत्सर्जन, ईंधन दक्षता और वाहन के समग्र प्रदर्शन पर व्यापक प्रयोगशाला परीक्षण, टिकाऊपन परीक्षण और फील्ड परीक्षण किए गए थे। बीएस (भारत स्टेज) भारत के वाहन उत्सर्जन मानक हैं, जिनके तहत कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ), नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स), हाइड्रोकार्बन (एचसी) और पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) जैसे प्रदूषकों के उत्सर्जन की सीमा तय की जाती है।
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राज्यसभा में एक लिखित जवाब में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि ई20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहन के माइलेज पर असर को लेकर उठी चिंताओं के संबंध में वाहन निर्माताओं और वाहन एवं इंजन परीक्षण एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि वाहन का माइलेज केवल ईंधन के प्रकार पर नहीं, बल्कि कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
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गडकरी ने बताया किन वाहनों के रबर पार्ट्स बदलने पड़ सकते हैं?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर ई20 के प्रभाव का आकलन करने के लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) देहरादून, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) ने संयुक्त अध्ययन किया।
उन्होंने कहा कि अध्ययन में कार और दोपहिया वाहनों के इंजन में किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं पाई गई। मंत्री के अनुसार, अध्ययन में यह भी सामने आया कि पुराने वाहनों के प्रदर्शन में ई20 ईंधन के इस्तेमाल से कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं देखा गया और न ही उनमें असामान्य घिसावट के संकेत मिले।
क्या वाहनों में आ सकती है कोई और समस्या?
गडकरी ने कहा कि ड्राइवबिलिटी, स्टार्ट होने की क्षमता, धातु के पुर्जों और प्लास्टिक के हिस्सों की अनुकूलता जैसे मानकों पर भी कोई समस्या सामने नहीं आई। गडकरी ने कहा, "केवल 1 अप्रैल 2005 से लागू बीएस-3 मानक वाले और वर्ष 2016 से पहले निर्मित वाहनों के परीक्षण के दौरान पाया गया कि उनमें रबर के कुछ पुर्जे और गैस्केट बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है। इसे वाहन की नियमित सर्विसिंग के दौरान आसानी से किया जा सकता है।"
ई20 पेट्रोल (80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत इथेनॉल) लागू किए जाने के बाद विपक्षी दलों और कुछ उपभोक्ता संगठनों ने चिंता जताई है कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के अनुरूप तैयार नहीं किए गए पुराने वाहनों पर इसका असर पड़ सकता है। आलोचकों ने सवाल उठाए हैं कि क्या सभी वाहन ई20 के अनुकूल हैं। साथ ही उन्होंने ईंधन दक्षता में कमी, रखरखाव लागत बढ़ने और इंजन या ईंधन प्रणाली में समस्या आने पर जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी स्पष्टता मांगी है।
ई20 पेट्रोल पर क्या बोले नितिन गडकरी?
सरकार का कहना है कि ई20 की शुरुआत चरणबद्ध तरीके से व्यापक परीक्षणों के बाद की गई है। वहीं, वाहन निर्माताओं ने कहा है कि ई20 ईंधन इस्तेमाल करने वाले वाहनों की वारंटी संबंधी दावों का सम्मान किया जाता रहेगा। विपक्ष लगातार वाहन अनुकूलता और उपभोक्ता सुरक्षा उपायों पर अधिक पारदर्शिता की मांग करता रहा है।
गडकरी ने बताया कि नीति आयोग के तहत 26 दिसंबर 2020 को गठित अंतर-मंत्रालयी समिति (आईएमसी) ने इथेनॉल मिश्रण से जुड़े वाहन अनुकूलता और माइलेज एवं दक्षता के सभी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया था। इस मूल्यांकन में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के शोध का भी सहयोग लिया गया।
उन्होंने कहा कि जून 2021 में जारी समिति की रिपोर्ट "रोडमैप फॉर इथेनॉल ब्लेंडिंग इन इंडिया 2020-25" वाहन निर्माताओं, तेल कंपनियों और कृषि विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श के बाद तैयार की गई थी। इसमें सामग्री की अनुकूलता, इंजन कैलिब्रेशन, ईंधन प्रणाली, ड्राइवबिलिटी, टिकाऊपन, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता जैसे पहलुओं का परीक्षण किया गया था।
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इथेनॉल मिश्रण की नीति क्यों की गई लागू?
समिति की यह रिपोर्ट ई20 ईंधन लागू होने से पहले तैयार की गई थी। मंत्री ने कहा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम को चरणबद्ध, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और व्यापक परामर्श की प्रक्रिया के तहत लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन का दुनिया के कई देशों में एक सदी से अधिक समय से उपयोग हो रहा है। ब्राजील जैसे देशों में कई दशकों से अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 में पायलट परियोजना के रूप में हुई थी और वर्ष 2006 में ई5 ईंधन पेश किया गया। वर्ष 2013-14 तक इथेनॉल मिश्रण लगभग 1.53 प्रतिशत रहा, लेकिन उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढांचे और नियामकीय व्यवस्था विकसित होने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया।
अप्रैल 2026 में ई20 ईंधन लागू करने से पहले इंजन की टिकाऊ क्षमता, सामग्री की अनुकूलता, ईंधन प्रणाली, जंग प्रतिरोध, ड्राइवबिलिटी, उत्सर्जन, ईंधन दक्षता और वाहन के समग्र प्रदर्शन पर व्यापक प्रयोगशाला परीक्षण, टिकाऊपन परीक्षण और फील्ड परीक्षण किए गए थे। बीएस (भारत स्टेज) भारत के वाहन उत्सर्जन मानक हैं, जिनके तहत कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ), नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स), हाइड्रोकार्बन (एचसी) और पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) जैसे प्रदूषकों के उत्सर्जन की सीमा तय की जाती है।