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कर्नाटक: नाबालिगों को शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों पर होगी कार्रवाई, मंत्री खरगे ने क्या-क्या निर्देश दिए?
पीटीआई, बंगलूरू।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 08 Jun 2026 10:35 PM IST
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सार
कर्नाटक सरकार ने पब, बार और अन्य शराब परोसने वाले स्थानों में नाबालिगों के प्रवेश और शराब सेवन पर सख्त रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, बंगलूरू के अध्ययन में खुलासा हुआ था कि किशोरों में शराब और तंबाकू का उपयोग राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है और कई मामलों में कम उम्र में इसकी शुरुआत होती है। पढ़िए रिपोर्ट-
प्रियांक खरगे, कर्नाटक के गृह मंत्री
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने सोमवार को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पब, बार, क्लब, रेस्तरां और लाउंज जैसे शराब परोसने वाले सभी प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करें। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा जाए कि नाबालिगों को प्रवेश देने और उन्हें शराब परोसने पर सख्त रोक रहेगी।
यह निर्देश बंगलूरू में किशोरों और युवाओं के बीच बढ़ती शराब पीने की प्रवृत्ति और नशीले पदार्थों के संपर्क को लेकर बढ़ती चिंता के बाद दिया गया है। मंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में बताया गया कि हाल ही में बंगलूरू के चार शिक्षण संस्थानों में 4,093 छात्रों पर एक अध्ययन किया गया। इसमें प्री-यूनिवर्सिटी, स्नातक और उच्च माध्यमिक कक्षाओं के छात्र शामिल थे।
अध्ययन में क्या पाया गया?
गृह मंत्री ने पुलिस को क्या सख्त निर्देश दिए?
इन निष्कर्षों को देखते हुए गृह मंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि नाबालिगों के शराब पीने को केवल लाइसेंस नियमों के उल्लंघन के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे युवाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना जाए। सभी शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों को उनके प्रवेश के समय और शराब परोसने से पहले उम्र की सख्ती से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्देशों के अनुसार, वैध आयु प्रमाण पत्र के बिना किसी भी व्यक्ति को ऐसे प्रतिष्ठानों में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यदि कोई प्रतिष्ठान नाबालिगों को शराब परोसता है या उन्हें शराब पीने में मदद करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ये भी पढ़ें: शाह बोले- गरीब कल्याण प्राथमिकता; यमुना की सफाई से जुड़े मुद्दों पर बैठक में क्या निर्देश दिए?
ऐसे मामलों में प्रतिष्ठान के मालिक, प्रबंधक, लाइसेंस धारक और कार्यक्रम आयोजक अपने परिसर में होने वाले उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार माने जाएंगे। साथ ही, सभी प्रतिष्ठानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्रवेश गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे सही ढंग से काम करें और जांच के लिए फुटेज एक निर्धारित न्यूनतम अवधि तक सुरक्षित रखी जाए।
यह निर्देश बंगलूरू में किशोरों और युवाओं के बीच बढ़ती शराब पीने की प्रवृत्ति और नशीले पदार्थों के संपर्क को लेकर बढ़ती चिंता के बाद दिया गया है। मंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में बताया गया कि हाल ही में बंगलूरू के चार शिक्षण संस्थानों में 4,093 छात्रों पर एक अध्ययन किया गया। इसमें प्री-यूनिवर्सिटी, स्नातक और उच्च माध्यमिक कक्षाओं के छात्र शामिल थे।
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अध्ययन में क्या पाया गया?
- अध्ययन में पाया गया कि शहर का हर तीसरा किशोर शराब या तंबाकू के सेवन के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के खतरे में है।
- यह अध्ययन बंगलूरू के सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज, क्राइस्ट विश्वविद्यालयऔर मणिपल के कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज के शोधकर्ताओं की ओर से किया गया था।
- सर्वे में शामिल 33 फीसदी युवाओं ने शराब का सेवन करने की बात कही, जबकि करीब 18 फीसदी तंबाकू की लत से ग्रस्त पाए गए।
- ये आंकड़े देश के औसत आंकड़ों से काफी ज्यादा हैं। देश में शराब सेवन की दर 7.9 फीसदी और तंबाकू सेवन की दर 8.7 फीसदी है।
- कर्नाटक में शराब सेवन की दर 8.5 फीसदी और तंबाकू सेवन की दर 4.7 फीसदी बताई गई है।
- अध्ययन में यह भी सामने आया कि बंगलूरू के किशोरों में पहली बार शराब पीने की औसत उम्र 17 वर्ष है। कुछ मामलों में बच्चों ने आठ वर्ष की उम्र में ही शराब का सेवन शुरू करने की जानकारी दी।
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गृह मंत्री ने पुलिस को क्या सख्त निर्देश दिए?
इन निष्कर्षों को देखते हुए गृह मंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि नाबालिगों के शराब पीने को केवल लाइसेंस नियमों के उल्लंघन के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे युवाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना जाए। सभी शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों को उनके प्रवेश के समय और शराब परोसने से पहले उम्र की सख्ती से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्देशों के अनुसार, वैध आयु प्रमाण पत्र के बिना किसी भी व्यक्ति को ऐसे प्रतिष्ठानों में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यदि कोई प्रतिष्ठान नाबालिगों को शराब परोसता है या उन्हें शराब पीने में मदद करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ये भी पढ़ें: शाह बोले- गरीब कल्याण प्राथमिकता; यमुना की सफाई से जुड़े मुद्दों पर बैठक में क्या निर्देश दिए?
ऐसे मामलों में प्रतिष्ठान के मालिक, प्रबंधक, लाइसेंस धारक और कार्यक्रम आयोजक अपने परिसर में होने वाले उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार माने जाएंगे। साथ ही, सभी प्रतिष्ठानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्रवेश गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे सही ढंग से काम करें और जांच के लिए फुटेज एक निर्धारित न्यूनतम अवधि तक सुरक्षित रखी जाए।