गैस लीक का खतरा नहीं! खुद रुक जाएगी हाइड्रोजन ट्रेन: जाने कितनी हाईटेक है नई रेल, यात्रियों को ये सुविधाएं
रेलवे ने साल 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करने का बड़ा लक्ष्य तय किया है। इसी दिशा में रेलवे तेजी से ग्रीन और क्लीन एनर्जी आधारित तकनीकों को अपनाने पर काम कर रहा है। इस पहल के तहत रेलवे ने हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए देश के ऐतिहासिक, हेरिटेज और पहाड़ी रूटों पर 35 हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन करने की तैयारी की जा रही है।
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विस्तार
देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन अब पटरियों पर दौड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। रेलवे बोर्ड ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को संचालन की मंजूरी दे दी है। यह ट्रेन हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर चलाई जाएगी, जहां इसके सफल ट्रायल पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेन को सुरक्षा, विश्वसनीयता और भारतीय रेलवे ट्रैक के साथ अनुकूलता जैसे कई सख्त मानकों पर परखा गया। सभी परीक्षणों में सफल रहने के बाद ही इसे अंतिम हरी झंडी दी गई है।
कहां तैयार हुई ये ट्रेन
इस अत्याधुनिक ट्रेन का निर्माण चेन्नई स्थित में किया गया है। हाइड्रोजन तकनीक पर आधारित यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल मानी जा रही है, क्योंकि इसके संचालन के दौरान धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता और केवल पानी की भाप निकलती है। भारतीय रेलवे का यह कदम देश को ग्रीन और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा में आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है। इस उपलब्धि के साथ भारत हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक अपनाने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है।
इस रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन कई मायनों में बेहद खास और अनोखी मानी जा रही है। इसे दुनिया की सबसे लंबी ब्रॉड-गेज हाइड्रोजन ट्रेन बताया जा रहा है। यह आधुनिक ट्रेन करीब 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेगी। रेलवे ने इसके संचालन के लिए उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत रूट को चुना है। यह ट्रैक अपेक्षाकृत कम भीड़भाड़ वाला माना जाता है और तकनीकी परीक्षणों के लिहाज से काफी उपयुक्त है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही और स्थानीय आबादी पर जोखिम कम होने के कारण हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत यहीं से करने का फैसला लिया गया।
यहां बना देश का पहला हाइड्रोजन प्लांट
हाइड्रोजन आधारित इस परियोजना को सफल बनाने के लिए जींद के पास देश का पहला हाइड्रोजन प्लांट भी स्थापित किया जा रहा है। चूंकि हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील गैस होती है, इसलिए ट्रेन संचालन और ईंधन भंडारण को लेकर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
ट्रेन में होगे इतने कोच
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन अत्याधुनिक तकनीक और हाई सेफ्टी फीचर्स से लैस होगी। इस ट्रेन में कुल 10 कोच लगाए गए हैं, जिनमें 2 ड्राइविंग पावर कार और 8 यात्री कोच शामिल हैं। ट्रेन की कुल पावर क्षमता 2400 किलोवाट रखी गई है। इसमें प्रत्येक ड्राइविंग पावर कार 1200 किलोवाट की क्षमता से लैस होगी। रेलवे के अनुसार, यह ट्रेन एक बार में करीब 2,600 यात्रियों को सफर कराने में सक्षम होगी। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन में कई एडवांस सेफ्टी सिस्टम लगाए गए हैं। हाइड्रोजन गैस की निगरानी के लिए विशेष लीक डिटेक्शन सेंसर लगाए गए हैं। किसी भी तरह की गैस लीक होने की स्थिति में ट्रेन का सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा और ट्रेन स्वतः रुक जाएगी।