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Seva Teerth: अब ‘सेवा तीर्थ’ से चलेगा शासन, जानिए क्या है नए प्रधानमंत्री कार्यालय की खास बातें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Fri, 13 Feb 2026 11:09 AM IST
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सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 'सेवा तीर्थ' नामक नए पीएमओ परिसर और कर्तव्य भवन-1 व 2 का उद्घाटन किया। इससे शीर्ष सरकारी कार्यालयों और कई प्रमुख मंत्रालयों को एकीकृत आधुनिक सचिवालय ढांचे में लाया जाएगा। आइए विस्तार से जानते हैं।

Now the government will be run from 'Seva Teerth', know what are the special features of the new PMO
सेवा तीर्थ - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘सेवा तीर्थ’ नाम से बने नए प्रधानमंत्री कार्यालय भवन के साथ कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 का उद्घाटन किया। यह तारीख ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन 1931 में नई दिल्ली को औपचारिक रूप से आधुनिक भारत की राजधानी के रूप में उद्घाटित किया गया था। प्रधानमंत्री शाम लगभग 6 बजे यहां एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

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आज ही बनी थी दिल्ली आधुनिक भारत की राजधानी

करीब 95 वर्षों में देश ने आजादी, गणतंत्र बनने और वैश्विक मंच पर अपनी स्वतंत्र पहचान स्थापित करने जैसे अनेक ऐतिहासिक पड़ाव तय किए हैं। इन सभी बदलावों का साक्षी रहा राजधानी का प्रतिष्ठित रायसीना हिल परिसर, जो एक बार फिर एक बड़े प्रशासनिक परिवर्तन का गवाह बनने जा रहा है।

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प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव

'सेवा तीर्थ' परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय को एक ही स्थान पर समेकित किया गया है। पहले ये संस्थान सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में अलग-अलग भवनों में स्थित थे।


  • वहीं, नए कर्तव्य भवन 1 और 2 में कानून, रक्षा, वित्त, स्वास्थ्य, कृषि सहित कई प्रमुख मंत्रालयों के दफ्तर स्थापित किए जाएंगे।
  • सरकार के अनुसार, यह कदम प्रशासनिक समन्वय, दक्षता और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
  • पीएमओ के बयान के मुताबिक, यह उद्घाटन भारत की प्रशासनिक संरचना में एक परिवर्तनकारी पड़ाव है।
  • यह आधुनिक, कुशल और सुलभ शासन व्यवस्था के निर्माण की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

नॉर्थ ब्लॉक-साउथ ब्लॉक की ऐतिहासिक भूमिका

1931 से सत्ता का केंद्र रहे नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक लंबे समय तक प्रमुख मंत्रालयों का मुख्यालय रहे हैं। नॉर्थ ब्लॉक में गृह और वित्त मंत्रालय व साउथ ब्लॉक में रक्षा, विदेश मंत्रालय और पीएमओ स्थित थे। अब इन मंत्रालयों का चरणबद्ध तरीके से नए सचिवालय भवनों में स्थानांतरण हो रहा है।

सरकार की योजना के तहत भविष्य में नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में 'युगे युगेन भारत' राष्ट्रीय संग्रहालय स्थापित किया जाएगा, जिसे दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालयों में शामिल करने का लक्ष्य है।

नई दिल्ली के निर्माण का ऐतिहासिक संदर्भ

नई दिल्ली की आधारशिला 1911 में किंग जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी ने दिल्ली दरबार के दौरान रखी थी, जब राजधानी को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा हुई थी। लगभग दो दशक के निर्माण के बाद 13 फरवरी 1931 को वायसराय लॉर्ड इरविन ने नई राजधानी का औपचारिक उद्घाटन किया।

इस शाही शहर के केंद्र में रायसीना हिल परिसर बनाया गया, जिसमें वायसराय हाउस (वर्तमान राष्ट्रपति भवन), नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक शामिल थे। ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस और सर हर्बर्ट बेकर ने इन इमारतों का डिजाइन तैयार किया था, जिनकी भव्यता विश्व की प्रमुख राजधानियों से टक्कर लेती है।

कर्तव्य भवनों में शिफ्ट होंगे कई प्रमुख मंत्रालय

नए कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा, संस्कृति, विधि एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण, कृषि एवं किसान कल्याण, रसायन एवं उर्वरक, कॉर्पोरेट कार्य, जनजातीय कार्य सहित कई अहम मंत्रालयों के कार्यालय स्थापित किए गए हैं। दशकों से सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में अलग-अलग और पुरानी इमारतों में फैले सरकारी दफ्तरों के कारण समन्वय की चुनौतियां, बढ़ती रखरखाव लागत और कार्य दक्षता से जुड़ी समस्याएं सामने आती रही थीं। नए समेकित परिसर से इन चुनौतियों को दूर करने का लक्ष्य रखा गया है।

डिजिटल, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल ढांचा

दोनों भवन परिसरों में डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय, केंद्रीकृत स्वागत प्रणाली और सुव्यवस्थित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र बनाए गए हैं, जो सहयोग, दक्षता और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देंगे। 4-स्टार जीआरआईएचए मानकों के अनुरूप डिजाइन किए गए इन परिसरों में नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और उच्च-प्रदर्शन भवन संरचना जैसी पर्यावरण अनुकूल सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, निगरानी नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली जैसी आधुनिक सुरक्षा व्यवस्थाएं भी की गई हैं।

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास का हिस्सा

सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन, सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा हैं। इस परियोजना में नया संसद भवन, कॉमन सेंट्रल सचिवालय, कर्तव्य पथ का पुनर्विकास, प्रधानमंत्री आवास, उपराष्ट्रपति एन्क्लेव और अन्य प्रशासनिक ढांचे शामिल हैं।

ऐसे में 95 साल बाद उसी ऐतिहासिक तारीख पर नई प्रशासनिक इमारतों का उद्घाटन केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि भारत के शासन ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जो औपनिवेशिक कालीन भवनों से आधुनिक प्रशासनिक परिसरों की ओर संक्रमण को दर्शाता है।

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