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आसमान में बादशाहत की तैयारी: नई राफेल डील से बदलेगा शक्ति संतुलन, मैक्रों की यात्रा के वक्त होगा बड़ा समझौता

Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Fri, 13 Feb 2026 01:11 PM IST
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सार

ऑपरेशन सिन्दूर के बाद भारत ने हवाई ताकत बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा खरीद परिषद ने 114 राफेल लड़ाकू विमान सौदे को मंजूरी दी है। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान सहयोग मजबूत होगा। इससे वायुसेना की 200-250 किमी दूर तक मारक क्षमता और रणनीतिक ताकत बढ़ेगी।

New Rafale deal will alter the balance of power, a major agreement will be reached during Macron visit
राफेल - फोटो : Amar Ujala, PTI
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विस्तार

आपरेशन सिन्दूर से सबक लेकर भारत ने आसमान में बादशाहत की इच्छा शक्ति दिखाई है। रक्षा खरीद परिषद ने 114 राफेल लड़ाकू विमान के सौदे को मंजूरी दे दी है। 17 फरवरी से फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों तीन दिन की भारत यात्रा पर आ रहे हैं। उनकी यात्रा के दौरान इस सौदे के जरिए भारत और फ्रांस आपसी सहयोग को नई ऊंचाई देंगे।

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फ्रांस के साथ यह रक्षा सौदा होने के बाद भारतीय वायुसेना के पास लड़ाकू विमान से 200-250 किमी दूर स्थित दुश्मन के ठिकाने को ध्वस्त करने की क्षमता आ जाएगी। मारक क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा। वायुसेना के पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि राफेल एक उन्नत लड़ाकू विमान है। खास बात यह है कि भारतीय वायुसेना और सरकार ने जरूरत को समझकर इस सौदे को खास बना दिया है।  

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क्यों खास है फ्रांस के साथ भारत का राफेल सौदा?

यूपीए की सरकार ने फ्रांस के लड़ाकू विमान राफेल के सौदे का जो फ्रेमवर्क बनाया था, मोदी सरकार उसी रास्ते पर राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ आगे बढ़ी है। इस सौदे के तहत फ्रांस से 18 विमान तैयार हालत (फ्लाई-वे) में लिए जाएंगे। जबकि शेष 96 विमानों को भारत में फ्रांस की कंपनी के सहयोग से तकनीकी हस्तांतरण के जरिए विकसित किया जाएगा। राफेल सुखोई-30 एमकेआई के बाद दूसरा लड़ाकू विमान होगा, जिसे देश में तकनीकी हस्तांतरण के मॉडल में विकसित किया जाएगा। इसके लिए देश में ही इसके रख-रखाव और मरम्मत को भी सुनिश्चित किया जाएगा। ‘मेक इन इंडिया’को रफ्तार देने के लिए भारत में ही बने कल-पुर्जों का 30 प्रतिशत तक इस्तेमाल किया जाएगा और समय के साथ इसे बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक करने की शर्त शामिल रहेगी। 

इस तरह से 3.25-3.60 लाख करोड़ रुपये (करीब 40 अरब डॉलर) के इस सौदे के बाद रक्षा क्षेत्र में देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर बनेंगे। एक तरह से यह अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा होगा। इस सौदे के बाद भारत का रूस, इस्राइल के अलावा फ्रांस के साथ रक्षा संबंध, तकनीकी आदान-प्रदान बढ़ेगा।  

बदल जाएगी रणक्षेत्र की तस्वीर

अभी भारतीय वायुसेना के पास 28-29 स्क्वाड्रान (एक स्क्वाड्रान में 16 फाइटर जेट और दो प्रशिक्षण विमान) हैं। जबकि आसन्न चुनौतियों को देखते हुए भारत के पास 42 स्क्वाड्रान से अधिक विमान होने चाहिए। भारत के सामरिक और रणनीतिक विशेषज्ञ कागरिगल संघर्ष के बाद से इस क्षमता को पा लेने का सपना देख रहे हैं। इस तरह से इस सौदे के बाद भारतीय वायुसेना में 4.5 पीढ़ी के 6 स्क्वाड्रान विमान और शामिल हो सकेंगे। यह सभी विमान एफ-4 स्टैंडर्ड के होंगे। इनमें उन्नत रडार, इलेक्ट्रानिक वारफेयर सिस्टम, अत्याधुनिक हथियार होंगे। नौसेना के लिए भी 26 राफेल प्रस्तावित हैं। जबकि वायुसेना के पास 36 राफेल पहले से हैं। इस तरह से वायुसेना के पास राफेल लड़ाकू विमानों की कुल संख्या 150 हो जाएगी। यह संख्या किसी भी देश का शक्ति संतुलन बिगाड़ने के लिए काफी है। यहां तक कि देश की सीमा के भीतर से पाकिस्तान के सभी बड़े टारगेट को ध्वस्त किया जा सकता है।

सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की मुहर लगनी बाकी

राष्ट्रपति मैक्रां 17-19 फरवरी की अधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। इससे पहले फ्रांस के साथ इस सौदे को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति(सीसीएस) की मुहर लगना आवश्यक है। इस सौदे में भारत की इच्छा अपने उन्नत उपकरणों, हथियारों के इंटीग्रेशन की भी है। माना जा रहा है कि फ्रांस के राष्ट्रपति की मौजूदगी में दोनों देश इस शर्त के साथ सौदे को अंतिम रूप दे देंगे। यह भारत सरकार और फ्रांस सरकार के बीच में जी-टू-जी के तहत अंतिम रूप लेंगे। विमानों के वैरिएंट की बात करें तो इसमें 88 सिंगल सीटर और 26 ट्विन सीटर(ट्रेनर) विमान शामिल होंगे। इस सौदे में फ्रांस की डसाल्ट एविएशन कंपनी विमानों के निर्माण में भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनी का सहयोग करेगी।

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