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Congress: 'पूर्व पीएम नेहरू ने SC जज से मांगी थी माफी', जयराम रमेश बोले- ऐसे थे असाधारण संस्थान निर्माता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 13 Feb 2026 03:41 PM IST
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सार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का एक पुराना पत्र साझा किया है। साल 1959 के इस पत्र में नेहरू ने सुप्रीम कोर्ट के जज विवियन बोस से अपनी एक गलत टिप्पणी के लिए माफी मांगी थी। रमेश ने नेहरू को लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करने वाला एक महान नेता बताया है।
जयराम रमेश
- फोटो : ANI
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विस्तार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जमकर तारीफ की। उन्होंने नेहरू को असाधारण संस्थान निर्माता बताया। रमेश ने याद दिलाया कि कैसे साल 1959 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने सुप्रीम कोर्ट के जज विवियन बोस को एक माफीनामा लिखा था।
जयराम रमेश ने साझा किया पत्र
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस पत्र को साझा किया। उन्होंने लिखा कि आजकल सरकार और न्यायपालिका के बीच के रिश्तों पर बहुत बातें होती हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नेहरू का 26 जून 1959 को जस्टिस विवियन बोस को लिखा गया यह पत्र बहुत महत्वपूर्ण है। रमेश के अनुसार, यह पत्र दिखाता है कि नेहरू संस्थाओं का कितना सम्मान करते थे।
पीएम नेहरू ने स्वीकार की थी गलती
जस्टिस बोस को लिखे अपने पत्र में पीएम नेहरू ने अपनी गलती स्वीकार की थी। उन्होंने लिखा था कि वे पिछले कई दिनों से लगातार यात्रा कर रहे हैं। उनका इरादा था कि वे प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही गई कुछ बातों के बारे में पहले ही पत्र लिखें, लेकिन व्यस्तता के कारण वे ऐसा नहीं कर सके।
ये भी पढ़ें: SBI Report: महंगाई के आंकड़ों पर सवाल; CPI के नए आधार वर्ष में चुनिंदा राज्यों का दबदबा, पेंच कहां जानें?
नेहरू ने कहा था, "कुछ दिन पहले जब मैं त्रिवेंद्रम में था, तो मुझे कलकत्ता बार लाइब्रेरी क्लब के ऑनरेरी सचिव का एक लेटर मिला, जिसके साथ उन्होंने कलकत्ता बार की एक मीटिंग में पास किया गया एक प्रस्ताव भेजा था, जिसमें मैंने आपके बारे में जो कुछ कहा था, जिसे गलत बताया गया था। जैसे ही मुझे यह लेटर मिला, मैंने कलकत्ता बार लाइब्रेरी क्लब के सेक्रेटरी को जवाब भेज दिया।"
निजी तौर पर मांगी थी माफी
इसके बाद नेहरू ने जस्टिस बोस से निजी तौर पर माफी मांगी। उन्होंने लिखा कि दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जो बातें कही थीं, उन पर उन्हें बहुत दुख है। नेहरू ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि उनकी वे बातें गलत थीं और उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था।
सफाई में पीएम ने क्या कहा था?
नेहरू ने अपनी सफाई में कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछे गए सवालों से वे काफी हैरान थे। उस समय उनके दिमाग में कई और बातें भी चल रही थीं, जिस वजह से उनसे गलती हुई। पत्र के अंत में नेहरू ने उम्मीद जताई कि जस्टिस बोस उनकी इस गलती को माफ कर देंगे।
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जयराम रमेश ने साझा किया पत्र
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस पत्र को साझा किया। उन्होंने लिखा कि आजकल सरकार और न्यायपालिका के बीच के रिश्तों पर बहुत बातें होती हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नेहरू का 26 जून 1959 को जस्टिस विवियन बोस को लिखा गया यह पत्र बहुत महत्वपूर्ण है। रमेश के अनुसार, यह पत्र दिखाता है कि नेहरू संस्थाओं का कितना सम्मान करते थे।
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पीएम नेहरू ने स्वीकार की थी गलती
जस्टिस बोस को लिखे अपने पत्र में पीएम नेहरू ने अपनी गलती स्वीकार की थी। उन्होंने लिखा था कि वे पिछले कई दिनों से लगातार यात्रा कर रहे हैं। उनका इरादा था कि वे प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही गई कुछ बातों के बारे में पहले ही पत्र लिखें, लेकिन व्यस्तता के कारण वे ऐसा नहीं कर सके।
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नेहरू ने कहा था, "कुछ दिन पहले जब मैं त्रिवेंद्रम में था, तो मुझे कलकत्ता बार लाइब्रेरी क्लब के ऑनरेरी सचिव का एक लेटर मिला, जिसके साथ उन्होंने कलकत्ता बार की एक मीटिंग में पास किया गया एक प्रस्ताव भेजा था, जिसमें मैंने आपके बारे में जो कुछ कहा था, जिसे गलत बताया गया था। जैसे ही मुझे यह लेटर मिला, मैंने कलकत्ता बार लाइब्रेरी क्लब के सेक्रेटरी को जवाब भेज दिया।"
निजी तौर पर मांगी थी माफी
इसके बाद नेहरू ने जस्टिस बोस से निजी तौर पर माफी मांगी। उन्होंने लिखा कि दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जो बातें कही थीं, उन पर उन्हें बहुत दुख है। नेहरू ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि उनकी वे बातें गलत थीं और उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था।
सफाई में पीएम ने क्या कहा था?
नेहरू ने अपनी सफाई में कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछे गए सवालों से वे काफी हैरान थे। उस समय उनके दिमाग में कई और बातें भी चल रही थीं, जिस वजह से उनसे गलती हुई। पत्र के अंत में नेहरू ने उम्मीद जताई कि जस्टिस बोस उनकी इस गलती को माफ कर देंगे।
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