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ED Probe: NSEL केस में 13000 निवेशकों को लगा ₹5600 करोड़ का चूना, ईडी ने ₹3452 करोड़ की संपत्तियां अटैच कीं

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Jyoti Bhaskar Updated Fri, 27 Mar 2026 03:26 PM IST
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NSEL Case ED Probe 13000 Investors Defrauded INR 5600 Crore Assets Worth 3452 Crore Attached know details
ED (सांकेतिक) - फोटो : Adobe Stock
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय ने नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) केस में बड़ी कार्रवाई की है। एनएसईएल, उसके निदेशकों, प्रमुख अधिकारियों और 25 डिफाल्टरों के खिलाफ आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत 19.12 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया गया है। इस केस में 13000 निवेशकों को लगभग 5600 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया है। ईडी ने इस मामले की जांच के दौरान अभी तक कुल 3452 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं।

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ईडी ने मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की है। पहले मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा इस केस की जांच कर रही थी। एनएसईएल, उसके निदेशकों, प्रमुख अधिकारियों और 25 डिफाल्टरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। ईडी की जांच में पता चला कि एनएसईएल और उसके डिफाल्टर सदस्यों ने वास्तविक स्टॉक के बिना कमोडिटी में व्यापार की अनुमति देकर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी में लिप्त होकर लगभग 13000 निवेशकों को लगभग 5600 करोड़ रुपये का चूना लगाया।
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एनएसईएल के तीन दोषी सदस्यों, मेसर्स लोइल ओवरसीज फूड्स लिमिटेड, मेसर्स लोइल कॉन्टिनेंटल फूड्स लिमिटेड और मेसर्स लोइल हेल्थ फूड्स लिमिटेड (सामूहिक रूप से लोइल समूह के रूप में संदर्भित), ने एनएसईएल प्लेटफॉर्म के माध्यम से धान की फर्जी बिक्री की। लेनदेन में धोखाधड़ी के जरिए भारी मात्रा में धन एकत्रित किया गया। एनएसईएल के प्रति मेसर्स लोइल समूह की कंपनियों की कुल देनदारी लगभग 720.30 करोड़ रुपये थी।

बैंक खातों की जांच से पता चला कि लोइल समूह की संस्थाओं के एनएसईएल निपटान खातों से लगभग 569.04 करोड़ रुपये की धनराशि का गबन किया गया था। गबन की गई धनराशि का एक बड़ा हिस्सा मेसर्स लक्ष्मी एनर्जी एंड फूड्स लिमिटेड सहित विभिन्न समूह संस्थाओं के माध्यम से बैंक ऋणों के पुनर्भुगतान, व्यावसायिक संचालन, कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं और अचल संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए उपयोग किया गया था। जांच के दौरान इस मामले में कुल 34 अंतरिम कुर्की आदेश जारी किए गए हैं, जिनमें लगभग 3452.16 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गई हैं। विशेष न्यायालय (पीएमएलए) के समक्ष 148 आरोपियों के खिलाफ सात अभियोग शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिन्होंने इन शिकायतों का संज्ञान लिया है।

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