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ओडिशा: एंटी-नक्सल ऑपरेशन में बड़ी कामयाबी, बोलनगीर और बरगढ़ जिले माओवादियों से मुक्त; कई ने किया आत्मसमर्पण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 02 Mar 2026 10:32 AM IST
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सार
ओडिशा के बोलनगीर और बरगढ़ जिले अब पूरी तरह नक्सल मुक्त हो गए हैं। 15 माओवादियों के सरेंडर के बाद डीजीपी ने यह घोषणा की। अब राज्य में कुल सात जिले नक्सल मुक्त हैं।
माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : ANI
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विस्तार
ओडिशा पुलिस ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। राज्य सरकार ने अब बोलनगीर और बरगढ़ जिलों को आधिकारिक तौर पर नक्सल मुक्त घोषित कर दिया है। इन दोनों जिलों में सक्रिय 15 माओवादियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इन माओवादियों ने पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में अपने हथियार डाले। इस खास मौके पर ओडिशा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी वहां मौजूद थे।
डीजीपी ने दी जानकारी
ओडिशा के डीजीपी वाई बी खुरानिया ने रविवार को एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों ने राज्य भर में लगातार अभियान चलाए हैं। इसी मेहनत का नतीजा है कि आज यह अहम मुकाम हासिल हुआ है। अब ओडिशा में नक्सल मुक्त जिलों की कुल संख्या बढ़कर सात हो गई है। इन सुरक्षित जिलों की सूची में नुआपाड़ा, नबरंगपुर, कोरापुट, मलकानगिरी, बौध, बोलनगीर और बरगढ़ के नाम शामिल हैं।
हालांकि, राज्य के तीन जिलों में अब भी माओवादियों की मौजूदगी बनी हुई है। ये जिले कंधमाल, रायगढ़ा और कालाहांडी हैं। डीजीपी ने बताया कि सरेंडर करने वाले कैडर बरगढ़, बोलांगीर और महासमुंद के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय थे। इस बदलाव के बाद अब प्रसिद्ध गंधमर्दन पहाड़ियों वाले इलाके में भी शांति बहाल हो गई है।
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पुलिस बल की जमकर तारीफ की
डीजीपी खुरानिया ने इस सफलता का श्रेय कई महत्वपूर्ण कड़ियों को दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों के साझा ऑपरेशन, सटीक खुफिया जानकारी और स्थानीय लोगों के सहयोग से यह मुमकिन हुआ है। उन्होंने पुलिस बल की हिम्मत और पक्के इरादे की जमकर तारीफ की। डीजीपी ने ऑपरेशन में शामिल सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। साथ ही उन्होंने पुलिस पर भरोसा जताने के लिए जनता का शुक्रिया अदा किया।
जारी रहेगा अभियान
राज्य में नक्सल समस्या को पूरी तरह खत्म करने के लिए अभियान जारी रहेंगे। अधिकारियों के अनुसार, अब राज्य में केवल 25 के करीब माओवादी ही बचे हैं। इनमें से ज्यादातर कंधमाल जिले में सक्रिय हैं। एडीजी संजीव पांडा ने बताया कि कंधमाल के जंगलों में एक बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है। पुलिस को वहां मोस्ट वांटेड माओवादी नेता सुकरू के छिपे होने की खबर मिली है। यह तलाशी अभियान दारिंगबाड़ी और रायकिया पुलिस स्टेशन के इलाकों में चल रहा है।
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डीजीपी ने दी जानकारी
ओडिशा के डीजीपी वाई बी खुरानिया ने रविवार को एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों ने राज्य भर में लगातार अभियान चलाए हैं। इसी मेहनत का नतीजा है कि आज यह अहम मुकाम हासिल हुआ है। अब ओडिशा में नक्सल मुक्त जिलों की कुल संख्या बढ़कर सात हो गई है। इन सुरक्षित जिलों की सूची में नुआपाड़ा, नबरंगपुर, कोरापुट, मलकानगिरी, बौध, बोलनगीर और बरगढ़ के नाम शामिल हैं।
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हालांकि, राज्य के तीन जिलों में अब भी माओवादियों की मौजूदगी बनी हुई है। ये जिले कंधमाल, रायगढ़ा और कालाहांडी हैं। डीजीपी ने बताया कि सरेंडर करने वाले कैडर बरगढ़, बोलांगीर और महासमुंद के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय थे। इस बदलाव के बाद अब प्रसिद्ध गंधमर्दन पहाड़ियों वाले इलाके में भी शांति बहाल हो गई है।
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पुलिस बल की जमकर तारीफ की
डीजीपी खुरानिया ने इस सफलता का श्रेय कई महत्वपूर्ण कड़ियों को दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों के साझा ऑपरेशन, सटीक खुफिया जानकारी और स्थानीय लोगों के सहयोग से यह मुमकिन हुआ है। उन्होंने पुलिस बल की हिम्मत और पक्के इरादे की जमकर तारीफ की। डीजीपी ने ऑपरेशन में शामिल सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। साथ ही उन्होंने पुलिस पर भरोसा जताने के लिए जनता का शुक्रिया अदा किया।
जारी रहेगा अभियान
राज्य में नक्सल समस्या को पूरी तरह खत्म करने के लिए अभियान जारी रहेंगे। अधिकारियों के अनुसार, अब राज्य में केवल 25 के करीब माओवादी ही बचे हैं। इनमें से ज्यादातर कंधमाल जिले में सक्रिय हैं। एडीजी संजीव पांडा ने बताया कि कंधमाल के जंगलों में एक बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है। पुलिस को वहां मोस्ट वांटेड माओवादी नेता सुकरू के छिपे होने की खबर मिली है। यह तलाशी अभियान दारिंगबाड़ी और रायकिया पुलिस स्टेशन के इलाकों में चल रहा है।
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