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ओडिशा दरोगा पेपर लीक: भर्ती बोर्ड के अधिकारियों पर भी ईडी की नजर, करोड़ों की अवैध कमाई का पता लगा रही एजेंसी
Sun, 18 Oct 2026 05:29 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Sun, 18 Oct 2026 05:29 PM IST
सार
ओडिशा एसआई भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में ईडी अब भर्ती बोर्ड के कुछ अधिकारियों और निजी कंपनियों की भूमिका की जांच कर रही है। इसके साथ ही कथित अवैध कमाई व उससे बनाई गई संपत्तियों का पता लगा रही है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
ओडिशा पुलिस की सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में अब ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड (ओपीआरबी) के कुछ अधिकारी भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के घेरे में आ गए हैं। अब तक इन अधिकारियों और कुछ निजी कंपनियों की भूमिका की जांच नहीं हो रही थी। अधिकारियों के मुताबिक, ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक के जरिए कितने पैसे कमाए गए और इस रकम का इस्तेमाल कहां किया गया।
उम्मीदवारों से नकद वसूली की आशंका
जांच एजेंसी को शक है कि परीक्षा का पेपर दिलाने के नाम पर उम्मीदवारों से मोटी रकम नकद में ली गई थी। इस पैसे से अवैध संपत्तियां बनाई गई होंगी। ईडी अब इस कमाई का पूरा हिसाब जुटा रही है। अगर जांच में अवैध संपत्ति की पुष्टि होती है, तो उसे धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जब्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।
ओडिशा और बंगाल में कई जगह छापेमारी
पिछले हफ्ते ईडी ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में एक दर्जन से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड (एसटीपीएल), पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और पीएसआईएल इंटरनेशनल लिमिटेड से जुड़े ठिकाने भी शामिल थे। ये कंपनियां परीक्षा कराने की प्रक्रिया से जुड़ी हुई थीं।
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खंगाली जा रही भर्ती बोर्ड के अधिकारियों की भूमिका
ईडी के मुताबिक, छापेमारी के दौरान मिले नए सबूतों और जानकारियों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। एजेंसी अब यह भी पता लगा रही है कि भर्ती बोर्ड से जुड़े कुछ लोगों की इस पूरे मामले में क्या भूमिका थी। 14 अक्टूबर को जारी बयान में ईडी ने कहा था कि जांच के दौरान कुछ ऐसी कंपनियों और संस्थाओं के नाम सामने आए हैं, जिनकी भूमिका पहले जांच एजेंसियों की नजर में नहीं थी।
पेपर लीक के पीछे सुनियोजित साजिश का शक
ईडी का कहना है कि अब तक की जांच और छापेमारी में मिले सबूतों से पता चलता है कि प्रश्नपत्र लीक करने का काम किसी अचानक हुई गड़बड़ी का नतीजा नहीं था, बल्कि इसके पीछे पूरी योजना थी। आरोप है कि उम्मीदवारों से नकद पैसे लेकर उन्हें परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र से जुड़ी जानकारी देने का भरोसा दिलाया गया। इस तरह बड़ी रकम जुटाई गई।
आईटीआई लिमिटेड ने एसटीपीएल को सौंपा था परीक्षा का काम
जांच में सामने आया कि ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड ने परीक्षा कराने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम आईटीआई लिमिटेड को दी थी। इसके बाद आईटीआई लिमिटेड ने यह काम भुवनेश्वर की कंपनी सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड (एसटीपीएल) को सौंप दिया था।
बिना अनुमति पंचसॉफ्ट को दिया गया संवेदनशील डेटा
ईडी के मुताबिक, एसटीपीएल के निदेशक एससी नायक ने आईटीआई लिमिटेड की लिखित मंजूरी लिए बिना उम्मीदवारों की संवेदनशील जानकारी संभालने का काम पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज को दे दिया था। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि उम्मीदवारों के आंकड़ों तक किसकी पहुंच थी और उनका इस्तेमाल किस तरह किया गया।
उम्मीदवारों को पैसे लेकर पेपर दिलाने का लालच
ईडी ने आरोप लगाया है कि सिलिकॉन टेकलैब और पंचसॉफ्ट के निदेशक शंकर प्रुस्टी से जुड़े लोगों ने उम्मीदवारों से संपर्क किया था। इन लोगों ने कथित तौर पर पैसे के बदले परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र की जानकारी देने का लालच दिया और उम्मीदवारों को अपने संपर्क में लिया। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
पीएसआईएल इंटरनेशनल ने एसटीपीएल में ली हिस्सेदारी
ईडी का दावा है कि पीएसआईएल इंटरनेशनल लिमिटेड ने एसटीपीएल की नियंत्रण हिस्सेदारी और बहुमत शेयर अपने कब्जे में ले लिए थे। आरोप है कि इस बदलाव की जानकारी आईटीआई लिमिटेड को नहीं दी गई। इसके बावजूद एससी नायक एसटीपीएल के निदेशक बने रहे और उन्होंने कथित तौर पर बिना अधिकार के परीक्षा के प्रश्नपत्रों तक पहुंच बनाई।
सितंबर 2025 की एफआईआर से जुड़ा है ईडी का मामला
ईडी ने इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जो मामला दर्ज किया है, वह ओडिशा पुलिस की सितंबर 2025 में दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) से जुड़ा है। पुलिस ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा की सीमा के पास इच्छापुरम के नजदीक तीन बसों को रोका था। इन बसों में एसआई भर्ती परीक्षा के 114 उम्मीदवार सवार थे।
15 से 30 लाख रुपये में पेपर दिलाने का आरोप
आरोप है कि उम्मीदवारों से कहा गया था कि अगर वे 15 लाख से 30 लाख रुपये तक नकद देते हैं, तो उन्हें परीक्षा का लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिया जाएगा। यह परीक्षा 5 और 6 अक्टूबर 2024 को होनी थी। इसी मामले में अब ईडी पैसे के लेन-देन, कथित कमाई और उससे बनाई गई संपत्तियों का पता लगा रही है।
ये भी पढ़ें: गोवा: 'गोंय राखण यात्रा' में राहुल गांधी शामिल, कार्यकर्ताओं के साथ किया पैदल मार्च; कुछ देर में करेंगे जनसभा
सीबीआई ने भी की थी जांच, पहले भी रद्द हो चुकी थी परीक्षा
इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) भी कर चुका है। ईडी के मुताबिक, सीबीआई ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। उसमें बताया गया था कि मार्च 2025 में जब परीक्षा पहली बार आयोजित की जानी थी, तब कई तरह की अनियमितताएं सामने आई थीं। इसके बाद ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड ने परीक्षा रद्द कर दी थी। अब ईडी की जांच का मुख्य जोर कथित पेपर लीक से हुई कमाई और इसमें शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाने पर है।
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उम्मीदवारों से नकद वसूली की आशंका
जांच एजेंसी को शक है कि परीक्षा का पेपर दिलाने के नाम पर उम्मीदवारों से मोटी रकम नकद में ली गई थी। इस पैसे से अवैध संपत्तियां बनाई गई होंगी। ईडी अब इस कमाई का पूरा हिसाब जुटा रही है। अगर जांच में अवैध संपत्ति की पुष्टि होती है, तो उसे धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जब्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।
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ओडिशा और बंगाल में कई जगह छापेमारी
पिछले हफ्ते ईडी ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में एक दर्जन से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड (एसटीपीएल), पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और पीएसआईएल इंटरनेशनल लिमिटेड से जुड़े ठिकाने भी शामिल थे। ये कंपनियां परीक्षा कराने की प्रक्रिया से जुड़ी हुई थीं।
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खंगाली जा रही भर्ती बोर्ड के अधिकारियों की भूमिका
ईडी के मुताबिक, छापेमारी के दौरान मिले नए सबूतों और जानकारियों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। एजेंसी अब यह भी पता लगा रही है कि भर्ती बोर्ड से जुड़े कुछ लोगों की इस पूरे मामले में क्या भूमिका थी। 14 अक्टूबर को जारी बयान में ईडी ने कहा था कि जांच के दौरान कुछ ऐसी कंपनियों और संस्थाओं के नाम सामने आए हैं, जिनकी भूमिका पहले जांच एजेंसियों की नजर में नहीं थी।
पेपर लीक के पीछे सुनियोजित साजिश का शक
ईडी का कहना है कि अब तक की जांच और छापेमारी में मिले सबूतों से पता चलता है कि प्रश्नपत्र लीक करने का काम किसी अचानक हुई गड़बड़ी का नतीजा नहीं था, बल्कि इसके पीछे पूरी योजना थी। आरोप है कि उम्मीदवारों से नकद पैसे लेकर उन्हें परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र से जुड़ी जानकारी देने का भरोसा दिलाया गया। इस तरह बड़ी रकम जुटाई गई।
आईटीआई लिमिटेड ने एसटीपीएल को सौंपा था परीक्षा का काम
जांच में सामने आया कि ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड ने परीक्षा कराने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम आईटीआई लिमिटेड को दी थी। इसके बाद आईटीआई लिमिटेड ने यह काम भुवनेश्वर की कंपनी सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड (एसटीपीएल) को सौंप दिया था।
बिना अनुमति पंचसॉफ्ट को दिया गया संवेदनशील डेटा
ईडी के मुताबिक, एसटीपीएल के निदेशक एससी नायक ने आईटीआई लिमिटेड की लिखित मंजूरी लिए बिना उम्मीदवारों की संवेदनशील जानकारी संभालने का काम पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज को दे दिया था। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि उम्मीदवारों के आंकड़ों तक किसकी पहुंच थी और उनका इस्तेमाल किस तरह किया गया।
उम्मीदवारों को पैसे लेकर पेपर दिलाने का लालच
ईडी ने आरोप लगाया है कि सिलिकॉन टेकलैब और पंचसॉफ्ट के निदेशक शंकर प्रुस्टी से जुड़े लोगों ने उम्मीदवारों से संपर्क किया था। इन लोगों ने कथित तौर पर पैसे के बदले परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र की जानकारी देने का लालच दिया और उम्मीदवारों को अपने संपर्क में लिया। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
पीएसआईएल इंटरनेशनल ने एसटीपीएल में ली हिस्सेदारी
ईडी का दावा है कि पीएसआईएल इंटरनेशनल लिमिटेड ने एसटीपीएल की नियंत्रण हिस्सेदारी और बहुमत शेयर अपने कब्जे में ले लिए थे। आरोप है कि इस बदलाव की जानकारी आईटीआई लिमिटेड को नहीं दी गई। इसके बावजूद एससी नायक एसटीपीएल के निदेशक बने रहे और उन्होंने कथित तौर पर बिना अधिकार के परीक्षा के प्रश्नपत्रों तक पहुंच बनाई।
सितंबर 2025 की एफआईआर से जुड़ा है ईडी का मामला
ईडी ने इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जो मामला दर्ज किया है, वह ओडिशा पुलिस की सितंबर 2025 में दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) से जुड़ा है। पुलिस ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा की सीमा के पास इच्छापुरम के नजदीक तीन बसों को रोका था। इन बसों में एसआई भर्ती परीक्षा के 114 उम्मीदवार सवार थे।
15 से 30 लाख रुपये में पेपर दिलाने का आरोप
आरोप है कि उम्मीदवारों से कहा गया था कि अगर वे 15 लाख से 30 लाख रुपये तक नकद देते हैं, तो उन्हें परीक्षा का लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिया जाएगा। यह परीक्षा 5 और 6 अक्टूबर 2024 को होनी थी। इसी मामले में अब ईडी पैसे के लेन-देन, कथित कमाई और उससे बनाई गई संपत्तियों का पता लगा रही है।
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सीबीआई ने भी की थी जांच, पहले भी रद्द हो चुकी थी परीक्षा
इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) भी कर चुका है। ईडी के मुताबिक, सीबीआई ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। उसमें बताया गया था कि मार्च 2025 में जब परीक्षा पहली बार आयोजित की जानी थी, तब कई तरह की अनियमितताएं सामने आई थीं। इसके बाद ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड ने परीक्षा रद्द कर दी थी। अब ईडी की जांच का मुख्य जोर कथित पेपर लीक से हुई कमाई और इसमें शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाने पर है।