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केरल: मुआवजे के भुगतान में देरी रोकने के लिए हाईकोर्ट सख्त, सरकार को पांच सप्ताह में भुगतान जारी करने का आदेश

Sun, 18 Oct 2026 05:46 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 18 Oct 2026 05:46 PM IST
सार

केरल हाईकोर्ट ने 225 मामलों में लंबित 9.73 करोड़ रुपये से अधिक का पीड़ित मुआवजा पांच सप्ताह में जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने भविष्य में भुगतान में देरी रोकने और दस्तावेज समय पर जुटाने को कहा। मध्यस्थों के मानदेय की दरों पर भी दोबारा विचार होगा। लेकिन मुआवजे की निगरानी कौन करेगा? क्या सरकार तय समय में राशि जारी करेगी? और दो दिसंबर को अदालत को क्या रिपोर्ट सौंपी जाएगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Kerala High Court Orders Government to Release Pending Victim Compensation Within Five Weeks
केरल हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

केरल हाईकोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को 225 मामलों में लंबित 9.73 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि पांच सप्ताह के भीतर जारी करने का निर्देश दिया है। ये मामले जुलाई 2026 तक के हैं और इनकी राशि 16 सितंबर 2026 से गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पास लंबित है। अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में पीड़ितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया में देरी नहीं होनी चाहिए।

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मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति स्याम कुमार वीएम की पीठ ने यह आदेश दिया। अदालत ने केरल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (केएलएसए) के सदस्य सचिव को निर्देश दिया कि वह संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के साथ मिलकर मुआवजा बांटने की स्थिति की नियमित समीक्षा करें। पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को लंबित राशि जल्द जारी करनी होगी, और इसके लिए पांच सप्ताह की समयसीमा तय की गई है।
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अदालत ने मुआवजा समय पर देने के लिए क्या निर्देश दिए?
अदालत ने केएलएसए के सदस्य सचिव को निर्देश दिया कि वह संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सचिवों को जरूरी आदेश जारी करें, ताकि भविष्य में मुआवजे की प्रक्रिया और भुगतान में देरी न हो। पीठ ने कहा कि पीड़ितों के मामलों पर सुनवाई के दौरान ही उनसे सभी जरूरी दस्तावेज जुटा लिए जाएं। इससे बाद में कागजी कार्रवाई के कारण भुगतान अटकने की आशंका कम होगी। अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को भी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि आदेश का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
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9.73 करोड़ रुपये का भुगतान कब तक करना होगा?
अदालत के मुताबिक, जुलाई 2026 तक के 225 मामलों में 9.73 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा लंबित है। यह राशि 16 सितंबर 2026 से गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पास लंबित बताई गई थी। पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह यह राशि प्राथमिकता के आधार पर पांच सप्ताह के भीतर जारी करे। अदालत ने कहा कि मुआवजा पाने वाले पीड़ितों को भुगतान के लिए अनावश्यक इंतजार नहीं करना चाहिए। इस मामले में केएलएसए के सदस्य सचिव को हर सप्ताह संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों से भुगतान की स्थिति की समीक्षा करनी होगी।

मध्यस्थों के मानदेय पर अदालत ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने मध्यस्थों को दिए जाने वाले मानदेय का मुद्दा भी उठाया। केएलएसए ने अदालत को बताया कि 30 सितंबर को तय की गई संशोधित दरें वर्ष 2022 में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की ओर से सुझाई गई दरों से कम हैं। इस पर अदालत ने मानदेय की दरों पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया। फिलहाल मध्यस्थों को संशोधित दरों के हिसाब से मानदेय जारी किया जाना है। केएलएसए के सदस्य सचिव को वित्त विभाग के सचिव के सामने अंतर की राशि का ब्योरा प्रस्तुत करना होगा, ताकि बकाया अंतर का भुगतान जल्द किया जा सके।


अदालत में अगली सुनवाई कब होगी और तब तक क्या करना होगा?
अदालत ने केएलएसए के सदस्य सचिव को निर्देश दिया कि वह मध्यस्थों के मानदेय और पीड़ितों के मुआवजे के भुगतान की स्थिति पर हलफनामा दाखिल करें। वित्त विभाग को संशोधित दरों के अनुसार देय अंतर की राशि जल्द जारी करने को कहा गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सचिवों को भी जरूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। अदालत ने केएलएसए को हर सप्ताह भुगतान की समीक्षा करने और दो दिसंबर को अगली सुनवाई के दिन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। पीठ ने राज्यभर के मध्यस्थता केंद्रों में उचित बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भी निर्देश जारी किए।

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