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पांच राज्यों में चुनावी घोषणा से पहले विपक्ष करेगा खेल?: सीईसी के खिलाफ बन रही यह योजना; TMC ने भी भरी हामी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 09 Mar 2026 06:26 PM IST
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सार
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्षी दल संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इसका ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। इस कदम को टीएमसी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का समर्थन मिल सकता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
विपक्षी पार्टियां मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इसे इसी हफ्ते जमा किया जा सकता है। यह पहली बार है जब विपक्षी दल एकजुट होकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ऐसा कड़ा कदम उठा रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक वरिष्ठ सांसद ने बताया कि यह पूरी तरह से विपक्षी दलों की एकजुटता का नतीजा है। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट तैयार करने और इसकी योजना बनाने में सभी समान विचारधारा वाली पार्टियों ने मिलकर काम किया है। संसद के दोनों सदनों में इस योजना को लागू करने के लिए भी सभी दल साथ मिलकर काम करेंगे। टीएमसी नेता ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने गरिमामय पद का अपमान किया है। कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक की अन्य पार्टियों ने भी इस नोटिस का समर्थन करने की बात कही है।
ये भी पढ़ें: West Bengal: बंगाल में मतदाता सूची पर घमासान, कूच बिहार में मंत्री ने शुरू की भूख हड़ताल; लगाए गंभीर आरोप
अब विपक्षी सांसद दोनों सदनों के सदस्यों के हस्ताक्षर इकट्ठा करेंगे। नियमों के अनुसार, इस तरह के नोटिस के लिए लोकसभा के कम से कम 100 सांसदों या राज्यसभा के कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर होना जरूरी है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज को हटाने जैसी ही होती है। उन्हें केवल साबित हुए गलत व्यवहार या काम करने में अक्षमता के आधार पर ही हटाया जा सकता है।
यह प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। इसे पास करने के लिए विशेष बहुमत की जरूरत होती है। इसका मतलब है कि सदन के कुल सदस्यों का बहुमत और मौजूद रहकर वोट देने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत इस प्रस्ताव के पक्ष में होना चाहिए। कानून के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिन पर सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस विचार का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि अगर विपक्ष ऐसा प्रस्ताव लाता है, तो वे इसके साथ हैं। ममता बनर्जी फिलहाल बंगाल में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (एसआईआर) के दौरान नाम हटाए जाने के विरोध में धरने पर बैठी हैं।
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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक वरिष्ठ सांसद ने बताया कि यह पूरी तरह से विपक्षी दलों की एकजुटता का नतीजा है। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट तैयार करने और इसकी योजना बनाने में सभी समान विचारधारा वाली पार्टियों ने मिलकर काम किया है। संसद के दोनों सदनों में इस योजना को लागू करने के लिए भी सभी दल साथ मिलकर काम करेंगे। टीएमसी नेता ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने गरिमामय पद का अपमान किया है। कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक की अन्य पार्टियों ने भी इस नोटिस का समर्थन करने की बात कही है।
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यह प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। इसे पास करने के लिए विशेष बहुमत की जरूरत होती है। इसका मतलब है कि सदन के कुल सदस्यों का बहुमत और मौजूद रहकर वोट देने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत इस प्रस्ताव के पक्ष में होना चाहिए। कानून के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिन पर सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस विचार का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि अगर विपक्ष ऐसा प्रस्ताव लाता है, तो वे इसके साथ हैं। ममता बनर्जी फिलहाल बंगाल में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (एसआईआर) के दौरान नाम हटाए जाने के विरोध में धरने पर बैठी हैं।
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