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कर्नाटक में खींचतान: दिल्ली जाएंगे 20 MLA, सियासी चौसर पर रंगमंच सा मंजर? कैबिनेट में फेरबदल के कयास फिर तेज!

आईएनएस, Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Sat, 11 Apr 2026 06:13 PM IST
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सार

कर्नाटक में कैबिनेट फेरबदल की अटकलों के बीच कांग्रेस के 20 से ज्यादा वरिष्ठ विधायक दिल्ली जा रहे हैं। वे हाईकमान से मिलकर मंत्री पद की दावेदारी पेश करेंगे। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच खींचतान की चर्चा भी तेज है।

Over 20 senior Karnataka MLAs to visit Delhi to meet high command amid reshuffle buzz
कर्नाटक की सियासत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। राज्य में कैबिनेट फेरबदल की चर्चा के बीच सत्तारूढ़ कांग्रेस के 20 से ज्यादा वरिष्ठ विधायक दिल्ली जाने की तैयारी में हैं। यह दौरा इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि सरकार के तीन साल पूरे हो चुके हैं और अब मंत्री पद को लेकर अंदरखाने हलचल बढ़ गई है।
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जानकारी के मुताबिक ये विधायक कांग्रेस हाईकमान से मिलकर अपनी दावेदारी पेश करेंगे। इन विधायकों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक पार्टी के लिए काम किया है और अब उन्हें मौका मिलना चाहिए। यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर खींचतान की चर्चा भी चल रही है।
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क्या कैबिनेट फेरबदल से बढ़ सकती है अंदरूनी खींचतान?
सूत्रों के अनुसार संभावित फेरबदल को लेकर दोनों नेताओं ने अपने-अपने समर्थकों की सूची तैयार कर ली है। वहीं पार्टी हाईकमान की भी अलग सूची बताई जा रही है। ऐसे में यह फेरबदल अंदरूनी टकराव का कारण बन सकता है।

क्या वरिष्ठ विधायकों ने खुलकर रखी अपनी मांग? 
वरिष्ठ नेता टी बी जयचंद्र ने कहा कि तीन से पांच बार चुने गए विधायक एकजुट होकर दिल्ली जा रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि यह मांग किसी असंतोष के कारण नहीं बल्कि अवसर की उम्मीद में की जा रही है।

क्या 2028 चुनाव को ध्यान में रखकर हो रही तैयारी?
जयचंद्र ने कहा कि 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं की उम्मीदों को पूरा करना जरूरी है। इसलिए संगठन और सरकार में संतुलन बनाना जरूरी है, जिससे पार्टी को मजबूती मिले।

क्या हाईकमान के पास होगा अंतिम फैसला?
उन्होंने कहा कि कैबिनेट में किसे शामिल करना है और किसे बाहर करना है, इसका अंतिम फैसला हाईकमान ही करेगा। इसमें जातीय संतुलन और सामाजिक न्याय जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। फिलहाल सभी की नजर दिल्ली में होने वाली बैठक पर है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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