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व्यभिचार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ओवैसी ने तीन तलाक कानून को बताया फ्रॉड

Thu, 27 Sep 2018 01:35 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 27 Sep 2018 01:35 PM IST
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Owaisi attacks on Modi Government After supreme court verdict on Adultery law
असदुद्दीन ओवैसी

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने फैसले में व्यभिचार से संबंधित दंडात्मक प्रावधान को असंवैधानिक घोषित करते हुए कहा कि यह स्पष्ट रूप से मनमाना है और महिला की वैयक्तिकता को ठेस पहुंचाता है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से व्यभिचार से संबंधित 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को असंवैधानिक करार देते हुए इस दंडात्मक प्रावधान को निरस्त कर दिया।


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इस फैसले के बाद एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक अध्यादेश को वापस लिया जाना चाहिए क्योंकि यह एक तरह का फ्रॉड है। उन्होंने कहा कि अध्यादेश के पहले पन्ने पर सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट कहती है कि तीन तलाक असंवैधानिक है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कुछ कहा ही नहीं है।
 
ओवैसी ने एक ट्वीट भी किया है। उसमें उन्होंने तीन तलाक अध्यादेश को वापस लेने की मांग की है। ओवैसी ने ट्वीट में कहा, 'क्या मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सबक लेते हुए तीन तलाक पर अपने असंवैधानिक अध्यादेश को वापस लेगी?' उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, 'सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक नहीं कहा, जबकि शीर्ष कोर्ट ने 377 और 497 को असंवैधानिक करार दिया। क्या मोदी सरकार इन फैसलों से सीखेगी और तीन तलाक पर अपने असंवैधानिक अध्यादेश को वापस लेगी।' उन्होंने तीन तलाक अध्यादेश को कोर्ट में चुनौती देने की बात भी कही और उसे एक तरह का फ्रॉड बताया।

377 और 497 के फैसले को आधार बनाकर सरकार पर साधा निशाना

इससे पहले 6 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए धारा 377 को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। इसके बाद आज यानि गुरुवार को भी सुप्रीम कोर्ट ने 158 साल पुराने व्यभिचार कानून में भी ऐसिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस धारा को असंवैधानिक करार घोषित कर दिया है। अोवैसी ने इन्हीं दो फैसलों को आधार बनाकर सरकार पर निशाना साधा।

गौरतलब है कि हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने एक बार में तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने के अध्यादेश को मंजूरी दी थी। जिस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी मुहर लगा दी है। अब सरकार को 6 महीने में इस बिल को पास कराना होगा।

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