व्यभिचार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ओवैसी ने तीन तलाक कानून को बताया फ्रॉड
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने फैसले में व्यभिचार से संबंधित दंडात्मक प्रावधान को असंवैधानिक घोषित करते हुए कहा कि यह स्पष्ट रूप से मनमाना है और महिला की वैयक्तिकता को ठेस पहुंचाता है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से व्यभिचार से संबंधित 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को असंवैधानिक करार देते हुए इस दंडात्मक प्रावधान को निरस्त कर दिया।
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इस फैसले के बाद एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक अध्यादेश को वापस लिया जाना चाहिए क्योंकि यह एक तरह का फ्रॉड है। उन्होंने कहा कि अध्यादेश के पहले पन्ने पर सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट कहती है कि तीन तलाक असंवैधानिक है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कुछ कहा ही नहीं है।
My opinion is that Triple Talaq ordinance should be challenged in Court because it's a fraud. In first page of the ordinance,govt says that Supreme Court has termed it unconstitutional but SC didn't say any such thing rather it had just set it aside: Asaduddin Owaisi pic.twitter.com/d5xNY9CAkq
— ANI (@ANI) September 27, 2018
ओवैसी ने एक ट्वीट भी किया है। उसमें उन्होंने तीन तलाक अध्यादेश को वापस लेने की मांग की है। ओवैसी ने ट्वीट में कहा, 'क्या मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सबक लेते हुए तीन तलाक पर अपने असंवैधानिक अध्यादेश को वापस लेगी?' उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, 'सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक नहीं कहा, जबकि शीर्ष कोर्ट ने 377 और 497 को असंवैधानिक करार दिया। क्या मोदी सरकार इन फैसलों से सीखेगी और तीन तलाक पर अपने असंवैधानिक अध्यादेश को वापस लेगी।' उन्होंने तीन तलाक अध्यादेश को कोर्ट में चुनौती देने की बात भी कही और उसे एक तरह का फ्रॉड बताया।
377 और 497 के फैसले को आधार बनाकर सरकार पर साधा निशाना
इससे पहले 6 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए धारा 377 को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। इसके बाद आज यानि गुरुवार को भी सुप्रीम कोर्ट ने 158 साल पुराने व्यभिचार कानून में भी ऐसिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस धारा को असंवैधानिक करार घोषित कर दिया है। अोवैसी ने इन्हीं दो फैसलों को आधार बनाकर सरकार पर निशाना साधा।
गौरतलब है कि हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने एक बार में तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने के अध्यादेश को मंजूरी दी थी। जिस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी मुहर लगा दी है। अब सरकार को 6 महीने में इस बिल को पास कराना होगा।