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Padma Awards 2026: 39000 नामांकनों में से चुने असली नायक, 10 जिलों को स्वतंत्रता के बाद पहली बार पुरस्कार

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 26 Jan 2026 07:43 AM IST
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सार

साल 2026 के पद्म पुरस्कारों में देश के हर कोने के असली नायकों को सम्मानित किया गया। स्वतंत्रता के बाद पहली बार 10 जिलों को पद्म पुरस्कार मिला, जिसमें वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता और आम लोग शामिल हैं।

Padma Awards 2026: Heroes Selected from 39000 Nominations, 10 Districts Honored First Time Since Independence
पद्म पुरस्कार - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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साल 2026 के पद्म पुरस्कारों के चयन के लिए मोदी सरकार ने भारत के हर कोने से सार्वजनिक क्षेत्र में वास्तविक उपलब्धि हासिल करने वालों की पहचान करने और उन्हें चुनने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इन पुरस्कारों के लिए 39,000 से अधिक नामांकन प्राप्त हुए और उनका मूल्यांकन कई चरणों की गहन, कठोर और वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से किया गया, जिसमें मंत्रालय, राज्य और जिला प्रशासनों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ व्यापक परामर्श शामिल था। पुरस्कार विजेता भारत के हर कोने से हैं, जिनमें 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 84 जिले शामिल हैं। इनमें मांड्या, बेतूल, परभणी, बागेश्वर, रंगारेड्डी, दक्षिण दिनाजपुर समेत 10 जिले ऐसे हैं जिन्हें स्वतंत्रता के बाद पहली बार पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

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पद्म पुरस्कार केवल बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत के दूर-दूरा के क्षेत्र तक फैले हुए हैं। इनमें अलाप्पुझा, भोजपुर, कछार, दार्जिलिंग, गोलपारा, इम्फाल, जूनागढ़, कृष्णा, मोकोकचुंग, नुआपड़ा, पूर्वी बर्धमान, श्री गंगानगर आदि शामिल हैं। उपलब्धि हासिल करने वाले और योगदान देने वाले लोग समाज के सभी वर्गों से आते हैं। इनमें 48 बेहद वरिष्ठ नागरिक (80 वर्ष और उससे अधिक आयु के) और दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित पृष्ठभूमि के हैं। यह सबका साथ, सबका विकास के सिद्धांत का साकार उदाहरण है। पद्म पुरस्कार की यह सूची गुमनाम नायकों की पहचान करने की सरकार की उस पहल को आगे बढ़ाती है जिसे काफी सराहना मिली है। इनमें से प्रत्येक पुरस्कार विजेता एक प्रेरणादायक कहानी है, जो बेहद साधारण पृष्ठभूमि से उठकर और व्यक्तिगत त्रासदियों और कठिनाइयों का सामना करते हुए न केवल अपने चुने हुए क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं, बल्कि समाज की व्यापक सेवा में भी योगदान देते हैं। कम्युनिस्ट दिग्गज वीएस अच्युतानंदन को पद्म विभूषण और आदिवासी नेता शिबू सोरेन को पद्म भूषण से सम्मानित कर मोदी सरकार ने सभी दलों के नेतृत्व को मान्यता देने के अपने दृष्टिकोण को जारी रखा है।
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अष्टलक्ष्मी राज्यों को अभूतपूर्व मान्यता
स्वतंत्रता के बाद से उत्तर-पूर्वी राज्यों को मिले सभी पद्म पुरस्कारों में से 40 फीसदी से अधिक पुरस्कार मोदी सरकार के कार्यकाल के पिछले 12 वर्षों में ही मिले हैं। इसी तरह आम लोगों की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले डॉक्टरों को सम्मानित करने पर निरंतर जोर दिया जा रहा है।

स्वदेशी को बढ़ावा देने वाले वैज्ञानिक समुदाय का भी सम्मान
सरकार ने रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा, वित्त और विनिर्माण सहित विभिन्न उद्योगों में आत्मनिर्भर भारत के ध्वजवाहकों को सम्मानित किया है। इसके तहत उन वैज्ञानिकों का सम्मान हुआ है जिन्होंने न केवल स्वदेशी प्रौद्योगिकियों और प्लेटफार्मों की एक विस्तृत श्रृंखला विकसित की है, बल्कि मिसाइलों से लेकर प्रणोदन प्रणालियों और महत्वपूर्ण खनिजों तक, माइक्रोप्रोसेसरों से लेकर विमानन मौसम प्रणालियों तक, सफल कार्यान्वयन को भी सुनिश्चित किया है।

पद्मश्री
ए ई मुथुनायगम, अनिल कुमार रस्तोगी, अंके गौड़ा एम., आर्मिडा फर्नांडीज, अरविंद वैद्य, अशोक खड़े, अशोक कुमार सिंह, अशोक कुमार हलदर, बलदेव सिंह, भगवानदास रायकवार, भरत सिंह भारती, भिकल्या लाडक्या धिंडा, विश्व बंधु (मरणोपरांत), बृज लाल भट्ट, बुद्ध रश्मि मणि, बुधरी ताती, चंद्रमौली गद्दामनगु, चरण हेमब्रम, चिरंजी लाल यादव, दीपिका रेड्डी, धार्मिकलाल चुनीलाल पंड्या, गड्डे बाबू राजेंद्र प्रसाद, गफरूद्दीन मेवाती जोगी, गंभीर सिंह योन्जोन, गरिमेला बालकृष्ण प्रसाद (मरणोपरांत), गायत्री बालासुब्रमण्यम और रंजनी बालासुब्रमण्यम, गोपाल जी त्रिवेदी, गुडुरु वेंकट राव, एच वी हांडे, हैली वार, हरि माधव मुखोपाध्याय (मरणोपरांत), हरिचरण सैकिया, हरमनप्रीत कौर भुल्लर, इंदरजीत सिंह सिद्धू , जनार्दन बापूराव बोथे, जोगेश देउरी, जूजर वासी, ज्योतिष देबनाथ, के पजनीवेल, के रामासामी , के विजय कुमार, कविंद्र पुरकायस्थ, कैलाश चंद्र पंत , कलामंडलम विमला मेनन , केवल कृष्ण ठकराल, खेम राज सुंदरियाल, कोल्लकल देवकी अम्मा जी, कृष्णमूर्ति बालासुब्रमण्यम, कुमार बोस, कुमारसामी थंगराज, प्रो. लार्स-क्रिश्चियन कोच, ल्यूडमिला विक्टोरोवना खोखलोवा, माधवन रंगनाथन , मगंती मुरली मोहन, महेंद्र कुमार मिश्रा, महेंद्र नाथ रॉय, मामिदला जगदीश कुमार , मंगला कपूर , मीर हाजीभाई कासमभाई, मोहन नागर , नारायण व्यास, नरेश चंद्र देव वर्मा, नीलेश विनोदचंद्र मांडलेवाला, नुरुद्दीन अहमद, ओथुवर थिरुथानी स्वामीनाथन, डॉ. पद्मा गुरमेट, पालकोंडा विजय आनंद रेड्डी, पोखिला लेकथेपी , डॉ. प्रभाकर बसवप्रभु कोरे, प्रतीक शर्मा , प्रवीण कुमार, प्रेम लाल गौतम, प्रसेनजीत चटर्जी, डॉ. पुनिया मूर्ति नटेसन, आर कृष्णन (मरणोपरांत), आर वी एस मणि, रबिलाल टुडू , रघुपत सिंह , रघुवीर तुकाराम खेडकर, राजस्थपति करिअप्पा गौंडर, राजेंद्र प्रसाद, रामा रेड्डी मामिडी (मरणोपरांत), राममूर्ति श्रीधर, रामचन्द्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले, रतिलाल बोरिसागर, रोहित शर्मा , एस जी सुशीलम्मा, सांग्युसांग एस पोंगेनर , निरंजन दास, सरत कुमार पात्रा, सरोज मंडल, सतीश शाह (मरणोपरांत), सत्यनारायण नुवाल, सविता पूनिया, प्रोफेसर शफी शौक , शशि शेखर वेमपति, श्रीरंग देवबा लाड, शुभा वेंकटेश अयंगर, श्याम सुंदर, सिमांचल पात्रो, शिवशंकरी, डॉ. सुरेश हनागवाड़ी , स्वामी ब्रह्मदेव जी महाराज, टी टी जगन्नाथन (मरणोपरांत) , तगा राम भील, तरुण भट्टाचार्य, टेची गुबिन, तिरुवरुर भक्तवत्सलम, तृप्ति मुखर्जी, वीझिनाथन कामकोटि, वेम्पति कुटुम्ब शास्त्री, व्लादिमीर मेस्टविरिश्विली (मरणोपरांत), युमनाम जात्रा सिंह (मरणोपरांत)।

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