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पाकिस्तान में 100 साल पुराने हिंदू मंदिर में तोड़फोड़: भारत ने जताई कड़ी नाराजगी; बवाल की वजह क्या?
Wed, 02 Sep 2026 09:24 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 02 Sep 2026 09:24 PM IST
सार
पाकिस्तान के नरोवाल जिले के सिराज गांव में करीब 100 साल पुराने हिंदू मंदिर को कथित तौर पर गिराए जाने की खबर पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने इसे अल्पसंख्यक पूजा स्थल के खिलाफ निंदनीय तोड़फोड़ बताया और अधिकारियों की भूमिका पर भी चिंता जताई। भारत ने पाकिस्तान से तत्काल और पारदर्शी जांच के साथ दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
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रणधीर जायसवाल, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पाकिस्तान में करीब एक सदी पुराने हिंदू मंदिर को गिराए जाने पर भारत ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। मामला पाकिस्तान के नरोवाल जिले के सिराज गांव का है। भारत ने मंदिर को कथित तौर पर गिराए जाने की घटना की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के पूजा स्थल के खिलाफ तोड़फोड़ बताया है। साथ ही पाकिस्तान सरकार से पूरे मामले की तत्काल और पारदर्शी जांच कराने को कहा है।
कहां और किस मंदिर को लेकर विवाद है?
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह मंदिर करीब 100 साल पुराना था। मंदिर को कथित तौर पर नष्ट किए जाने की खबरें सामने आने के बाद भारत ने इस पर गंभीर चिंता जताई है। हालांकि, विदेश मंत्रालय के बयान में घटना से जुड़ी विस्तृत परिस्थितियों का कोई और ब्योरा नहीं दिया गया है।
भारत ने मंदिर गिराए जाने पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस घटना पर भारत का रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान में ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को नष्ट किए जाने को गंभीर चिंता के साथ देखा है। यह एक सदी पुराने अल्पसंख्यक पूजा स्थल के खिलाफ निंदनीय तोड़फोड़ है।
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भारत ने पाकिस्तान के अधिकारियों पर सवाल क्यों उठाए?
भारत ने सिर्फ मंदिर गिराए जाने की खबर पर चिंता नहीं जताई, बल्कि वहां के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अधिकारियों की उदासीनता और मंदिर की सुरक्षा करने में नाकामी चिंताजनक है। भारत के मुताबिक, इस तरह की घटनाएं पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
यह भी पढ़ें: ‘भारत रचनात्मक बातचीत करे’: सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान ने फिर बढ़ाया हाथ; क्या है पूरा विवाद?
भारत ने अल्पसंख्यकों को लेकर क्या चिंता जताई?
विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसी घटनाएं पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की लगातार बनी हुई असुरक्षा की याद दिलाती हैं। भारत ने धार्मिक स्वतंत्रता और पूजा स्थलों के अधिकारों के कथित उल्लंघन को भी गंभीर मुद्दा बताया है। मंत्रालय के बयान के मुताबिक, अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों और उनकी सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा बेहद जरूरी है।
पाकिस्तान से भारत ने क्या मांग की है?
भारत ने पाकिस्तान सरकार से मामले की तत्काल और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। साथ ही कहा है कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें पूरी तरह जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। भारत का कहना है कि इस मामले में सिर्फ जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी सुनिश्चित होनी चाहिए। भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की प्राथमिक जिम्मेदारी अपने सभी अल्पसंख्यक नागरिकों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही उनकी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।
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कहां और किस मंदिर को लेकर विवाद है?
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह मंदिर करीब 100 साल पुराना था। मंदिर को कथित तौर पर नष्ट किए जाने की खबरें सामने आने के बाद भारत ने इस पर गंभीर चिंता जताई है। हालांकि, विदेश मंत्रालय के बयान में घटना से जुड़ी विस्तृत परिस्थितियों का कोई और ब्योरा नहीं दिया गया है।
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भारत ने मंदिर गिराए जाने पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस घटना पर भारत का रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान में ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को नष्ट किए जाने को गंभीर चिंता के साथ देखा है। यह एक सदी पुराने अल्पसंख्यक पूजा स्थल के खिलाफ निंदनीय तोड़फोड़ है।
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भारत ने पाकिस्तान के अधिकारियों पर सवाल क्यों उठाए?
भारत ने सिर्फ मंदिर गिराए जाने की खबर पर चिंता नहीं जताई, बल्कि वहां के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अधिकारियों की उदासीनता और मंदिर की सुरक्षा करने में नाकामी चिंताजनक है। भारत के मुताबिक, इस तरह की घटनाएं पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
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भारत ने अल्पसंख्यकों को लेकर क्या चिंता जताई?
विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसी घटनाएं पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की लगातार बनी हुई असुरक्षा की याद दिलाती हैं। भारत ने धार्मिक स्वतंत्रता और पूजा स्थलों के अधिकारों के कथित उल्लंघन को भी गंभीर मुद्दा बताया है। मंत्रालय के बयान के मुताबिक, अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों और उनकी सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा बेहद जरूरी है।
पाकिस्तान से भारत ने क्या मांग की है?
भारत ने पाकिस्तान सरकार से मामले की तत्काल और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। साथ ही कहा है कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें पूरी तरह जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। भारत का कहना है कि इस मामले में सिर्फ जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी सुनिश्चित होनी चाहिए। भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की प्राथमिक जिम्मेदारी अपने सभी अल्पसंख्यक नागरिकों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही उनकी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।