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Paper Leak: ‘पेपर लीक करना सरकार का नया मंत्र', शिवसेना यूबीटी ने मुखपत्र सामना में सरकार पर साधा निशाना

आईएएनएस, मुंबई Published by: Asmita Tripathi Updated Thu, 14 May 2026 12:26 PM IST
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सार

नीट की पेपर लीक के मामले में शिवसेना यूबीटी ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा। शिवसेना यूबीटी ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा कि पेपर लीक करना सरकार का नया मंत्र है। इसके साथ ही अन्य कई सवाल भी पूछे। पढ़ें पूरी खबर

Paper leaks are the government's new mantra', Shiv Sena UBT targets the government in its mouthpiece Saamana.
सामना, शिवसेना का मुखपत्र - फोटो : ANI
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विस्तार

शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) की निष्पक्षता पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि व्यापक स्तर पर पेपर लीक की खबरों के बाद केंद्र सरकार को परीक्षा रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस फैसले से 22 लाख से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं, जिन्हें अब परीक्षा दोबारा देने के मानसिक और आर्थिक तनाव का सामना करना पड़ेगा।

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लीक करना मौजूदा प्रशासन का मूलमंत्र
ठाकरे खेमे ने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में दावा किया कि पेपर को लीक करना मौजूदा प्रशासन का मूलमंत्र बन गया है। आगे कहा कि सरकार बिना किसी घोटाले के महत्वपूर्ण परीक्षाएं कराने में असमर्थ प्रतीत होती है। छात्रों पर कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं, जिनमें पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जूते, घड़ियां और विशेष प्रकार के वस्त्रों पर प्रतिबंध शामिल हैं। वहीं, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) स्वयं प्रश्न पत्र संभालने में असफल हो रही है। 
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सामना के संपादकीय में कहा गया कि परीक्षा से कुछ दिन पहले ही परीक्षा की प्रतियां खुलेआम बाजार में लाखों रुपये में बेची जा रही थीं। आरोप है कि बिचौलियों और दलालों ने वैध प्रवेश की कड़ी प्रतिस्पर्धा से बचने के इच्छुक धनी माता-पिता को ये प्रतियां बेचने में मदद की।

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लाखों में लीक हुए पेपर बेचे जा रहे- सामना
संपादकीय में कहा गया है 'पेपर लीक से एनटीए के भ्रष्ट अधिकारियों, प्रिंटिंग प्रेस और निजी कोचिंग केंद्रों के बीच गहरे गठजोड़ का पर्दाफाश हुआ है। जांच से पता चलता है कि निजी मेडिकल कॉलेजों में सीटों के लिए 1-2 करोड़ रुपये देने के बजाय धनी उम्मीदवारों को 25-30 लाख रुपये में लीक हुए पेपर बेचे जा रहे हैं। आरोप है कि निजी कोचिंग संस्थान इन लीक का इस्तेमाल अपने छात्रों को पूरे अंक दिलाने के लिए करते हैं, जिनका उपयोग अगले वर्ष अधिक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियानों में किया जाता है।

चेतावनी मिलने पर भी एनटीए ने पेपर में बदलाव क्यों नहीं किया?
इसमें आगे कहा गया है, 'टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनुमान पेपर के रूप में इन पत्रों को प्रसारित किया गया था।' संपादकीय के अनुसार, इस लीक का दायरा व्यापक है। जांचकर्ताओं को महाराष्ट्र (नासिक, पुणे, लातूर), केरल, हरियाणा, बिहार, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर से इसके संबंध मिले हैं। सीबीआई ने कई गिरफ्तारियां की हैं, लेकिन संदेह बढ़ता जा रहा है क्योंकि 2017, 2021 और 2024 के पेपर लीक मामलों में पहले भी दोषी अक्सर जमानत पर छूट जाते थे। शिक्षा मंत्रालय पर यह स्पष्टीकरण देने का दबाव बढ़ता जा रहा है कि परीक्षा से एक सप्ताह पहले लीक की चेतावनी मिलने के बावजूद एनटीए ने पेपर में बदलाव क्यों नहीं किया।

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छात्रों को मानसिक पीड़ा क्यों सहनी चाहिए?
संपादकीय में पूछा गया, 'ईमानदार छात्र, जिनका इस व्यापार में कोई हाथ नहीं था, उन्हें यह मानसिक पीड़ा क्यों सहनी चाहिए?' उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने टिप्पणी की कि हालांकि एनटीए ने पुनर्परीक्षा के लिए पंजीकरण शुल्क माफ कर दिया है, लेकिन इससे ग्रामीण छात्रों को कोई खास राहत नहीं मिलती है, जिन्हें यात्रा और आवास का खर्च फिर से वहन करना होगा। इसके साथ ही एक अनिश्चित भविष्य के भारी मनोवैज्ञानिक आघात का सामना भी करना पड़ेगा।

शिक्षा बाजार के कारण रुका भविष्य
संपादकीय में यह टिप्पणी की गई है कि देशभर में माता-पिता और छात्र अब उस सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जिसके बारे में उनका दावा है कि सरकार इस मुद्दे से भाग रही है। ठाकरे खेमे ने कहा कि फिलहाल लाखों डॉक्टर बनने की चाह रखने वाले छात्र अधर में लटके हुए हैं। उनका भविष्य एक ऐसे शिक्षा बाजार के कारण रुका हुआ है जो अब भी मनमानी से चल रहा है।



 

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