लड़ाकू विमान के सामने आया था 171 यात्रियों से भरा प्लेन: एएआईबी रिपोर्ट में खुलासा, सामने आई चौंकाने वाली चूक
गोवा के डाबोलिम एअरपोर्ट पर 3 अप्रैल को एअर इंडिया एक्सप्रेस का विमान नौसेना के लड़ाकू विमान के सामने रनवे पर पहुंच गया था। विमान में 171 लोग सवार थे। एएआईबी की जांच में क्रू की गलती और रेडियो पर निर्देशों की गलत समझ को घटना का संभावित कारण बताया गया है। आखिर पायलट ने किस निर्देश को रनवे पर जाने की अनुमति समझ लिया? क्या प्रशिक्षु पायलट की चूक भी हादसे की वजह बनी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विस्तार
गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट पर अप्रैल में एअर इंडिया एक्सप्रेस के विमान और नौसेना के लड़ाकू विमान के बीच टक्कर का खतरा पैदा हो गया था। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की अंतिम रिपोर्ट में इस गंभीर घटना के लिए एअर इंडिया एक्सप्रेस के क्रू की लापरवाही और गलत संचार को संभावित कारण बताया गया है। विमान में 171 लोग सवार थे। गनीमत रही कि इस घटना में किसी को चोट नहीं आई।
क्या थी पूरी घटना और कैसे टकराने से बचे दोनों विमान?
यह घटना 3 अप्रैल को सुबह गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट पर हुई थी। यहां एअर इंडिया एक्सप्रेस का बोइंग 737-8 विमान दिल्ली जाने वाली उड़ान एएक्सबी 1109 के लिए तैयार था। इसी दौरान भारतीय नौसेना का एक लड़ाकू विमान भी उड़ान भरने वाला था। एअर इंडिया एक्सप्रेस के विमान में कुल 171 लोग सवार थे। दोनों विमानों की मौजूदगी के दौरान रनवे पर ऐसी स्थिति बन गई, जिससे बड़ा हादसा हो सकता था। हालांकि, समय रहते स्थिति संभल गई और किसी को चोट नहीं आई। जांच में सामने आया कि विमान के पायलटों ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल के निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया था।
एअर इंडिया एक्सप्रेस के क्रू से कहां हुई गलती?
एएआईबी की 35 पन्नों की अंतिम जांच रिपोर्ट के मुताबिक, घटना का एक प्रमुख कारण पायलटों का निर्देशों को ठीक से नहीं मानना था। एयरपोर्ट पर सतह की गतिविधियों पर नजर रखने वाले एसएमसी नियंत्रक ने विमान के क्रू को निर्देश दिया था कि वे निर्धारित स्थान पर रुकें और वहां पहुंचने के बाद नौसेना के एप्रोच एयर ट्रैफिक कंट्रोल से 119.7 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी पर संपर्क करें। लेकिन क्रू ने इस निर्देश का पूरी तरह पालन नहीं किया। विमान को रनवे पर प्रवेश करने से पहले नौसेना के एयर ट्रैफिक कंट्रोल से अनुमति और संपर्क सुनिश्चित करना चाहिए था। जांच एजेंसी के अनुसार, अगर पायलट निर्धारित स्थान पर रुककर नौसेना के एटीसी से संपर्क करते, तो इस घटना को रोका जा सकता था।
'एक्सपेक्ट बैकट्रैक' निर्देश को पायलट ने कैसे समझ लिया?
जांच में गलत संचार को भी घटना का बड़ा कारण बताया गया है। एसएमसी नियंत्रक ने रेडियो पर 'एक्सपेक्ट बैकट्रैक' कहा था। इसका मतलब था कि विमान को आगे पीछे की दिशा में रनवे इस्तेमाल करने की प्रक्रिया के लिए तैयार रहना चाहिए। लेकिन विमान उड़ा रहे पायलट ने इस निर्देश को रनवे पर प्रवेश करने की अनुमति समझ लिया। इस गलतफहमी के कारण पायलट का पूरा ध्यान रनवे पर जाने की तैयारी में लग गया। उसने दोबारा संपर्क करके यह स्पष्ट करने की कोशिश भी नहीं की कि क्या उसे वास्तव में रनवे पर जाने की अनुमति मिल गई है। एएआईबी के मुताबिक, अगर नियंत्रक पायलट से निर्देश दोहराने को कहता और गलत जवाब मिलने पर उसे सुधारता, तो स्थिति को संभाला जा सकता था। रिपोर्ट में इसे भी घटना का एक सहायक कारण बताया गया है।
प्रशिक्षु पायलट की भूमिका और निगरानी में क्या कमी रही?
रिपोर्ट में विमान के दूसरे पायलट यानी पायलट मॉनिटरिंग की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। वह प्रशिक्षु था और निर्देशों के लिए अपने प्रशिक्षक पर अधिक निर्भर था। विमान टैक्सी करते हुए निर्धारित स्थान के पास पहुंचा तो वह रनवे पर उड़ान भरने से जुड़े आंकड़ों की जांच करने में व्यस्त हो गया। इस दौरान उसका ध्यान रेडियो पर होने वाली बातचीत से हट गया। वह एयर ट्रैफिक कंट्रोल के निर्देशों की प्रभावी ढंग से निगरानी नहीं कर पाया। साथ ही उसने विमान उड़ा रहे पायलट को बिना अनुमति रनवे पर प्रवेश करने से रोकने के लिए चेतावनी भी नहीं दी। एएआईबी ने इसे घटना का एक और सहायक कारण माना है। जांच एजेंसी ने कहा कि पायलटों के बीच बेहतर तालमेल और निर्देशों की सही समझ बेहद जरूरी है।
जांच एजेंसी ने भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए क्या सुझाव दिए?
- एएआईबी ने एअर इंडिया एक्सप्रेस को सभी क्रू सदस्यों को इस घटना से जुड़ी गलतियों के बारे में जागरूक करने के लिए सर्कुलर जारी करने की सलाह दी है। उड़ान एएक्सबी 1109 के क्रू की काउंसलिंग कराने और विमान के मुख्य पायलट को सुरक्षा संबंधी कमियों पर विशेष प्रशिक्षण देने की सिफारिश भी की गई है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों के लिए भी निर्देश जारी करने को कहा गया है, ताकि वे रेडियो पर मानक शब्दों का इस्तेमाल करें और पायलटों के जवाब को ध्यान से सुनें। रिपोर्ट में 'एक्सपेक्ट बैकट्रैक' जैसे शब्दों के इस्तेमाल की समीक्षा करने की सलाह दी गई है, क्योंकि इन्हें रनवे पर प्रवेश की अनुमति समझने की गलती हो सकती है।
- इसके अलावा, डाबोलिम एयरपोर्ट के टैक्सीवे एन2 को संभावित खतरे वाला स्थान घोषित करने पर विचार करने को कहा गया है। यह टैक्सीवे सिविल एप्रन के बे नंबर एक और दो के पास है, जहां विमानों के आपस में टकराने और रनवे पर गलत तरीके से प्रवेश करने का खतरा अधिक हो सकता है। जांच एजेंसी ने डीजीसीए, एएआईबी और रक्षा अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने को प्राथमिकता देने की सिफारिश की है। नौसेना के आईएनएस हंसा को जमीन से जुड़े नियंत्रकों और टावर के बीच संपर्क बदलने की प्रक्रिया भी तय करने को कहा गया है। घटना के बाद नौसेना और एएआई अधिकारियों ने बैठक कर व्यवस्था में बदलाव किया था। अब दिन की ड्यूटी संभालते समय एसएमसी नियंत्रक नौसेना के एटीसी से हॉटलाइन पर रनवे और फ्रीक्वेंसी बदलने जैसी जरूरी जानकारियों की पुष्टि करेगा।