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6 Years of Article 370: जितेंद्र सिंह बोले- जम्मू-कश्मीर में अब तुष्टिकरण से नहीं, नीति से कायम हो रही शांति

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Sun, 20 Jul 2025 04:29 PM IST
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सार

Sixth Anniversary Of The Abrogation Of Article 370: डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पहले की सरकारें पाकिस्तान से बात करने और अलगाववादियों को मनाने की कोशिश करती थीं, लेकिन इसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकलता था। 'मोदी सरकार ने इस नीति से हटकर सख्त रुख अपनाया। अब शांति दूसरों की शर्तों पर नहीं, बल्कि भारत सरकार और जनता की प्राथमिकताओं पर आधारित है।' 

Peace no longer bought through appeasement in Jammu and Kashmir: Jitendra Singh
डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय मंत्री - फोटो : ANI
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विस्तार

अनुच्छेद 370 हटाए जाने की छठी वर्षगांठ से पहले केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि अब जम्मू-कश्मीर में शांति तुष्टिकरण की नीति से नहीं, बल्कि मजबूत और स्पष्ट नीति से लाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने एक बड़ा बदलाव लाया है, जिसमें अब अलगाववादियों को भी झुकना पड़ा है। एक विशेष वीडियो इंटरव्यू में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों में देश के साथ मानसिक और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ा है। उन्होंने कहा, 'पहले वहां के नागरिक खुद को अलग मानते थे क्योंकि उन्हें बचपन से ऐसी सोच में ढाला गया था। अब उनमें देश के प्रति अपनापन और आत्मीयता की भावना आई है।'
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2019 में क्या हुआ था?
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाकर जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जे से मुक्त किया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, में बांट दिया था।

कानूनों में बदलाव और समानता की ओर कदम
उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 की वजह से कई भारतीय कानून जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होते थे, जिससे वहां के लोगों को कई अधिकार नहीं मिलते थे। 'जम्मू-कश्मीर की बेटियों को पहले संपत्ति में अधिकार नहीं मिलता था अगर वे राज्य के बाहर शादी करती थीं। अब यह भेदभाव खत्म हो गया है।'

'पाकिस्तान से आए शरणार्थी
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को नागरिकता नहीं मिलती थी, जबकि उन्हीं समुदायों से देश को दो प्रधानमंत्री (इंदर कुमार गुजराल और मनमोहन सिंह) और एक उपप्रधानमंत्री (लालकृष्ण आडवाणी) मिले। 'यह न सिर्फ संवैधानिक और लोकतांत्रिक नजरिए से गलत था, बल्कि मानवीय गरिमा के भी खिलाफ था। अब ये सभी अन्याय सुधारे जा रहे हैं।' 

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युवाओं में आत्मविश्वास और विकास
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अब जम्मू-कश्मीर के युवाओं में नया आत्मविश्वास है और वे देश के अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। 'आम नागरिकों में भी देश के साथ जुड़ाव की भावना बढ़ी है।' उन्होंने बताया कि पहले आतंकवाद की वजह से कई विकास परियोजनाएं अधूरी रह जाती थीं। 'रेलवे की बात करें तो पहली बार 1972 में जम्मू-कश्मीर में ट्रेन पहुंची थी, लेकिन कश्मीर घाटी तक ट्रेन पहुंचने में पांच दशक लग गए। अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ट्रेन कश्मीर घाटी तक पहुंच रही है।'
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