Supreme Court: कथित 912 करोड़ बैंकिंग घोटाले की जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर
सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों, बैंकों और एक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी से जुड़े कथित 912 करोड़ रुपये के बैंकिंग घोटाले की जांच की मांग की गई। याचिका में न्यायिक निगरानी में जांच कराने और विशेषज्ञ समिति गठित करने की अपील की गई है।
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सुप्रीम कोर्ट में आज एक जनहित याचिका दायर की गई। इसमें एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और नोएडा स्थित एक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी से जुड़े कथित बैंकिंग घोटाले की न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है।
याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह एक न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति का गठन करे। इस समिति में भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय, प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो के अधिकारियों को शामिल किया जाए।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों की मदद से बड़े पैमाने पर कॉरपोरेट और बैंकिंग धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया है। इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। वैकल्पिक मांग के रूप में याचिका में ईडी, एसएफआईओ और सीबीआई को जांच का निर्देश देने की भी मांग की गई है। यह मांग अर्न्स्ट एंड यंग की फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के आधार पर की गई है।
याचिका के अनुसार, संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ने वर्ष 2012 से 2015 के बीच भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले सात बैंकों के समूह से लगभग 912 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किया था। याचिका में दावा किया गया है कि वर्ष 2018 में हुई फोरेंसिक ऑडिट में वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले थे। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 902 करोड़ रुपये शेल कंपनियों, फर्जी विक्रेताओं, अघोषित बैंक खातों और संदिग्ध लेनदेन के माध्यम से दूसरी जगह भेजे गए हो सकते हैं।
मुजफ्फरनगर निवासी प्रतीक्षा और दो अन्य लोगों द्वारा दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों की मदद से किया गया एक बड़ा बैंकिंग घोटाला हो सकता है। याचिकाकर्ताओं ने मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।