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सिप्री की रिपोर्ट: ड्रैगन को मात देने की तैयारी में जुटा भारत, बढ़ाया परमाणु हथियारों का जखीरा; पीछे छूटा PAK

एएनआई, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 08 Jun 2026 05:54 PM IST
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सार

सिप्री की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2025 में अपने परमाणु शस्त्रागार और रणनीतिक क्षमताओं को और मजबूत किया है। अनुमान है कि 2026 की शुरुआत तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु हथियार हो गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत लंबी दूरी की ऐसी प्रणालियां विकसित कर रहा है जो चीन के हर हिस्से तक पहुंचने में सक्षम हैं।

SIPRI report says India widens nuke arsenal lead over Pakistan Delhi military spend arms import rise China
सिप्री की रिपोर्ट में दावा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिप्री) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2025 में अपने परमाणु हथियार भंडार में एक बार फिर मामूली वृद्धि की है और नए प्रकार की परमाणु हथियार प्रक्षेपण प्रणालियों के विकास को जारी रखा है। यह रिपोर्ट भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु शक्ति संतुलन में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करती है।


आठ जून को जारी सिपरी की 2026 की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का आधुनिकीकरण कार्यक्रम अब लंबी दूरी के ऐसे हथियार विकसित करने पर अधिक केंद्रित है, जो चीन के पूरे क्षेत्र में स्थित लक्ष्यों तक पहुंचने में सक्षम हों। हालांकि, भारत की रणनीतिक योजना में पाकिस्तान के साथ उसकी पुरानी प्रतिद्वंद्विता भी प्रमुख बनी हुई है। 
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भारत के पास करीब 190 परमाणु हथियार
हथियारों, निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की वार्षिक समीक्षा पेश करने वाली इस रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की शुरुआत तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु हथियार होने का अनुमान है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान भी नई हथियार प्रणालियों का विकास कर रहा है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले दशक में पाकिस्तान का परमाणु जखीरा भी बढ़ सकता है। 

सैन्य खर्च करने के मामले में पांचवें नंबर पर भारत 
सिप्री की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2021-25 की अवधि में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य व्यय करने वाला देश बना हुआ है। 2025 में भारत का सैन्य व्यय 92.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। रक्षा खर्च के मामले में भारत केवल अमेरिका, चीन, रूस और जर्मनी से पीछे है।

हथियारों के आयात में दूसरे नंबर पर देश
हथियारों के आयात के मामले में भी भारत की स्थिति महत्वपूर्ण है। 2021-25 की अवधि में, भारत प्रमुख हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा आयातक रहा, जिसने वैश्विक हथियारों के आयात का 8.2 प्रतिशत हिस्सा लिया। इस अवधि में सबसे बड़े हथियार प्राप्तकर्ताओं में यूक्रेन, भारत, सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान शामिल थे, जिन्होंने कुल हथियार आयात का 35 प्रतिशत हिस्सा लिया।

भारत-PAK संघर्ष को बताया गंभीर सैन्य संकट
इस रिपोर्ट में मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए ऑपरेशन सिंदूर को दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों के बीच "असामान्य रूप से गंभीर सैन्य संकट" बताया गया है। इस दौरान, सीमा पार तनाव के कारण भारत ने पाकिस्तान के हवाई और मिसाइल ठिकानों पर हमला किया, जिनके परमाणु-संबंधी भूमिका होने की संभावना थी। हालांकि, सिपरी ने कहा कि दोनों पक्षों ने तनाव कम करने के लिए कदम उठाए।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस संकट के दौरान भारत और पाकिस्तान ने पहली बार सक्रिय सैन्य संघर्ष में साइबर अभियानों को शामिल किया गया, जो दोनों प्रतिद्वंद्वियों के बीच प्रतिरोधक क्षमता और युद्ध के बदलते स्वरूप को दर्शाता है।

दुनिया में करीब 12,187 परमाणु हथियार
यह रिपोर्ट वैश्विक परमाणु परिदृश्य पर भी प्रकाश डालती है। परमाणु हथियार रखने वाले दुनिया के नौ देश - अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इस्राइल - राष्ट्रीय शक्ति के साधन के रूप में परमाणु हथियारों पर पहले से अधिक निर्भर हो रहे हैं। यह दशकों के परमाणु हथियारों की संख्या और भूमिका को कम करने के प्रयासों के विपरीत है, जबकि गलत अनुमान और तनाव बढ़ने का जोखिम भी बढ़ रहा है।

जनवरी 2026 तक दुनिया में अनुमानित 12,187 परमाणु हथियार थे, जिनमें से लगभग 9,745 सैन्य भंडार में संभावित उपयोग के लिए मौजूद थे। सिपरी का अनुमान है कि 2026 की शुरुआत तक भारत का परमाणु हथियार भंडार बढ़कर लगभग 190 हो गया है।

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कुल परमाणु हथियारों में करीब 86 फीसदी अमेरिका और रूस के पास
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और रूस के पास दुनिया के लगभग 86 प्रतिशत परमाणु हथियार हैं और दोनों देश अपने परमाणु आधुनिकीकरण कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहे हैं। चीन भी अपने परमाणु शस्त्रागार के विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। उसका अनुमानित भंडार एक वर्ष में 600 से बढ़कर 620 वारहेड तक पहुंच गया है।
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